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अफगानिस्तान: काबुल में फंसे भारतीय शिक्षकों को उम्मीद, सरकार जल्द करेगी वापसी के इंतजाम
Wed, 18 Aug 2021 05:39 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 18 Aug 2021 05:39 PM IST
सार
तालिबान द्वारा काबुल का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के बाद गोली चलने की कोई आवाज सुनाई नहीं दी है, लेकिन हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और यह तनाव समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। यह कहना है अफगानिस्तान में फंसे चार भारतीय शिक्षकों का जो यहां से तुरंत निकाले जाने की अनुरोध कर रहे हैं जिससे वो अपने परिवारों के पास घर लौट सकें।
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अफगानिस्तान में तालिबानी
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
तालिबान ने बीते दिनों 20 साल बाद एक बार फिर अफगानिस्तान की सत्ता हासिल कर ली है। इस दौरान राजधानी काबुल में स्थिति काफी गंभीर हो गई है। बाकी देशों के साथ अफगानिस्तान के निवासी भी देश छोड़ने की जुगत में लगे हुए हैं। वहीं, काबुल की बख्तर यूनिवर्सिटी के चार शिक्षकों ने भी देश वापसी की गुहार लगाई है। ये चारों शिक्षक भारतीय हैं।
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समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार एक शिक्षक मोहम्मद आसिफ शाह ने कहा कि हमने भारत में हर संभव मंच तक अपनी बात पहुंचाई है और हमें उम्मीद है कि सरकार हमें जल्द से जल्द यहां से निकालने के लिए कुछ करेगी। मैं दो दिन से परिसर से बाहर नहीं निकला हूं। हर बार जब बाहर कोई हलचल होती है, तो दिल की धड़कनें बढ़ जाती है।
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शाह कश्मीर के रहने वाले हैं और विश्वविद्यालय में पिछले चार साल से अर्थशास्त्र पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मेरी सोमवार को वापस जाने की योजना थी। मैंने टिकट भी बुक करा ली थी लेकिन स्थितियां तेजी से बदल गईं। मुझे एयरपोर्ट पहुंचने में घंटों लग गए और वहां ऐसा लग रहा था कि पूरा काबुल उमड़ आया हो। उड़ान रद्द हो गई और मैं वापस नहीं जा पाया।'
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बिहार के रहने वाले सैयद आबिद हुसैन यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग पढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक तो सब सुरक्षित हैं लेकिन हम अनिश्चितता में नहीं रहना चाहते हैं। हमने विदेश मंत्रालय के साथ दूतावास से संपर्क करने की कोशिश भी की है। मैं विश्वस्त हूं कि भारत सरकार हमें काबुल से सुरक्षित और जल्दी से जल्दी निकालने के लिए प्रयास जरूर कर रही होगी।
यूनिवर्सिटी में साल 2017 से मैनेजमेंट पढ़ा रहे आदिल रसूल कश्मीर के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी भी उनके साथ वहां फंसी हुई हैं। रसूल ने कहा कि हम बस प्रार्थना कर रहे हैं कि स्थिति और न बिगड़े और हम सुरक्षित अपने घर पहुंच पाएं। इस समय सभी परिसर के भीतर हैं और भारतीय दूतावास या सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं।
झारखंड के अफरोज आलम भी यहां फंसे हुए हैं। वह यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस पढ़ाने वाले आलम ने कहा कि अभी तक किसी तरह का रक्तपात नहीं हुआ है लेकिन लोगों में बहुत भय व्याप्त है। उन्होंने कहा, हमने बाहर गोलियों के चलने की आवाज तो नहीं सुनी है लेकिन लोगों में डर का माहौल है। हम जरूरत पड़ने पर भी यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर नहीं जा रहे हैं।