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Hindi News ›   World ›   IPU: 'India's objective is to promote peace and goodwill', Deputy Chairman of Rajya Sabha At IPU conference

IPU: 'भारत का उद्देश्य शांति-सद्भावना को बढ़ाना', जिनेवा में आईपीयू के सम्मेलन में बोले राज्यसभा के उपसभापति

Mon, 25 Mar 2024 10:58 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड डेस्क,अमर उजाला, जनेवा
वर्ल्ड डेस्क,अमर उजाला, जनेवा Published by: आदर्श शर्मा Updated Mon, 25 Mar 2024 10:58 PM IST
सार

जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय संसदीय संघ के 148वें सम्मेलन की महासभा को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने 'संसदीय कूटनीति: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए पुलों का निर्माण' विषय पर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन दर्शन में 'वसुधैव कुटुम्बकम' की अवधारणा है। 

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IPU: 'India's objective is to promote peace and goodwill', Deputy Chairman of Rajya Sabha At IPU conference
जिनेवा में राज्यसभा के उपसभापति का संबोधन - फोटो : ANI

विस्तार

जिनेवा में अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 148वीं सभा में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने शिरकत की। वह सम्मेलन में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व का नेतृत्व कर रहे हैं। हरिवंश ने सम्मेलन में कहा कि बढ़ती परस्पर निर्भरता और परस्पर जुड़ाव के युग में दुनिया को कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संसदीय कूटनीति इन जटिल चुनौतियों का समाधान करते हुए राष्ट्रों के बीच सहयोग और शांति को बढ़ावा देने का एक अवसर प्रदान करती है।
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हरिवंश ने कहा कि भारत क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसदीय भागीदारी को बढ़ावा देने में विश्वास करता है और अपने ज्ञान और अनुभव को साझा करके क्षमता निर्माण में अन्य देशों की मदद करने के लिए भी तैयार है। गौरतलब है कि पहले सेशन के दौरान पाकिस्तान को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने भारत के खिलाफ लगातार की जा रही बेतुकी बयानबाजी को खारिज किया। 
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  सम्मेलन के दूसरे भाग के दौरान में हरिवंश नारायण सिंह ने संसदीय कूटनीति: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए पुलों का निर्माण विषय पर सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देने में भारतीय संसद और सांसदों की भूमिकाओं पर भी प्रकाश डाला। हरिवंश ने दूर-दूर तक शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए प्राचीन भारतीय इतिहास का जिक्र भी किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने उन्होंने जी20 और पी30 सम्मेलनों की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जो 'वसुधैव कुटुम्बकम' के प्राचीन दर्शन पर आधारित थे। उन्होंने भारत को 'लोकतंत्र की जननी' बताते हुए कहा कि भारत में प्राचीन काल से विचार-विमर्श और सलाहकार निकाय काम करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 220 ईसा पूर्व सम्राट अशोक ने शांति और अहिंसा का संदेश फैलाने के लिए भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया में कई राजदूत भेजे। इसके अलावा, 48 ईस्वी में, अयोध्या की राजकुमारी राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए दक्षिण कोरिया गईं और वहां राजकुमार से शादी की।

उन्होंने कहा कि 'वसुधैव कुटुंबकम' (एक पृथ्वी, एक परिवार) भारतीय सभ्यता का मूल है जो भारत की जी-20 अध्यक्षता का विषय भी था। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में इस बहस के आज के विषय यानी अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए पुलों का निर्माण को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदर्भित करते हुए हरिवंश ने कहा कि एक विभाजित दुनिया मानवता के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान नहीं दे सकती है। हरिवंश ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत द्वारा आयोजित 9वें पी-20 शिखर सम्मेलन ने "आम सहमति और सहयोग के माध्यम से वैश्विक व्यवस्था को आकार देने की हमारी प्रतिबद्धता" को रेखांकित किया।


अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए लताड़ा
गौरतलब एक दिन पहले जिनेवा में अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 148वीं बैठक को संबोधित करते हुए हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि पाकिस्तान का आंतकियों को पनाह देने, सहायता करने और उनका समर्थन करने का लंबा इतिहास रहा है, जो आईपीयू सदस्य अच्छे से जानते हैं। हरिवंश नारायण सिंह ने कार्यक्रम में कहा था मैं, भारत के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा की गई बेतुकी टिप्पणियों को खंडित करता हूं। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हमारा सौभाग्य है कि कई लोग भारतीय लोकतंत्र को अनुकरणीय मॉडल मानते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी दुष्प्रचार इस तथ्य को नहीं झुठला सकता है।
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