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UNGA: इस्राइल-फलस्तीन मुद्दे पर भारत का रुख साफ, 27 अक्तूबर के प्रस्ताव में हमास के आतंकवाद की स्पष्ट निंदा की
Sat, 28 Oct 2023 03:53 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 28 Oct 2023 03:53 PM IST
सार
इस्राइल और फलस्तीन के मुद्दे पर भारत अपना रूख पहले ही साफ कर चुका है। ताजा घटनाक्रम में विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 27 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के असाधारण विशेष सत्र में इस्राइल-फलस्तीन मुद्दे पर एक प्रस्ताव अपनाया गया था।
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UNGA Meeting
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष के बीच विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने संयुक्त राष्ट्र में लाए गए एक प्रस्ताव की जानकारी दी है। दरअसल, इस्राइल के साथ हमास के संघर्ष के बीच फलस्तीन का मुद्दा भी बेहद अहम है। फलस्तीन को अलग देश के रूप में मान्यता देने की मांग लंबे समय से हो रही है। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में 27 अक्तूबर को पेश प्रस्ताव के बारे में सूत्रों ने बताया कि भारत का वोट इस मुद्दे पर देश की दृढ़ और सुसंगत स्थिति को दिखाता है।
हमास की साफ शब्दों में निंदा जरूरी
सूत्रों ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्राइल और फलस्तीन के मुद्दे पर भारत के वोट की व्याख्या इसे व्यापक और समग्र रूप से दोहराती है। सूत्र ने कहा कि आतंक के मुद्दे पर कोई गोलमोल बात नहीं हो सकती। प्रस्ताव में भारत ने हमास के आतंकवाद की साफ शब्दों में निंदा की बात कही। सात अक्तूबर को शुरू हुए हिंसक संघर्ष के बाद गाजा में फलस्तीनी लोगों की मदद के मुद्दे पर सूत्र ने कहा, भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के तनाव कम करने के प्रयासों और गाजा के लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करने का स्वागत करता है। भारत ने भी इस प्रयास में योगदान दिया है।
शत्रुता बढ़ने से मानवीय संकट बढ़ने का खतरा
विदेश मंत्रालय के सूत्र ने कहा, बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और इस्राइल हमास के संघर्ष में नागरिकों की मौत सिहरन पैदा करने वाली है। सूत्र ने कहा कि जान-माल के नुकसान से भारत बहुत चिंतित है। क्षेत्र में शत्रुता बढ़ने से मानवीय संकट और बढ़ेगा। सभी पक्षों को अत्यधिक जिम्मेदारी का परिचय देना जरूरी है।
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वैश्विक मंच पर योजना पटेल ने रखा भारत का पक्ष
सूत्र के मुताबिक भारत ने हमेशा इस्राइल-फलस्तीन मुद्दे पर बातचीत के जरिए 'दो-देश समाधान' का समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय के सूत्र के अनुसार भारत सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर रहने वाले फलस्तीन को एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य देश के रूप में मान्यता देने का पक्षधर है। सूत्र के अनुसार, दो-देश समाधान को अपनाने से इस्राइल की सीमा पर शांति से रहा जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने रखा।
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में क्या है?
पटेल ने कहा कि शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के विशेष सत्र में भारत का जोर "7 अक्तूबर को हमास के आतंकवादी हमलों की स्पष्ट निंदा" पर था। यूएनजीए ने शुक्रवार को गाजा में इस्राइली बलों और हमास आतंकवादियों के बीच "तत्काल, टिकाऊ और निरंतर मानवीय संघर्ष विराम" का आह्वान करते हुए एक प्रस्ताव अपनाया।
गाजा संकट पर जॉर्डन का मसौदा प्रस्ताव, संशोधन के पक्ष में भारत, लेकिन...
जॉर्डन की तरफ से पेश प्रस्ताव में 7 अक्तूबर के आतंकवादी हमलों की कोई स्पष्ट निंदा शामिल नहीं थी। सूत्र ने बताया कि मुख्य प्रस्ताव पर मतदान से पहले, आतंकवाद की निंदा के पहलू को शामिल करने के लिए एक संशोधन पेश किया गया। हालांकि भारत ने जॉर्डन के गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव के लिए मतदान करने से परहेज किया, लेकिन उसने गाजा संकट पर मसौदा प्रस्ताव में कनाडा के नेतृत्व वाले संशोधन के पक्ष में मतदान किया। हालांकि, संशोधन के साथ प्रस्ताव यूएनजीए में पारित नहीं हो सका, क्योंकि उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं हुआ। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सूत्र ने कहा, भारत ने संशोधन के पक्ष में मतदान किया। पक्ष में कुल 88 वोट पड़े, लेकिन अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।
महिलाओं और बच्चों को कीमत चुकानी पड़ रही है
प्रस्ताव पर वोटिंग को लेकर भारत ने स्पष्टीकरण (ईओवी) दिया। UNGA में योजना पटेल के बयान के बाद भारत ने अपने रूख को लेकर जारी ईओवी में स्पष्ट किया, 7 अक्तूबर को इस्राइल में आतंकवादी हमले चौंकाने वाले थे। इसकी निंदा होनी चाहिए। हमारी संवेदनाएं बंधक बनाए गए लोगों के साथ भी हैं। हम उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई का आह्वान करते हैं। गाजा में उभरते मानवीय संकट के बीच नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को कीमत चुकानी पड़ रही है। सभी पक्षों के लिए अत्यधिक जिम्मेदारी दिखाना जरूरी है।
सभी पक्षों से भारत की अपील- हिंसा और तनाव कम करें
संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने अपने भाषण में भारत के वोट की व्याख्या करते हुए कहा, भारत ने हमेशा बातचीत के जरिए इस्राइल-फलस्तीन मुद्दे का समाधान करने का समर्थन किया है। फलस्तीन के लोग सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर, इस्राइल के साथ शांति से रह रहे हैं। ऐसे में भारत सभी पक्षों से आग्रह करता है कि तनाव कम करें। हिंसा से बचें और प्रत्यक्ष शांति वार्ता की शीघ्र बहाली के लिए परिस्थितियां बनाने की दिशा में काम करें।
वोटिंग में कितने देशों का समर्थन? 45 देश अनुपस्थित
सूत्र के अनुसार, प्रस्ताव के अंतिम हिस्से में भारत के दृष्टिकोण के सभी तत्वों को शामिल नहीं किया गया। ऐसे में भारत ने प्रस्ताव को अपनाने पर हुए मतदान में भाग नहीं लिया। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत कनाडाई प्रस्ताव के पक्ष में था जिसमें विशेष रूप से हमास के आतंकवादी हमलों की निंदा की गई थी। बता दें कि जॉर्डन के नेतृत्व वाले मसौदा प्रस्ताव पर महासभा में मतदान के दौरान पक्ष में 120 वोट जबकि विपक्ष में 14 वोट पड़े। 45 वोट अनुपस्थित रहे। प्रस्ताव पर मतदान से अनुपस्थित रहने वाले 45 देशों में आइसलैंड, भारत, पनामा, लिथुआनिया और ग्रीस शामिल रहे।
अब तक 8800 से अधिक लोगों की मौत
गौरतलब है कि जॉर्डन के प्रस्ताव को अपनाना हमास के आतंकवादी हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र की पहली औपचारिक प्रतिक्रिया है। यूएनजीए में मतदान ऐसे समय में हो रहा है जब इस्राइल ने गाजा में जमीनी सैन्य कार्रवाई तेज करने की घोषणा की है। बता दें कि इस्राइल और हमास के युद्ध में पिछले 22 दिनों में अब तक 8800 लोगों की मौत हो चुकी है। गाजा में 7436 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं।
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हमास की साफ शब्दों में निंदा जरूरी
सूत्रों ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्राइल और फलस्तीन के मुद्दे पर भारत के वोट की व्याख्या इसे व्यापक और समग्र रूप से दोहराती है। सूत्र ने कहा कि आतंक के मुद्दे पर कोई गोलमोल बात नहीं हो सकती। प्रस्ताव में भारत ने हमास के आतंकवाद की साफ शब्दों में निंदा की बात कही। सात अक्तूबर को शुरू हुए हिंसक संघर्ष के बाद गाजा में फलस्तीनी लोगों की मदद के मुद्दे पर सूत्र ने कहा, भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के तनाव कम करने के प्रयासों और गाजा के लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करने का स्वागत करता है। भारत ने भी इस प्रयास में योगदान दिया है।
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शत्रुता बढ़ने से मानवीय संकट बढ़ने का खतरा
विदेश मंत्रालय के सूत्र ने कहा, बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और इस्राइल हमास के संघर्ष में नागरिकों की मौत सिहरन पैदा करने वाली है। सूत्र ने कहा कि जान-माल के नुकसान से भारत बहुत चिंतित है। क्षेत्र में शत्रुता बढ़ने से मानवीय संकट और बढ़ेगा। सभी पक्षों को अत्यधिक जिम्मेदारी का परिचय देना जरूरी है।
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वैश्विक मंच पर योजना पटेल ने रखा भारत का पक्ष
सूत्र के मुताबिक भारत ने हमेशा इस्राइल-फलस्तीन मुद्दे पर बातचीत के जरिए 'दो-देश समाधान' का समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय के सूत्र के अनुसार भारत सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर रहने वाले फलस्तीन को एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य देश के रूप में मान्यता देने का पक्षधर है। सूत्र के अनुसार, दो-देश समाधान को अपनाने से इस्राइल की सीमा पर शांति से रहा जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने रखा।
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में क्या है?
पटेल ने कहा कि शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के विशेष सत्र में भारत का जोर "7 अक्तूबर को हमास के आतंकवादी हमलों की स्पष्ट निंदा" पर था। यूएनजीए ने शुक्रवार को गाजा में इस्राइली बलों और हमास आतंकवादियों के बीच "तत्काल, टिकाऊ और निरंतर मानवीय संघर्ष विराम" का आह्वान करते हुए एक प्रस्ताव अपनाया।
गाजा संकट पर जॉर्डन का मसौदा प्रस्ताव, संशोधन के पक्ष में भारत, लेकिन...
जॉर्डन की तरफ से पेश प्रस्ताव में 7 अक्तूबर के आतंकवादी हमलों की कोई स्पष्ट निंदा शामिल नहीं थी। सूत्र ने बताया कि मुख्य प्रस्ताव पर मतदान से पहले, आतंकवाद की निंदा के पहलू को शामिल करने के लिए एक संशोधन पेश किया गया। हालांकि भारत ने जॉर्डन के गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव के लिए मतदान करने से परहेज किया, लेकिन उसने गाजा संकट पर मसौदा प्रस्ताव में कनाडा के नेतृत्व वाले संशोधन के पक्ष में मतदान किया। हालांकि, संशोधन के साथ प्रस्ताव यूएनजीए में पारित नहीं हो सका, क्योंकि उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं हुआ। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सूत्र ने कहा, भारत ने संशोधन के पक्ष में मतदान किया। पक्ष में कुल 88 वोट पड़े, लेकिन अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।
महिलाओं और बच्चों को कीमत चुकानी पड़ रही है
प्रस्ताव पर वोटिंग को लेकर भारत ने स्पष्टीकरण (ईओवी) दिया। UNGA में योजना पटेल के बयान के बाद भारत ने अपने रूख को लेकर जारी ईओवी में स्पष्ट किया, 7 अक्तूबर को इस्राइल में आतंकवादी हमले चौंकाने वाले थे। इसकी निंदा होनी चाहिए। हमारी संवेदनाएं बंधक बनाए गए लोगों के साथ भी हैं। हम उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई का आह्वान करते हैं। गाजा में उभरते मानवीय संकट के बीच नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को कीमत चुकानी पड़ रही है। सभी पक्षों के लिए अत्यधिक जिम्मेदारी दिखाना जरूरी है।
सभी पक्षों से भारत की अपील- हिंसा और तनाव कम करें
संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने अपने भाषण में भारत के वोट की व्याख्या करते हुए कहा, भारत ने हमेशा बातचीत के जरिए इस्राइल-फलस्तीन मुद्दे का समाधान करने का समर्थन किया है। फलस्तीन के लोग सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर, इस्राइल के साथ शांति से रह रहे हैं। ऐसे में भारत सभी पक्षों से आग्रह करता है कि तनाव कम करें। हिंसा से बचें और प्रत्यक्ष शांति वार्ता की शीघ्र बहाली के लिए परिस्थितियां बनाने की दिशा में काम करें।
We welcome the international community’s de-escalation efforts and delivery of humanitarian assistance to the people of Gaza. India too has contributed to this effort. We are deeply concerned at the deteriorating security situation and astounding loss of civilian lives in the…
— ANI (@ANI) October 28, 2023
वोटिंग में कितने देशों का समर्थन? 45 देश अनुपस्थित
सूत्र के अनुसार, प्रस्ताव के अंतिम हिस्से में भारत के दृष्टिकोण के सभी तत्वों को शामिल नहीं किया गया। ऐसे में भारत ने प्रस्ताव को अपनाने पर हुए मतदान में भाग नहीं लिया। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत कनाडाई प्रस्ताव के पक्ष में था जिसमें विशेष रूप से हमास के आतंकवादी हमलों की निंदा की गई थी। बता दें कि जॉर्डन के नेतृत्व वाले मसौदा प्रस्ताव पर महासभा में मतदान के दौरान पक्ष में 120 वोट जबकि विपक्ष में 14 वोट पड़े। 45 वोट अनुपस्थित रहे। प्रस्ताव पर मतदान से अनुपस्थित रहने वाले 45 देशों में आइसलैंड, भारत, पनामा, लिथुआनिया और ग्रीस शामिल रहे।
अब तक 8800 से अधिक लोगों की मौत
गौरतलब है कि जॉर्डन के प्रस्ताव को अपनाना हमास के आतंकवादी हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र की पहली औपचारिक प्रतिक्रिया है। यूएनजीए में मतदान ऐसे समय में हो रहा है जब इस्राइल ने गाजा में जमीनी सैन्य कार्रवाई तेज करने की घोषणा की है। बता दें कि इस्राइल और हमास के युद्ध में पिछले 22 दिनों में अब तक 8800 लोगों की मौत हो चुकी है। गाजा में 7436 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं।