फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   India, Russia and Iran will join hands in confrontation with Taliban

तालिबान से टकराव: साथ होंगे भारत, रूस और ईरान, चीन-पाक एक तरफ होंगे

Thu, 16 Sep 2021 04:40 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, तेहरान
एजेंसी, तेहरान Published by: देव कश्यप Updated Thu, 16 Sep 2021 04:40 AM IST
सार

ईरान के विदेश मंत्री की भारत से विदेश मंत्री एस जयशंकर से अफगानिस्तान को लेकर बात हुई है। अधिकारी ने कहा कि ईरान की नजदीकी भारत और रूस के साथ है और वह अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान की मिलीभगत का विरोध करते रहेंगे।

विज्ञापन
India, Russia and Iran will join hands in confrontation with Taliban
भारत, ईरान और रूसी नौसेना अभ्यास (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Twitter

विस्तार

अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद से उसके छह पड़ोसियों में से एक ईरान काफी आशंकित है। ईरान ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता भी जाहिर की है। गल्फ अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यहां तक कहा है कि यदि अफगानिस्तान को लेकर टकराव शुरू हुआ तो चीन-पाक एक तरफ होंगे और भारत, रूस तथा ईरान एक तरफ होंगे।

विज्ञापन


बता दें कि ईरान के विदेश मंत्री की भारत से विदेश मंत्री एस जयशंकर से अफगानिस्तान को लेकर बात भी हुई है। अधिकारी ने कहा कि ईरान की नजदीकी भारत और रूस के साथ है और वह अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान की मिलीभगत का विरोध करते रहेंगे।
विज्ञापन


तेहरान टाइम्स के अनुसार, ईरान के एक सांसद ने पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख फैज हामिद के पंजशीर घाटी में तालिबान की हिंसक कार्रवाई में शामिल होने का आरोप भी लगाया था। इस बीच, टोलो न्यूज पर एक बहस में तालिबान प्रवक्ता सैयद जर्कुराल्लाह हाशमी ने ईरान पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों में ईरान के भीतर कोई भी सुन्नी मंत्री नहीं बना है जबकि हमारी कैबिनेट में कोई शिया मंत्री नहीं है, इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में शियाओं को कोई पद नहीं मिलेगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पाक के प्रति उदार नहीं रहा ईरान : बासित
ईरान की टिप्पणी पर भारत में उच्चायुक्त रह चुके पाकिस्तान के राजनयिक अब्दुल बासित ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि ईरान को इस मामले में कुछ भी बहुत सतर्कता से बोलना चाहिए। पाकिस्तान ईरान से संबंधों को लेकर काफी संवेदनशील रहा है। पाकिस्तानी संसद ने यमन संघर्ष में सऊदी और ईरान के बीच किसी का भी पक्ष नहीं लेने का प्रस्ताव पास किया था। ईरान को याद रखना चाहिए कि हमने दोनों देशों के बीच सेतु बनाने की कोशिश की है, लेकिन 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान पाक के प्रति कभी उदार नहीं रहा है।


पाकिस्तान का बढ़ता विरोध
अफगानिस्तान में पाकिस्तानी भूमिका को ईरान न केवल संदेह के नजरिये से देख रहा है बल्कि काबुल में भी लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए सड़कों पर उतरे हैं। इनके खिलाफ तालिबान हवाई फायरिंग कर चुका है। अफगानिस्तान के हजारात इलाके में तालिबान के खिलाफ जबरदस्त विरोध है जहां हजारा समुदाय बहुतायत में है। देश में हजारा शिया समुदाय अल्पसंख्यक है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed