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India-US Ties: पूर्व CIA अफसर ने अमेरिका को आईना दिखाया, देश की विदेश नीति को बताया पहेली; PAK पर भी बोले

Sun, 23 Nov 2025 09:57 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 23 Nov 2025 09:57 PM IST
सार

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी जेम्स सी लॉलर ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर बेबाकी से बयान दिया है। उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति एक बड़ी पहेली बताते हुए कहा कि अमेरिका को भारत के साथ रिश्ते और भी मजबूत बनाने चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ और परमाणु वैज्ञानिक एक्यू खान से जुड़े रोचक और चर्चित प्रसंगों का भी उल्लेख किया। जानिए लॉलर ने क्या बातें कहीं

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India-US Ties Retd CIA officer James Lawler American foreign policy puzzle Pakistan Nuclear AQ Khan Musharraf
अमेरिकी विदेश नीति पर पूर्व सीआईए अफसर ने कही बड़ी बात - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका में सत्ता बदलने के बाद से भारत के साथ रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। गत करीब एक वर्ष से तल्खी भरे संबंधों की एक बानगी ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 50 से अधिक मौकों पर कह चुके हैं कि उन्होंने व्यापार के आधार पर पाकिस्तान और भारत के संघर्ष को रोकने में सफलता पाई। भारत ने इस बात का स्पष्ट रूप से खंडन किया है। हिचकोले खाते रिश्तों का एक प्रमाण राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति भी है। इसी बीच अमेरिका के कई पुराने अधिकारी और सेवानिवृत्त अफसर देश की सरकार और प्रशासन को आईना दिखाने का काम कर रहे हैं। ऐसा की एक प्रकरण देश की खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी जेम्स सी लॉलर के बयान से जुड़ा है। उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति को बड़ी पहेली बताते हुए कहा कि अमेरिका को भी भारत के साथ संबंधों को मजबूत रखने की जरूरत है।

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एक इंटरव्यू में पूर्व CIA अधिकारी और अमेरिकी खुफिया एजेंसी के काउंटर-प्रोलिफरेशन डिवीजन प्रमुख रहे जेम्स सी लॉलर ने कहा, भारत-अमेरिका के हित 'अनुकूल' हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे वाले दोनों देशों की आर्थिक आकांक्षाएं एक जैसी हैं। उन्होंने कहा कि समान मूल्य साझा करने के बावजूद रिश्ते कभी अपने वास्तविक मित्रता के स्तर तक नहीं पहुंच सके हैं। उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति को कभी-कभी 'पहेली' जैसी बताया और कहा, भारत-अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं जीवंत हैं। अमेरिका में भारतीय मूल के लोग बढ़-चढ़ कर योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने समाजवादी नीतियों से हटकर पूंजीवादी ढांचे की ओर कदम बढ़ाए हैं। ऐसे में अब दोनों देशों को टकराव से बचकर सहयोग बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
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भारत आने की इच्छा जाहिर करते हुए लॉलर ने भारत और अमेरिका के रिश्ते में उतार-चढ़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के रिश्ते ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में संबंध कठिन दौर में पहुंच गए हैं। हालांकि, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय वस्तुओं पर 25% पारस्परिक शुल्क लगाया और बाद में रूस से तेल खरीदने को लेकर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने का एलान किया तो रिश्ते तल्ख हो गए। लॉलर के मुताबिक ट्रंप बीते कुछ समय में भारत और पाकिस्तान तनाव का जिक्र कर परमाणु युद्ध रोकने के दावे कर चुके हैं। इसे भारत ने सख्ती से खारिज किया है। ऐसे में हालात की गंभीरता को भांपते हुए, चीन जैसी साझा चुनौतियों से मुकाबले के लिए पुरानी सोच छोड़ते हुए नई द्विपक्षी. साझेदारी को मजबूत करना जरूरी है।
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पाकिस्तान से जुड़े मसले पर क्या बोले पूर्व CIA अफसर
लॉलर ने भारत और अमेरिका के रिश्ते पर टिप्पणी करने के अलावा भारत-पाकिस्तान से जुड़े रिश्ते के बारे में भी बात की। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ संवाद के दौरान लॉलर ने कहा, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने करीब 25-26 साल पहले पूर्व सैन्य अधिकारी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को कई बड़े सबूत दिखाए थे। एक्यू खान देश की परमाणु तकनीक विदेशी व्यापारियों में बेचने की ताक में लगा था। उन्होंने बताया कि लीबिया समेत कई अन्य देशों के साथ संवेदनशील जानकरी साझा करने के आरोपी एक्यू खान को कई वर्षों तक नजरबंद कर दिया गया।

मुशर्रफ एक्यू खान पर भड़के, मार डालने की बात कही
एक्यू खान के वैश्विक परमाणु तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करने वाले गुप्त अभियानों का नेतृत्व करने वाले पूर्व सीआईए ऑपरेशन अधिकारी जेम्स लॉलर ने इसी साक्षात्कार में बताया, तत्कालीन सीआईए निदेशक जॉर्ज टेनेट ने व्यक्तिगत रूप से मुशर्रफ को जानकारी दी थी। लॉलर ने बताया कि टेनेट ने मुशर्रफ से सीधे कहा कि एक्यू खान परमाणु रहस्यों को लीक कर रहे हैं। ये सुनने के बाद मुशर्रफ ने कहा था, 'मैं उस क*ने को मार डालूंगा।'


अमेरिकी अधिकारी ने एक्यू खान को 'मौत का सौदागर' उपनाम दिया
खुफिया विभाग के अफसर के रूप में अपने करियर के शुरुआती अनुभवों को याद कर लॉलर ने बताया कि कैसे उन्हें 'मैड डॉग' उपनाम मिला। अमेरिकी अफसर ने ये भी बताया कि उन्होंने पाकिस्तानी वैज्ञानिक एक्यू खान को 'मौत का सौदागर' कहना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने वर्षों तक पाकिस्तान की परमाणु क्षमता निर्माण में एक्यू खान की भूमिका पर नज़र रखी थी। उन्होंने याद किया, 'हम बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहे थे। हमें लगा कि यह गंभीर बात है कि वह पाकिस्तान को परमाणु हथियार मुहैया करा रहे हैं, लेकिन हमने यह नहीं सोचा था कि वह पलटकर इसे अन्य देशों तक पहुंचाने लगेंगे। ऐसे हालात में ही मैंने एक्यू खान को 'मौत का सौदागर' उपनाम दे दिया था।'

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