अफ्रीकी देशों में बढ़ता जा रहा है चीन का असर, स्कूलों में सिखाई जा रही मंदारिन
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दुनियाभर में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां अपने देश का राष्ट्रीय गान गाया जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा अफ्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में भी देखा गया। लेकिन हैरानी की बात ये थी कि यहां अपने देश का नहीं बल्कि चीन का राष्ट्रीय गान गाया जा रहा था। यहां कक्षा में मौजूद 20 बच्चे ये गीत गा रहे थे। इस गाने की धुन बिल्कुल वैसी थी, जैसी चीन में नए साल के मौके पर गाए जाने वाले राष्ट्रीय गान की होती है।
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दुनियाभर में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां अपने देश का राष्ट्रीय गान गाया जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा अफ्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में भी देखा गया। लेकिन हैरानी की बात ये थी कि यहां अपने देश का नहीं बल्कि चीन का राष्ट्रीय गान गाया जा रहा था। यहां कक्षा में मौजूद 20 बच्चे ये गीत गा रहे थे। इस गाने की धुन बिल्कुल वैसी थी, जैसी चीन में नए साल के मौके पर गाए जाने वाले राष्ट्रीय गान की होती है।
यहां स्कूली बच्चे 'मंदारिन' सीख रहे हैं। ये चीन में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है। साथ ही यह विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। यहां के लोगों में मंदारिन भाषा के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यहां कई बच्चे ऐसे मिल जाएंगे, जो बेहद अच्छी मंदारिन बोलते हैं। माना जा रहा है कि साल 2020 तक केन्या के सभी स्कूलों में मंदारिन आधिकारिक तौर पर सिखाई जाएगी। ऐसे में इसे बोलने वालों की संख्या भी कई गुना तक बढ़ जाएगी। फिलहाल स्कूली पाठ्यक्रम में फ्रेंच, अरेबिक और जर्मन भाषा भी शामिल हैं।
नौरोबी में स्थित इस स्कूल के एक बच्चे वांजिरु का कहना है कि उसने विदेशी भाषाओं में सबसे पहले मंदारिन को इसलिए चुना क्योंकि वह एक विदेशी भाषा सीखना चाहता था। लेकिन इसके पीछे की दूसरी वजह ये है वांजिरु चीन जाना चाहता है और वहां व्यापार भी करना चाहता है।
केन्या इंस्टीट्यूट ऑफ करिकुलम डेवलपमेंट (केआईसीडी) के सीईओ जुलियस जुवान ने चीन की सरकारी मीडिया को बताया, "विश्व अर्थव्यवस्था में चीन का स्थान मजबूत हो गया है। इससे केन्या को भी फायदा हो सकता है, अगर यहां के नागरिक मंदारिन सीखते हैं।"
अफ्रीका में बढ़ता चीनी प्रभाव
इसका एक कारण ये भी है कि चीन ने अपनी बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) परियोजना के तहत कई अफ्रीकी देशों को कर्ज दिया है। ये कर्ज हाईवे, बांध, स्टेडियम, हवाईअड्डे और इमारतों के निर्माण के लिए दिया गया है।
वाशिंगटन स्थित 'जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ अडवांस स्टडीज' के 'चाइना अफ्रीका रिसर्च इनीशिएटिव' प्रोगाम के मुताबिक साल 2000 के बाद से अब तक चीन ने अफ्रीकी देशों को 14,300 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है।
केवल केन्या ही ऐसा अफ्रीकी देश नहीं है जहां युवाओं को मंदारिन सिखाई जा रही है, बल्कि उत्तरी अफ्रीका में भी मंदारिन 2014 से एक वैक्लपिक भाषाई कोर्स है। इसके बाद दिसंबर, 2018 में युगांडा में भी कुछ स्कूलों में माध्यमिक कक्षा के छात्रों के लिए इस कोर्स की शुरुआत की गई।
इस मामले में युगांडा के पाठ्यक्रम विशेषज्ञ हेनरी अद्रामुंगिनी का कहना है कि मंदारिन को पाठ्यक्रम में इसलिए शामिल किया गया क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र की कार्य भाषाओं में से एक है। लेकिन छात्रों के पास दूसरी भाषाएं सीखने की पूरी छूट है।
हेनरी का कहना है कि वह युवाओं को नौकरी, व्यवसाय और शिक्षा के मौके देना चाहते हैं। यही कारण है कि छात्रों को मंदारिन सिखाई जा रही है। यहां एक एनजीओ भी है, जो दुनियाभर में चीनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। ये एनजीओ युगांडा के शिक्षकों को मंदारिन की ट्रेनिंग दे रहा है, ताकि वह स्कूली बच्चों को ये भाषा सिखा पाएं।