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खतरे में डॉलर: शंघाई सहयोग संगठन के सामने ईरान का प्रस्ताव, सदस्य देश तैयार करें विकल्प

Sat, 04 Jun 2022 04:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 04 Jun 2022 04:31 PM IST
सार

विश्लेषकों का कहना है कि अगर एससीओ में ईरान के प्रस्ताव पर सहमति बनी, तो उसे अमेरिकी वर्चस्व वाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जाएगा। अभी दुनिया में ज्यादातर कारोबार अमेरिकी डॉलर के जरिए होता है, हालांकि डॉलर के इस्तेमाल में धीरे-धीरे कमी आ रही है...

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Iran proposed before Shanghai Cooperation Organization asked the member countries should prepare options of dollar currency
शंघाई सहयोग संगठन - फोटो : iStock

विस्तार

ईरान ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सामने एक नई मुद्रा तैयार करने का प्रस्ताव रखा है। ईरान ने कहा है कि एससीओ के सदस्य देशों को उसी प्रस्तावित मुद्रा के जरिए आपस में कारोबार करना चाहिए। ईरानी प्रस्ताव के बारे में जानकारी गुरुवार को ईरान की समाचार एजेंसी ईरना ने दी। उसके मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री मेहदी सफारी ने ये प्रस्ताव एससीओ को भेजा है।

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ईरान ने कहा है कि नई मुद्रा के चलन से यूरेशिया क्षेत्र के देशों में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही अपनी मुद्रा होने पर ये देश पश्चिमी प्रतिबंधों के असर से भी खुद बचा सकेंगे। ईरान ने दावा किया है कि पश्चिमी देशों की तरफ से विभिन्न देशों पर लगाए गए प्रतिबंध गैर-कानूनी और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।
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विश्लेषकों का कहना है कि अगर एससीओ में ईरान के प्रस्ताव पर सहमति बनी, तो उसे अमेरिकी वर्चस्व वाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जाएगा। अभी दुनिया में ज्यादातर कारोबार अमेरिकी डॉलर के जरिए होता है, हालांकि डॉलर के इस्तेमाल में धीरे-धीरे कमी आ रही है।

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ब्राजील भी लाएगा नई मुद्रा

विश्लेषक बेन नॉर्टन ने वेबसाइट मल्टीपोलिरिस्टा.कॉम पर लिखी एक टिप्पणी में कहा है कि ईरान की ये पेशकश दूरगामी महत्त्व वाली है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि ब्राजील के अगले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार लूला दा सिल्वा ने वादा किया है कि वे सत्ता में आए, तो लैटिन अमेरिकी देशों के लिए वे ‘सुर’ (दक्षिण) नाम से एक नई मुद्रा लॉन्च करेंगे, ताकि ये देश बिना डॉलर का इस्तेमाल किए आपस में कारोबार कर सकें। ब्राजील में चुनाव अगले अक्तूबर में होगा। ताजा जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक लूला के पहले दौर के ही मतदान में राष्ट्रपति चुन लिए जाने की मजबूत संभावना है।


शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में आतंकवाद विरोधी समूह के रूप में हुई थी। लेकिन उसके बाद ये राजनीतिक और आर्थिक सहयोग का भी मंच बन गया है। इसमें चीन, रूस, भारत, और पाकिस्तान के अलावा पांच मध्य एशियाई देश शामिल हैं। ईरान को भी इसकी सदस्यता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अनुमान है कि एससीओ में शामिल देशों के पास दुनिया की 40 फीसदी आबादी है। इन देशों का साझा जीडीपी दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद के एक तिहाई के बराबर है।

भारत ने रुबल में की खरीद

बीते 26 मई को एससीओ की 17वीं फोरम मीटिंग ऑनलाइन माध्यम से हुई। इसकी अध्यक्षता रूस ने की। इसमें एससीओ देशों के बीच ‘अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक एवं मानवीय संबंध के क्षेत्रों में अधिक गहरे रिश्ते’ बनाने के उपायों पर चर्चा हुई। चीन और रूस समेत एससीओ के कई सदस्य देशों के खिलाफ पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। समझा जाता है कि इसी कारण इन देशों में डॉलर के विकल्प के रूप में अपनी मुद्रा तैयार करने का विचार आया है।   



रूस और चीन के बीच आपसी मुद्रा में कारोबार में बीते तीन महीनों में भारी बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी वेबसाइट ब्लूमबर्ग के मुताबिक बीते तीन महीनों में इन दोनों देशों के बीच चार बिलियन डॉलर का भुगतान रुबल और युवान में हुआ। ऐसी खबरें हैं कि इस अवधि में भारत और रूस के बीच भी रुबल और रुपये में व्यापार में वृद्धि हुई है।

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