फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Indonesia bans all syrup after 99 child deaths, know all about

Indonesia: इंडोनेशिया में सारे सिरप प्रतिबंधित, इसी साल किडनी की समस्या से हो चुकी है 99 बच्चों की मौत

Thu, 20 Oct 2022 11:49 AM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 20 Oct 2022 11:49 AM IST
सार

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सिरप लेने के बाद बच्चों की किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा। इस कारण बच्चों के सारे सिरप व तरल दवाओं की खुराक के विक्रय पर रोक लगा दी गई है। इससे पहले गांबिया में 70 बच्चों की मौत का मामला सामने आया था। इसे लेकर डब्ल्यूएचओ ने भी चेतावनी जारी की थी। 

विज्ञापन
Indonesia bans all syrup after 99 child deaths, know all about
child death Indonesia - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

इंडोनेशिया सरकार ने देश में सभी सिरप और सारी लिक्विड दवाएं प्रतिबंधित कर दी हैं। बताया गया है कि पिछले कुछ महीनों में में किडनी की समस्याओं से 99 बच्चों की मौत हुई थी। इसी को देखते हुए यह फैसला किया गया है। 

विज्ञापन


मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सिरप लेने के बाद बच्चों की किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा। इस कारण बच्चों के सारे सिरप व तरल दवाओं की खुराक के विक्रय पर रोक लगा दी गई है। पाबंदी की घोषणा इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने की। उनके अनुसार देश में बच्चों की मौतों के आंकड़े में जनवरी के बाद जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता मुहम्मद सयारिल मंसूर के अनुसार 20 प्रांतों में 99 मौतों की सूचना मिली है। 
विज्ञापन


डॉक्टरों को सिरप नहीं लिखने का निर्देश
मंसूर ने कहा कि एहतियात के तौर पर मंत्रालय ने सभी अस्पतालों व डॉक्टरों को सिरप या तरल दवाएं नहीं लिखने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय ने दवा दुकानों को भी जांच पूरी होने तक इन सिरप का विक्रय नहीं करने व काउंटर से हटाने का निर्देश दिया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


गांबिया में हुई थी 70 बच्चों की मौत
इंडोनेशिया में बच्चों की मौत का मामला तब सामने आया जब है अफ्रीकी देश गांबिया में सर्दी खांसी के सिरप के सेवन से 70 बच्चों की मौत की जांच जारी है। डब्ल्यूएचओ ने मामले की जांच के बाद भारत की एक फार्मा कंपनी के कफ सिरप का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी थी। इस सिरप में कथित तौर पर डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल का अत्यधिक स्तर था। भारत में निर्मित कफ सीरप से बच्चों की मौत के मामले की स्वदेश में भी जांच जारी है। 

गांबिया में बच्चों की मौत गंभीर मामला : डब्ल्यूएचओ की प्रमुख वैज्ञानिक
इधर, डब्ल्यूएचओ की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामिनाथन ने पुणे में गुरुवार को कहा कि गांबिया में हुई बच्चों की मौत का संबंध भारत में निर्मित चार कफ सिरप से हो सकता है। स्वामिनाथन ने यह बात यहां आयोजित विकासशील देशों में टीका निर्माण के लिए तंत्र स्थापित करने के लिए आयोजित बैठक से इतर संवाददाताओं से हुई बातचीत के दौरान कही।

एक रिपोर्टर ने गांबिया में हुई मौतों का संबंध चार भारतीय सिरप से जोड़ते हुए इस संबंध में स्वामीनाथन से सवाल पूछा था। इसके जवाब में स्वामीनाथन ने कहा कि निश्चित रूप से, सरकार डब्ल्यूएचओ के संपर्क में है क्योंकि डब्ल्यूएचओ ने वास्तव में जांच के आधार पर रिपोर्ट प्रदान की थी, जो यह साबित करने के लिए की गई थी कि यह डायथिलीन ग्लाइकोल संदूषण के कारण था। यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है और इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना है।

भारत में केंद्रीय और राज्य स्तर पर दवाओं से जुड़ी नियामक संस्थाएं हैं और इनके बीच बेहतर सामंजस्य की जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा तंत्र में बदलाव की जरूरत है क्योंकि अभी एक राज्य का नियामक दूसरे राज्य के नियामक के साथ मिलकर दोनों के यहां निर्मित उत्पादों के निरीक्षण का काम नहीं कर पाते हैं। स्वामीनाथन ने कहा कि यदि भारत को टीका उत्पादन के मामले में पहले पायदान पर काबिज रहना है तो हमें साबित करना होगा कि हमारे पास इसके लिए बहुत बेहतर और मजबूत नियामकीय तंत्र है।

SII परीक्षण के लिए युगांडा को देगा इबोला के टीके
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार पूनावाला ने गुरुवार को कहा कि कंपनी परीक्षण के लिए युगांडा को 20,000 से 30,000 इबोला के टीके उपलब्ध कराएगी। विकासशील देशों के वैक्सीन मैन्युफैक्चरर्स नेटवर्क (डीसीवीएमएन) की वार्षिक आम बैठक के मौके पर यहां संवाददाताओं से बात करते हुए, पूनावाला ने कहा कि यदि परीक्षण सफल होते हैं, तो फर्म यह कि उत्पाद का भविष्य के प्रकोपों के लिए बचाव के लिए भंडारण किया जाना चाहिए या नहीं।

उन्होंने कहा कि अभी इबोला (वैक्सीन) सिर्फ एक सहायता मिशन है। हमने डब्ल्यूएचओ के साथ युगांडा में होने वाले परीक्षणों के लिए 20,000 से 30,000 खुराक उपलब्ध कराने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अब देखते हैं कि परीक्षण कैसे होते हैं।


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अफ्रीकी देश में पिछले महीने से इबोला के 50 से अधिक मामले सामने आए और 19 मौतें हुई हैं। पूनावाला ने कहा कि इबोला के लिए मृत्यु दर कोविड और अन्य बीमारियों की तुलना में कहीं अधिक है, इसलिए उन क्षेत्रों में रिंग टीकाकरण और सुरक्षा को नियंत्रित करने और देने में सक्षम होना बहुत महत्वपूर्ण है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed