Iran Nuclear Deal: ईरान ने रखी मुआवजे की मांग, परमाणु डील के बाकी मुद्दों पर लगभग सहमति
Iran Nuclear Deal: अमेरिका ने ईरान से कहा है कि वह उन मांगों को छोड़ दे, जिनका परमाणु डील से सीधा संबंध नहीं है। बताया जाता है कि अमेरिका ईरान की इस मांग से भी सहमत नहीं है कि वह ईरान के खास बल- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स पर से प्रतिबंध हटाए...
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ईरान परमाणु डील को पुनर्जीवित करने की राह में ईरान की एक खास मांग रुकावट बनी हुई है। ईरान मांग कर रहा है कि समझौते में यह प्रावधान शामिल किया जाए कि अगर भविष्य में फिर कभी अमेरिका इस करार से अलग होगा, तो ईरान को उसके बदले में मुआवजा दिया जाएगा। परमाणु डील को पूरा करने के मकसद से फिर शुरू हुई वार्ता से जुड़े राजनयिकों ने ये बात बताई है।
ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के मकसद से यह समझौता 2015 में हुआ था। तब बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति थे। लेकिन जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने, तो 2018 में उन्होंने अमेरिका को इस करार से अलग कर लिया। 2021 में जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने इस डील को फिर से लागू करने की कोशिश शुरू की। बताया जाता है कि इस मकसद से वियना में हुई बातचीत में ज्यादातर मसलों पर सहमति बन गई है। लेकिन इसी बीच मुआवजे का मुद्दा आ खड़ा हुआ है।
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन के मुताबिक यूरोपियन यूनियन के अधिकारियों ने पिछले हफ्ते परमाणु डील का आखिरी ड्राफ्ट दस्तखत के लिए अमेरिका और ईरान के पास भेज दिया। उधर ईरान की तरफ से वार्ता में शामिल दल के मुख्य सलाहकार ने भी एक ट्विट में इस बात की पुष्टि की है कि समझौता होने के करीब है। लेकिन वार्ता में शामिल एक राजनयिक ने सीएनएन को बताया कि ईरान अमेरिका के किसी भावी राष्ट्रपति के रुख को लेकर आशंकित है।
राजनयिक ने सीएनएन से कहा- ‘ऐसा लगता है कि दोनों पक्षों के विचारों में निकटता बनाने की दिशा में प्रगति हुई है। जिन मुद्दों पर सहमति बनने के संकेत हैं, उनमें विदेशों में कारोबार करने वाली ईरानी कंपनियों पर प्रतिबंध का मसला भी है। अब जो मुख्य मुद्दा बचा है, वह ईरान की तरफ से मांगी जा रही यह गारंटी है कि अगर भविष्य में किसी अमेरिकी प्रशासन ने डील से हटने का फैसला किया, तो ईरान को उसके बदले मुआवजा दिया जाएगा।’
मुआवजे की मांग की पुष्टि ईरानी वार्ता टीम के सलाहकार मोहम्मद मारांदी ने भी की है। मंगलवार को उन्होंने सीएनएन से बातचीत में में कहा- इस बात की गारंटी की जानी चाहिए कि अगर भविष्य में कोई अमेरिकी प्रशासन फिर से समझौते से हटा, तो अमेरिका को उसकी कीमत चुकानी होगी। मारांदी ने कहा कि दो अन्य मुद्दों पर भी अभी मतभेद कायम हैं। लेकिन उन्होंने इन मुद्दों का जिक्र करने से इनकार कर दिया।
परमाणु डील के मामले में अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल बातचीत कतर और यूरोपियन यूनियन (ईयू) की मध्यस्थता में चल रही है। कतर के विदेश मंत्री पिछले सप्ताहांत तेहरान आए थे। यहां उनकी ईरान के वार्ताकार अली बाघेरी कनी से बातचीत हुई। ईयू की प्रवक्ता नबीला मसराली ने कहा है कि ईयू समझौते को संपन्न करने के लिए अमेरिका और इससे संबंधित अन्य पक्षों के साथ संपर्क में है।
इस बीच अमेरिका ने ईरान से कहा है कि वह उन मांगों को छोड़ दे, जिनका परमाणु डील से सीधा संबंध नहीं है। बताया जाता है कि अमेरिका ईरान की इस मांग से भी सहमत नहीं है कि वह ईरान के खास बल- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स पर से प्रतिबंध हटाए। अमेरिका ने इस बल को विदेशी आतंकवादी संगठनों की सूची में डाल रखा है।