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इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने से छह एयरपोर्ट बंद: 300 उड़ाने प्रभावित, 22800 यात्री फंसे; धुंआ कितना खतरनाक?

Sun, 06 Sep 2026 03:10 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 06 Sep 2026 03:10 PM IST
सार

इंडोनेशिया के अनक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में रविवार तड़के तेज विस्फोट हुआ। इसके बाद जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे समेत कई एयरपोर्ट का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया। ज्वालामुखी की राख कई इलाकों तक फैल गई और सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुईं। हजारों यात्री फंस गए।ज्वालामुखी की गतिविधि कितनी खतरनाक है और क्या इससे बड़ा विस्फोट होने का खतरा अभी बना हुआ है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Indonesia Volcano Eruption Shuts Jakarta Airport Flights Cancelled 22800 Passengers Affected How Dangerous
क्या बड़े विस्फोट का खतरा अभी बाकी है? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित अनक क्राकाटोआ ज्वालामुखी रविवार तड़के फट पड़ा। इसके बाद ज्वालामुखी से निकली राख पश्चिमी इंडोनेशिया के कई हिस्सों में फैल गई। राख के कारण जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और कई अन्य एयरपोर्ट का हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा। ज्वालामुखी द्वीप जावा और सुमात्रा के बीच स्थित है। भूवैज्ञानिक एजेंसी के अनुसार, शुक्रवार से ही इसमें गतिविधियां बढ़ रही थीं और रविवार सुबह 3 बजकर 53 मिनट पर करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ। कैमरे में ज्वालामुखी से लावा निकलने की गतिविधि भी दिखाई दी।

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कितनी उड़ानें और कितने यात्री प्रभावित हुए?

  • रविवार दोपहर तक एयरपोर्ट और हवाई क्षेत्र बंद होने से कुल 516 उड़ान गतिविधियां प्रभावित हुईं। इनमें अकेले जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता एयरपोर्ट की 202 उड़ानें शामिल थीं, जिससे करीब 22,800 यात्री प्रभावित हुए।
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  • एयरपोर्ट को कम से कम शाम 5:30 बजे तक बंद रखने का आदेश दिया गया था। जकार्ता के हलीम परदानाकुसुमा एयरपोर्ट के अलावा लांपुंग के रादिन इंतेन द्वितीय एयरपोर्ट समेत चार अन्य एयरपोर्ट भी प्रभावित हुए।
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  • बाली के इगुस्ती न्गुराह राय अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और मेदान में भी उड़ान सेवाओं पर असर पड़ा।
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राख के बाद कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है?

इंडोनेशिया की ज्वालामुखी एजेंसी और डार्विन ज्वालामुखीय राख सलाह केंद्र ने उपग्रह तस्वीरों के जरिए राख के दो बड़े बादल पहचाने। इनमें से एक राख का गुबार करीब 20,000 फीट यानी 6,100 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और जकार्ता, बांतन तथा पश्चिमी जावा की ओर बढ़ा। दूसरा गुबार करीब 50,000 फीट यानी 15,200 मीटर तक पहुंचा और बांतन, लांपुंग तथा बेंगकुलु के कुछ हिस्सों के साथ सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के हिस्से तक फैल गया। अधिकारियों ने कहा कि मुख्य खतरे में ज्वालामुखीय राख, जहरीली गैस की अधिक मात्रा और गर्म पत्थरों का बाहर निकलना शामिल है।

क्या अनक क्राकाटोआ अभी भी सक्रिय है?

  • भूवैज्ञानिक एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने कहा कि जुलाई से अनक क्राकाटोआ में गतिविधि तेज हुई है और रविवार का विस्फोट मौजूदा गतिविधि के दौर का सबसे शक्तिशाली विस्फोट रहा। उनके मुताबिक लगातार हो रहे विस्फोट इस बात का संकेत हैं कि ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और ज्वालामुखीय गैसों की आपूर्ति बनी हुई है। हालांकि, अधिकारी अभी यह अनुमान नहीं लगा सकते कि आगे इससे कोई बड़ा विस्फोट होगा या नहीं।
  • उन्होंने कहा कि ज्वालामुखी की स्थिति का आकलन केवल विस्फोटों की संख्या या राख के गुबार की ऊंचाई से नहीं, बल्कि सभी निगरानी आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है। फिलहाल किसी की मौत की सूचना नहीं है और लोगों को निकासी का आदेश भी नहीं दिया गया है। अधिकारियों ने सक्रिय क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है।

क्राकाटोआ का इतिहास इतना डरावना क्यों है?

अनक क्राकाटोआ का अर्थ क्राकाटोआ का बच्चा है। यह उसी प्रसिद्ध क्राकाटोआ ज्वालामुखी से जुड़ा है, जिसके 1883 के बड़े विस्फोट ने दुनिया के मौसम पर भी असर डाला था और वैश्विक स्तर पर ठंड बढ़ने का दौर आया था। वर्ष 2018 में अनक क्राकाटोआ की गतिविधि से सुनामी आई थी, जिसमें सुमात्रा और जावा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, ज्वालामुखीय गतिविधि के कारण समुद्र के भीतर भूस्खलन हुआ और अनक क्राकाटोआ का दक्षिण-पश्चिमी हिस्सा ढह गया। इससे बड़ी मात्रा में पानी विस्थापित हुआ और सुनामी पैदा हुई। उस घटना के बाद वैज्ञानिकों के अनुसार अनक क्राकाटोआ द्वीप अपने पुराने आकार का करीब एक-चौथाई रह गया था।

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