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अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से भारत सहित कई देशों को फायदा होगा: संयुक्त राष्ट्र

Tue, 05 Feb 2019 10:26 PM IST
भाषा Published by: अमित मंडल Updated Tue, 05 Feb 2019 10:26 PM IST
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India to get benefit from US-China trade war:UN
United Nations - फोटो : File Photo
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध से भारत और कई अन्य देशों को फायदा होगा। संयुक्तराष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की दो शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव का फायदा कई देशों को मिलेगा, जिनमें भारत भी शामिल है। 
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पिछले साल मार्च में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयातित इस्पात पर और एल्युमीनियम पर भारी शुल्क लगाया है। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध की स्थिति बनी हुई। जवाबी कार्रवाई करते हुए चीन ने भी अरबों डॉलर के अमेरिकी आयात पर भारी शुल्क लगाया है। 
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संयुक्तराष्ट्र के विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि चीन और अमेरिका के बीच ‘जैसे को तैसा’ के व्यापार विवाद से दोनों ही देशों के घरेलू उत्पादकों को किसी तरह का संरक्षण नहीं मिलेगा। यदि इसे हल नहीं किया जाता है तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर होगा। 
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व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (अंकटाड) की रिपोर्ट में कह गया है कि चीन के 250 अरब डॉलर के निर्यात पर अमेरिका ने शुल्क की दरें ऊंची की हैं। इसमें से सिर्फ छह प्रतिशत की अमेरिका की कंपनियां खरीदेंगी। 

संयुक्तराष्ट्र के शोध के अनुसार इसी तरह अमेरिका के 85 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात पर चीन का शुल्क लगा है। इसमें से सिर्फ पांच प्रतिशत ही चीन की कंपनियां खरीदेंगी। 

अमेरिका ने चीन से द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिका के प्रतिकूल 375 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को कम करने की मांग की है। चीन ने इसके लिए अमेरिकी आयात और निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। इन उपायों को लागू करने के लिए अमेरिका ने एक मार्च, 2019 तक का समय तय किया है। 

संयुक्तराष्ट्र ने कहा कि यदि अमेरिका और चीन एक मार्च तक अपने शुल्क विवाद को समाप्त करने का फैसला नहीं करते हैं, तो दोनों देशों के उत्पादों पर शुल्क की दर मौजूदा के दस प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।

इस विवाद से जिन देशों को फायदा होगा उनमें यूरोपीय संघ के सदस्य देश शामिल हैं। यूरोपीय संघ का निर्यात इस विवाद से 70 अरब डॉलर बढ़ जाएगा। जापान का कनाडा का निर्यात 20-20 अरब डॉलर बढ़ेगा। 


अध्ययन में कहा गया है कि इससे आस्ट्रेलिया के निर्यात में 4.6 प्रतिशत, ब्राजील के निर्यात में 3.5 प्रतिशत, भारत के निर्यात में 3.5 प्रतिशत, फिलिपीन के निर्यात में 3.2 प्रतिशत तथा वियतनाम के निर्यात में पांच प्रतिशत का इजाफा होगा। 
 
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