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COP26 climate summit: जलवायु शिखर सम्मेलन में भारत-ब्रिटेन करेंगे पहल, सौर हरित ग्रिड इनिशिएटिव की करेंगे शुरुआत
Sun, 31 Oct 2021 04:53 PM IST
मुकेश कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ग्लासगो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ग्लासगो
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Sun, 31 Oct 2021 04:53 PM IST
सार
दोनों देश एक नई हरित ग्रिड इनिशिएटिव को शुरू करेंगे, जिसके जरिए दुनिया के विभिन्न हिस्सों को जोड़ा जाएगा। नई वैश्विक हरित ग्रिड पहल ...वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस के तहत होगा। इसका मकसद दुनिया में सोलर एनर्जी से चलने वाले सभी ग्रिड को एक साथ जोड़ना है।
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नरेंद्र मोदी, बोरिस जॉनसन
- फोटो : social media
विस्तार
ग्लासगो में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन (COP26) में भारत और ब्रिटेन एक साझा पहल की शुरुआत करेंगे। दोनों देश एक नई हरित ग्रिड इनिशिएटिव को शुरू करेंगे, जिसके जरिए दुनिया के विभिन्न हिस्सों को जोड़ा जाएगा। नई वैश्विक हरित ग्रिड पहल ...वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस के तहत होगा। इसका मकसद दुनिया में सोलर एनर्जी से चलने वाले सभी ग्रिड को एक साथ जोड़ना है। यह बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना होगी। दरअसल, दोनों देश अपनी अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) भागीदारी को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
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मंगलवार को COP26 में शुरू की जाने वाली नई ग्रीन ग्रिड पहल से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत होंगे। COP26 सम्मेलन में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा ग्रीन ग्रिड इनिशिएटिव लॉन्च किया जाना है। इसका उद्देश्य अधिक परस्पर जुड़े हुए ग्रिड को विकसित करने में मदद करना है, जो सूर्य को सभी के लिए ऊर्जा का एक सुरक्षित और विश्वसनीय स्रोत बनने में योग्य बनाता है। इन प्रयासों से हरित निवेश को बढ़ावा मिलेगा और हरित रोजगार सृजित होंगे।
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सीओपी-26 सम्मेलन में भारत का रुख पेरिस समझौते के तहत 2020 की बाद की अवधि के लिए देश के महत्वाकांक्षी 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान' (एनडीसी) लक्ष्यों को रेखांकित करने का भी होगा। भारत और ब्रिटेन की संयुक्त पहल को नई ग्रीन ग्रिड इनिशिएटिव का नाम दिया गया है। इसे 'वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड' कहा जाता है।
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ब्रिटेन के व्यापार, ऊर्जा और औद्योगिक रणनीति (बीईआईएस) विभाग ने इस संयुक्त परियोजना के बारे में कहा, 'यह पहल राष्ट्रीय सरकारों, वित्तीय संगठनों तथा बिजली प्रणाली परिचालकों के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को साथ लाएगी। इससे सुरक्षित, विश्वसनीय और सस्ती बिजली के उत्पादन को बढ़ाने के लिए नए बुनियादी ढांचे के निर्माण को तेज किया जा सकेगा। इनमें आधुनिक, लचीले ग्रिड, चार्जिंग प्वाइंट और बिजली इंटरकनेक्टर शामिल हैं।'
दरअसल, दोनों देश न केवल द्विपक्षीय रूप से काम कर रहे हैं, बल्कि भारत द्वारा शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन के जरिए जलवायु परिवर्तन को अनुकूलित करने और कम करने वाले अन्य देशों का समर्थन करने के लिए भी काम कर रहे हैं। वहीं, इस मामले में विदेश मंत्रालय ने कहा कि COP26 सम्मेलन प्रधानमंत्री को साझेदार देशों के नेताओं, नवोन्मेषकों और अंतर-सरकारी संगठनों समेत सभी पक्षकारों से मुलाकात का तथा हमारी स्वच्छ वृद्धि को और तेजी से बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने का अवसर भी देगा।