Iran Hijab Row: मॉरलिटी पुलिस भंग होने की खबर गलत, पश्चिमी मीडिया ने दिखाई जल्दबाजी?
Iran Hijab Row: ईरान में हर सार्वजनिक जगह पर महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है। इस इस्लामी नियम को लागू करने के लिए मॉरलिटी पुलिस बनी हुई है। जो महिलाएं बिना हिजाब के पाई जाती हैं, मॉरलिटी पुलिस ने उन्हें अपने प्रशिक्षण केंद्र पर ले जाती है...
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ऐसा लगता है कि ईरान में ‘मॉरलिटी (नैतिकता थोपने वाली) पुलिस’ को भंग करने की खबर देने में पश्चिमी मीडिया ने जल्दबाजी बरती। ये खबर ईरान के अटार्नी जनरल के बयान के हवाले से दी गई। लेकिन ये खबर फैलते ही ईरानी मीडिया ने इसे पूरी तरह गलत बताया। ईरानी मीडिया के मुताबिक अभी तक खबर सिर्फ यह है कि ईरान की संसद और न्यायपालिका महिलाओं के अनिवार्य रूप से हिजाब पहनने के कानून पर पुनर्विचार कर रहे हैं। जहां तक मॉरलिटी पुलिस का सवाल है, तो वह गृह मंत्रालय के तहत आता है। इसलिए इस बारे में अटार्नी जनरल कोई एलान नहीं कर सकते।
हिजाब कानून पर पुनर्विचार की बात के साथ ही अटार्नी जनरल मोहम्मद जफर मोन्तजेरी को यह कहते बताया गया था कि मॉरलिटी पुलिस को भंग कर दिया गया है। ईरानी मीडिया में इस खबर का खंडन होने के बाद कई पश्चिमी मीडिया संस्थानों ने ईरान के गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की। लेकिन गृह मंत्रालय ने उनमें से किसी के सवाल का जवाब नहीं दिया।
ईरान में हर सार्वजनिक जगह पर महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है। इस इस्लामी नियम को लागू करने के लिए मॉरलिटी पुलिस बनी हुई है। जो महिलाएं बिना हिजाब के पाई जाती हैं, मॉरलिटी पुलिस ने उन्हें अपने प्रशिक्षण केंद्र पर ले जाती है। बीते सितंबर में ऐसी ही घटना ईरान के कुर्द क्षेत्र में हुई, जहां 22 वर्षीया युवती मेहसा अमीनी बिना हिजाब पहने पकड़ी गईं। मोरेलिटी पुलिस अमीनी को अपने प्रशिक्षण केंद्र में ले गई, जहां उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद से ईरान में लगातार जन प्रदर्शन हो रहे हैं। इनमें जबरन नैतिकता थोपने के सिस्टम को खत्म करने की मांग की गई है। ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई की है। सरकार का दावा है कि अमीनी की मौत का कारण उसकी बीमारी थी, जिससे वह पहले से पीड़ित थी। लेकिन अमीनी के परिवार ने इसका खंडन किया है।
जारी आंदोलन के बीच ईरान सरकार का रुख नरम करने का पहला संकेत रविवार को मिला, जब मोन्तजेरी का बयान आया। उन्होंने कहा कि संसद और न्यायपालिका दोनों हिजाब कानून की समीक्षा कर रहे हैं और उसके नतीजे आप अगले एक या दो सप्ताह में देख सकेंगे। ईरान में हिजाब कानून 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद लागू किया गया था। लेकिन इसका कभी उस पैमाने पर विरोध नहीं हुआ, जैसा पिछले ढाई महीनों में देखने को मिला है।
मोन्तजेरी के बयान के बाद ईरान के सरकारी मीडिया संस्थानों ने कहा- ‘मॉरलिटी पुलिस का न्यायपालिका से कोई संबंध नहीं है। यह जरूर है कि न्यायपालिका सामाजिक व्यवहार की निगरानी करती रहेगी।’ अरब भाषी सरकारी टीवी चैनल अल-आलम ने रविवार को ही कहा- ‘ईरान इस्लामी गणराज्य के किसी अधिकारी ने यह नहीं कहा है कि नैतिकता निर्देशन गश्त पुलिस को बंद कर दिया गया है।’ टीवी चैनल ने कहा कि मोन्तजेरी के बयान के सिलसिले में यह ध्यान में रखना चाहिए कि मॉरलिटी पुलिस का न्यायपालिका से कोई संबंध नहीं है। चैनल ने कहा कि हिजाब और मजहबी नैतिकता के बारे में जो खबरें फैलाई जा रही हैं, उनका कोई आधार नहीं है।