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इराक ने 21 आतंकवादियों को दी सामूहिक फांसी, दो आत्मघाती हमलों में थे शामिल
Tue, 17 Nov 2020 04:18 PM IST
दीप्ति मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बगदाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बगदाद
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Tue, 17 Nov 2020 04:18 PM IST
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fansi
- फोटो : social media
इराक में आए दिन आतंकवादी हमलों की खबर आती रहती है। हाल ही में इराक में 21 आतंकियों और हत्यारों को सोमवार को सामूहिक तौर पर फांसी पर लटका दिया गया। इराक के आंतरिक मंत्रालय ने एक बयान जारी कर यह जानकारी दी है।
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दक्षिणी इराक के शहर नासिरिया की जेल में इन आतंकियों और हत्यारों को फांसी दी गई। इनमें इराक के उत्तरी शहर तल अफर में हुए दो आत्मघाती हमलों में संलिप्त आरोपी भी शामिल हैं। इन हमलों में दर्जनों लोग मारे गए थे। मंत्रालय ने अपने बयान में फांसी पर लटकाए गए आतंकवादियों और हत्यारों की पहचान नहीं बताई है और न ही यह बताया कि उन्हें कि अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था।
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इराक में कई बार सामूहिक फांसी दी गई
अमेरिका समर्थक सैन्य अभियान में वर्ष 2014 से 2017 के दौरान इस्लामिक स्टेट को पराजित करने के बाद से इराक में सैकड़ों संदिग्ध जिहादियों पर मुकदमा चलाया गया है और कई बार सामूहिक तौर पर फांसी दी गई है। मानवाधिकार समूहों ने इराकी और अन्य क्षेत्रीय बलों पर न्यायिक प्रक्रिया में विसंगतियों और मुकदमों में खामियों का आरोप लगाया है, लेकिन इराक का कहना है कि उसके मुकदमें निष्पक्ष हैं। बता दें कि इस्लामिक स्टेट ने 2014 में एक तिहाई इराक पर कब्जा कर लिया था, लेकिन तीन वर्षों के दौरान उसे इराक और पड़ोसी देश सीरिया में काफी हद तक पराजित कर दिया गया था।
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आईएस ने बदली अपनी रणनीति
बता दें कि सीरिया और इराक से पांव उखड़ने के बाद आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएस ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। बीते दिनों आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट अब दक्षिण एशिया में पैर जमाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान में उसे पूरा संरक्षण भी मिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 45 वें सत्र से इतर आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने अफगानिस्तान की स्थिति को चिंताजनक माना। विशेषज्ञों का कहना था कि अफगानिस्तान में तालिबान से अलग हुए कुछ कमांडर आईएस से जुड़कर लड़ाकों की भर्ती कर रहे हैं।
दूसरे देशों में फैल रहा नेटवर्क
बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र ने अपने अनुमान में कहा था कि सीरिया और इराक में 10 हजार से अधिक इस्लामिक स्टेट के लड़ाके सक्रिय है और इस साल के हमलों में काफी वृद्धि हुई है। युद्ध के मैदान में इस्लामिक स्टेट की हार के बावजूद इन आतंकी संगठन के छोटे-छोटे समूह स्वतंत्र रूप से इन दोनों देशों में सक्रिय है। इतना ही नहीं इस्लामिक स्टेट चरमपंथी समूह का दायरा भी बढ़ रहा है। आईएस के आतंकी अब सीरिया और इराक के अलावा दूसरे देशों में भी खतरनाक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।