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चीन के साथ सौदे से पहले ईरान का भारत को झटका, चाबहार परियोजना से किया बाहर

Tue, 14 Jul 2020 09:27 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 14 Jul 2020 09:27 PM IST
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Iran ousted India from Chabahar project before making a huge deal with China
चाबहार पोर्ट

चीन और ईरान के बीच होने जा रही 400 अरब डॉलर के सौदे से ठीक पहले भारत को बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। ईरान ने भारत को चाबहार रेल परियोजना से बाहर कर दिया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि समझौते के चार साल बाद भी भारत ने इस परियोजना के लिए फंड नहीं दिया है, ऐसे में अब वह खुद इस परियोजना को पूरा करेगा।

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ईरान ने कहा है कि वह इस परियोजना पर भारत की मदद के बिना ही आगे बढ़ेगा। इसके लिए उसने देश के नेशनल डेवलपमेंट फंड में से 40 करोड़ डॉलर की राशि का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। अभी तक इसे भारत की सरकारी रेलवे कंपनी इरकान पूरा करने वाली थी। इस योजना को लेकर ईरान, भारत और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। 
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ईरान में 400 अरब डॉलर का निवेश करेगा चीन

भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच चीन जल्द ही ईरान के साथ एक बड़ा सौदा कर सकता है। इसके अनुसार चीन कम दामों पर ईरान से तेल खरीदेगा और बदले में वहां 400 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इसके साथ ही चीन ईरान को आधुनिक हथियार भी मुहैया कराएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच 25 साल के रणनीतिक समझौते पर वार्ता पूरी हो चुकी है।  

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मध्य एशिया तक सीधी पहुंच बनाने की थी योजना

चाबहार प्रोजेक्ट के जरिए भारत ने ईरान से अफगानिस्तान के लिए सड़क और रेल मार्ग विकसित करने की योजना बनाई थी। इस संपर्क मार्ग को कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान समेत अन्य देशों तक ले जाने की योजना थी। भारत इसके जरिए मध्य एशिया तक सीधी पहुंच बनाना चाहता था। इस योजना से चीन और पाकिस्तान दोनों चिंता में थे।

अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते नहीं शुरू किया था काम

साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस पूरी योजना पर करीब 1.6 अरब डॉलर का निवेश होना था। इसे लेकर इरकान के इंजीनियर ईरान भी गए थे लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत ने काम शुरू नहीं किया था। भारत पहले ही ईरान के साथ तेल का आयात कम कर चुका है। भारत अभी तक ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अरबों रुपये खर्च कर चुका है। हालांकि, अमेरिका की वजह से भारत और ईरान के संबंध नाजुक बने हुए हैं। 

 

बड़ा सवाल, फैसले के पीछे चीन तो नहीं? 

चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह से महज सौ किलोमीटर दूर है जिसे भारत का पाक को जवाब माना जा रहा था। पहले भी आशंका जताई जा रही थी कि अगर चीन ईरान में भारी निवेश करता है तो चाबहार बंदरगाह की प्रासंगिकता खत्म हो सकती है और भारत इससे प्रभावित हो सकता है। ईरान के इस कदम को जानकार असल में चीन का पैंतरा मान रहे हैं। भारत ने हाल ही में डाटा सुरक्षा के नाम पर चीन के 59 एप्ल प्रतिबंधित किए थे। चीन इससे भी बौखलाया हुआ था।

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