{"_id":"6842dd04c6df30b0920fef0f","slug":"indian-envoy-to-china-meets-top-chinese-foreign-ministry-official-discuss-bilateral-ties-2025-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"India-China: चीन में भारतीय राजदूत ने चीनी विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी से मुलाकात की, द्विपक्षीय संबंधों प","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
India-China: चीन में भारतीय राजदूत ने चीनी विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी से मुलाकात की, द्विपक्षीय संबंधों प
Fri, 06 Jun 2025 05:50 PM IST
राहुल कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 06 Jun 2025 05:50 PM IST
सार
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत और चीन के शीर्ष राजनयिकों ने पिछले वर्ष दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति को लागू करने के लिए द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की है।
विज्ञापन
चीन और भारत के झंडे
- फोटो : Freepik
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत और चीन के शीर्ष राजनयिकों के बीच गुरुवार को द्विपक्षीय संबंधों को लेकर अहम बैठक हुई। जिसमें दोनों देशों के नेताओं द्वारा पिछले वर्ष तय किए गए साझा सहमति बिंदुओं को लागू करने पर बातचीत की गई। यह मुलाकात भारतीय राजदूत प्रदीप कुमार रावत और चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइडोंग के बीच बीजिंग में हुई। इस बैठक को ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और चीन के बीच पहली औपचारिक कूटनीतिक बातचीत मानी जा रही है।
चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने नेतृत्व स्तर पर हुई सहमति को गंभीरता से लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पारस्परिक लाभ के लिए सहयोग को बढ़ावा देने, मतभेदों का उचित प्रबंधन करने और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और स्वस्थ दिशा में आगे बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
चीन की ओर से सुन वेइडोंग(पहले भारत में चीन के राजदूत रह चुके हैं और वर्तमान में दक्षिण एशिया मामलों के प्रभारी हैं) ने बैठक में भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।
विज्ञापन
बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः शुरू करने की तैयारियों में लगे हैं। यह यात्रा 2020 में पहले कोविड-19 महामारी और फिर लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण स्थगित कर दी गई थी।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने 26 अप्रैल को घोषणा की थी कि यात्रा जून से अगस्त के बीच दो मार्गों उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला मार्ग से आयोजित की जाएगी। गौरतलब है कि लद्दाख में पूर्वी सीमा पर करीब चार वर्षों तक चले सैन्य तनाव के बाद अक्तूबर 2024 में डेमचोक और डेपसांग से सैनिकों के पूर्ण विसंगति के बाद भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने के लिए प्रयास तेज किए गए। पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रूस के कज़ान में हुई मुलाकात में कई द्विपक्षीय संवादों को पुनः शुरू करने पर सहमति बनी थी।
इस बैठक के महत्त्व को ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है, जिसे भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 7 मई को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी।
विज्ञापन
चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने नेतृत्व स्तर पर हुई सहमति को गंभीरता से लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पारस्परिक लाभ के लिए सहयोग को बढ़ावा देने, मतभेदों का उचित प्रबंधन करने और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और स्वस्थ दिशा में आगे बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
विज्ञापन
चीन की ओर से सुन वेइडोंग(पहले भारत में चीन के राजदूत रह चुके हैं और वर्तमान में दक्षिण एशिया मामलों के प्रभारी हैं) ने बैठक में भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।
विज्ञापन
बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः शुरू करने की तैयारियों में लगे हैं। यह यात्रा 2020 में पहले कोविड-19 महामारी और फिर लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण स्थगित कर दी गई थी।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने 26 अप्रैल को घोषणा की थी कि यात्रा जून से अगस्त के बीच दो मार्गों उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला मार्ग से आयोजित की जाएगी। गौरतलब है कि लद्दाख में पूर्वी सीमा पर करीब चार वर्षों तक चले सैन्य तनाव के बाद अक्तूबर 2024 में डेमचोक और डेपसांग से सैनिकों के पूर्ण विसंगति के बाद भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने के लिए प्रयास तेज किए गए। पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रूस के कज़ान में हुई मुलाकात में कई द्विपक्षीय संवादों को पुनः शुरू करने पर सहमति बनी थी।
इस बैठक के महत्त्व को ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है, जिसे भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 7 मई को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी।