Iran-Israel Conflict: हमास से जंग के बीच इस्राइल की ईरान से ठनी, क्या एक और युद्ध की ओर बढ़ रही दुनिया?
Iran vs Israel: इस्राइल-ईरान के बीच तनाव बढ़ गया। एक अप्रैल को सीरिया में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले के बाद से यह तनाव बढ़ रहा है। क्या दुनिया में युद्ध का एक और मोर्चा खुल सकता है? इस विश्लेषण से समझें...
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दुनिया के कई देश युद्ध में घिरे हुए हैं। जहां रूस-यूक्रेन जंग को दो साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है, वहीं हमास और इस्राइल बीते छह महीने से लड़ाई लड़ रहे हैं। अब ईरान और इस्राइल के बीच संकट उत्पन्न होने की आशकाएं बढ़ गई हैं। अब ईरान और इस्राइल के बीच भी जंग छिड़ती दिख रही है। ईरान ने शनिवार को इस्राइल पर दर्जनों ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। इस कदम के बाद दो कट्टर दुश्मन देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इस्राइली सेना ईरान की हिमाकत का जवाब दे रही है। वहीं, अमेरिका भी अपने दोस्त देश का साथ दे रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान द्वारा इस्राइल की ओर दागे गए ड्रोन को अमेरिकी सेना मार गिरा रही है।
आइये जानते हैं कि ईरान-इस्राइल के बीच हमले की क्या रिपोर्ट है? आखिर ईरान ने हमला क्यों किया? हमले की चेतावनी पर इस्राइल ने क्या कहा है? युद्ध का खतरा कितना बड़ा है?
ईरान-इस्राइल के बीच हमले की रिपोर्ट क्या है?
हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि ईरान आने वाले दिनों में इस्राइल के अंदर सैन्य और सरकार से जुड़े ठिकानों पर हमले का आदेश दे सकता है। यह चेतवानी अमेरिकी खुफिया आंकलन के बाद जारी की गई थी।
अमेरिकी खुफिया आंकलन के हवाले से आई ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान इस्राइल के अंदर बैलिस्टिक मिसाइलों या ड्रोन का इस्तेमाल करके हमले शुरू कर सकता है। आखिरकार हुआ भी ऐसा ही। ईरान ने शनिवार देर रात इस्राइल पर ड्रोन्स और मिसाइल हमले कर दिए।
आखिर इस्राइल पर ईरान ने क्यों किया हमला?
इस्राइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के पीछे पिछले सप्ताह हुई एक घटना है। दरअसल, 1 अप्रैल को युद्धक विमानों से सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर हमला किया गया था। हमले में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के अल-कुद्स बल के एक वरिष्ठ कमांडर सहित कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। ये सभी दमिश्क दूतावास परिसर में एक बैठक में भाग ले रहे थे। हमले का आरोप इस्राइल पर लगाया गया, जिसने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली।
हमले के बाद ईरान के नेताओं ने राजनयिक मिशन को निशाना बनाए जाने की निंदा की थी। इसके साथ ही कड़ी प्रतिक्रिया देने की बात कही। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा था कि इस्राइल को उसके ऑपरेशन के लिए दंडित किया जाना चाहिए और किया भी जाएगा। खामेनेई ने कहा था कि यह ईरानी धरती पर हमले के बराबर है।
हमले की चेतावनी पर इस्राइल ने क्या कहा?
जवाबी कार्रवाई की चेतावनी मिलने के बाद इस्राइल के मुख्य सैन्य प्रवक्ता डैनियल हगारी ने कहा था कि सेना ने ईरानी हमले पर रिपोर्टों और बयानों के बाद उत्पन्न हुई स्थिति का मूल्यांकन किया है। इस्राइली सेना ने परिस्थितियों से निपटने के लिए योजनाओं को मंजूरी दी है। इसके साथ ही इस्राइली सेना ने नागरिकों से भी सतर्क रहने को कहा है।
उधर इस्राइल सरकार ने कहा था कि अगर ईरान सीधी सैन्य कार्रवाई करता है तो वे उसके क्षेत्र पर अपने हमलों से जवाब देंगे। बीते दिनों इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था, 'जो कोई हमें नुकसान पहुंचाएगा, हम उसे नुकसान पहुंचाएंगे। हम इस्राइल की सभी सुरक्षा जरूरतों को रक्षात्मक और आक्रामक दोनों तरह से पूरा करने के लिए तैयार हैं।'
आखिर कितना खतरनाक हो सकता है युद्ध?
ईरान के द्वारा हमला किए जाने से पहले जानकारों का कहना था कि ईरान से सीधा हमला इस्राइल के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई के बराबर होगा और दमिश्क में हमले के लिए एक बड़ा जवाब होगा।
अटलांटिक काउंसिल के निदेशक जोनाथन पैनिकॉफ ने कहा था, 'बैलिस्टिक मिसाइलों या ड्रोन का उपयोग करके इस्राइली के खिलाफ हमला करना तेहरान के लिए सबसे जोखिम भरा विकल्प होगा। हालांकि, ईरान व्यापक पैमाने पर युद्ध को बढ़ने से रोकने की कोशिश कर सकता है। उदाहरण के लिए नागरिकों को निशाना न बनाकर केवल सैन्य या खुफिया लक्ष्यों पर हमला करना।'
दूसरी स्थिति हो सकती है कि ईरान पहले की तरह दक्षिणी लेबनान या सीरिया में हिज्बुल्ला जैसे प्रॉक्सी समूह को इस्राइल में हमले करने का आदेश देगा। हिज्बुल्ला के पास शक्तिशाली मिसाइलों का एक बड़ा भंडार है जो इस्राइल की वायु सुरक्षा, विशेष रूप से उसके आयरन डोम और डेविड स्लिंग सिस्टम पर भारी पड़ सकता है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस सप्ताह ईरानी हमले की आशंकाओं के जवाब में इस्राइल की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।