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Iran: ईरानी हमलों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को 80 करोड़ डॉलर का नुकसान, रिपोर्ट में बड़ा दावा
Sun, 22 Mar 2026 05:07 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन/दोहा/अम्मान
अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन/दोहा/अम्मान
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 22 Mar 2026 05:07 AM IST
सार
रिपोर्ट के अनुसार कुल नुकसान का बड़ा हिस्सा युद्ध की शुरुआत के पहले सप्ताह में ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों में हुआ, जब अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। सीएसआईएस के सलाहकार और रिपोर्ट के सह-लेखक मार्क कैंसियन के मुताबिक, क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों की क्षति कम करके आंकी गई है, जो वास्तव में अधिक हो सकती है।
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पश्चिम एशिया संघर्ष
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इस्राइल और ईरान युद्ध के बीच एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि युद्ध के शुरुआती दो हफ्तों में ईरान के हमलों से अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सैन्य ठिकानों को लगभग 80 करोड़ डॉलर (करीब 60 करोड़ पाउंड) की क्षति हुई है।
बीबीसी और सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के सझा विश्लेषण के अनुसार, यह क्षति पूर्व के अनुमानों से अधिक है और यह संकेत देती है कि युद्ध की लागत अमेरिका के लिए लगातार बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार कुल नुकसान का बड़ा हिस्सा युद्ध की शुरुआत के पहले सप्ताह में ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों में हुआ, जब अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। सीएसआईएस के सलाहकार और रिपोर्ट के सह-लेखक मार्क कैंसियन के मुताबिक, क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों की क्षति कम करके आंकी गई है, जो वास्तव में अधिक हो सकती है।
रडार-उपग्रह पर निशाना युद्ध की लागत बढ़ी
विश्लेषण के अनुसार ईरान ने युद्ध की शुरुआत से ही रडार और उपग्रह प्रणाली को निशाना बनाया, जिन्हें आधुनिक सैन्य अभियानों की आंख और कान माना जाता है। बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर हमले में दो रेडोम यानी संवेदनशील उपकरणों को ढकने वाले संरचनात्मक आवरण के नष्ट होने के प्रमाण सैटेलाइट इमेजरी में मिले हैं। इससे अंदर मौजूद सिस्टम भी क्षतिग्रस्त होंगेे। कुवैत के कैंप अरिफजान और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर भी रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। इससे युद्ध की लागत बढ़ी है।
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रूस के जानकारी साझा करने से हमले सटीक हुए
इसके अलावा, इमारतों, सुविधाओं और अन्य सैन्य ढांचे को हुए नुकसान का अनुमान करीब 31 करोड़ डॉलर लगाया गया है। सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि ईरान ने कुवैत के अली अल-सलीम बेस, कतर के अल-उदीद और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर एक से अधिक बार हमले किए, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह विशेष अमेरिकी सैन्य संसाधनों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बना रहा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस ने कथित तौर पर ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की, जिससे इन हमलों की सटीकता बढ़ी।
अन्य वीडियो
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बीबीसी और सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के सझा विश्लेषण के अनुसार, यह क्षति पूर्व के अनुमानों से अधिक है और यह संकेत देती है कि युद्ध की लागत अमेरिका के लिए लगातार बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार कुल नुकसान का बड़ा हिस्सा युद्ध की शुरुआत के पहले सप्ताह में ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों में हुआ, जब अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। सीएसआईएस के सलाहकार और रिपोर्ट के सह-लेखक मार्क कैंसियन के मुताबिक, क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों की क्षति कम करके आंकी गई है, जो वास्तव में अधिक हो सकती है।
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रडार-उपग्रह पर निशाना युद्ध की लागत बढ़ी
विश्लेषण के अनुसार ईरान ने युद्ध की शुरुआत से ही रडार और उपग्रह प्रणाली को निशाना बनाया, जिन्हें आधुनिक सैन्य अभियानों की आंख और कान माना जाता है। बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर हमले में दो रेडोम यानी संवेदनशील उपकरणों को ढकने वाले संरचनात्मक आवरण के नष्ट होने के प्रमाण सैटेलाइट इमेजरी में मिले हैं। इससे अंदर मौजूद सिस्टम भी क्षतिग्रस्त होंगेे। कुवैत के कैंप अरिफजान और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर भी रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। इससे युद्ध की लागत बढ़ी है।
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रूस के जानकारी साझा करने से हमले सटीक हुए
इसके अलावा, इमारतों, सुविधाओं और अन्य सैन्य ढांचे को हुए नुकसान का अनुमान करीब 31 करोड़ डॉलर लगाया गया है। सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि ईरान ने कुवैत के अली अल-सलीम बेस, कतर के अल-उदीद और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर एक से अधिक बार हमले किए, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह विशेष अमेरिकी सैन्य संसाधनों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बना रहा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस ने कथित तौर पर ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की, जिससे इन हमलों की सटीकता बढ़ी।
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