UNSC: यूक्रेन विवाद पर रुचिरा ने रखा भारत का पक्ष, कहा- यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय
रुचिरा कंबोज ने कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि वैश्विक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यूक्रेन संघर्ष के लिए भारत का दृष्टिकोण मानव-केंद्रित बना रहेगा।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में यूक्रेन विवाद पर भारत का पक्ष रखा। रुचिरा कंबोज ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत ने बार-बार शत्रुता को तत्काल समाप्त करने और बातचीत एवं कूटनीति के माध्यम से इस संघर्ष को हल करने की आवश्यकता का आह्वान किया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मंगलवार को यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले इलाकों दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया में हाल में हुए कथित जनमत संग्रह पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई थी।संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत रुचिरा कम्बोज ने सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए पिछले सप्ताह परिषद में विदेश मंत्री जयशंकर द्वारा की गई टिप्पणी का संदर्भ दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय वार्षिक सत्र को संबोधित करने आए जयशंकर ने कहा था कि यूक्रेन संकट का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए घोर चिंता का विषय है।
कंबोज ने कहा कि उज्बेकिस्तान के समरकंद में हाल ही में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट तौर पर यह बात कही थी। हमारा दृढ़ विश्वास है कि वैश्विक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यूक्रेन संघर्ष के लिए भारत का दृष्टिकोण मानव-केंद्रित बना रहेगा, हम अपनी ओर से यूक्रेन को मानवीय सहायता और आर्थिक संकट के तहत वैश्विक दक्षिण में अपने कुछ पड़ोसियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं।
कम्बोज ने कहा कि संघर्ष से पहले ही अनगिनत जानें जा चुकी हैं और लोगों की खासतौर पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की जिंदगी नारकीय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि संघर्ष की वजह से लाखों लोग बेघर हुए हैं और उन्हें मजबूरन पड़ोसी देशों में शरण लेनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि हम मिलकर काम करें ताकि इस संघर्ष का समापन यथाशीघ्र सुनिश्चित किया जा सके। कम्बोज ने दोहराया कि भारत ने बार-बार, दुश्मनी को खत्म करने और लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से करने का आह्वान किया है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थायी प्रतिनिधि लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि "पिछले हफ्ते 100 से अधिक देशों के नेता संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए न्यूयॉर्क में एकत्रित हुए। एक उच्च-स्तरीय सप्ताह में भाग लेने के बजाय, राष्ट्रपति पुतिन ने रूस में नए सिरे से भर्ती की घोषणा की। उन्होंने अवैध रूप से अचानक जनमत संग्रह की तैयारी के लिए रूस के सैन्य नियंत्रण वाले क्षेत्रों को निर्देश दिया।
लिंडा ने आगे कहा कि "पुतिन ने रूस के नाजायज सैन्य लाभ को सुरक्षित करने के लिए एक गैर-परमाणु देश पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी दी। इन सबका उद्देश्य स्पष्ट है कि रूस इस निकाय का सम्मान नहीं करता है।"