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संयुक्त राष्ट्र में भारत: तिरुमूर्ति ने कहा- मुंबई धमाकों के आरोपियों को पाक ने दिया था संरक्षण, खतरनाक है आतंकवाद को वर्गीकृत करने की प्रवृत्ति

Wed, 19 Jan 2022 09:54 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, न्यूयॉर्क
पीटीआई, न्यूयॉर्क Published by: देव कश्यप Updated Wed, 19 Jan 2022 09:54 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने वैश्विक आतंकवाद रोधी परिषद द्वारा ‘आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2022’ में कहा कि ‘‘अपने राजनीतिक, धार्मिक एवं अन्य मकसदों’’ के चलते संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्यों की कट्टरपंथ से प्रेरित हिंसक अतिवादी और दक्षिणपंथी अतिवादी जैसे वर्गों में आतंकवाद का वर्गीकरण करने की प्रवृत्ति खतरनाक है।

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India Permanent Representative to the UN Ambassador TS Tirumurti told Tendency of UN members to label terrorism into categories is dangerous
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति। - फोटो : ANI

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के जिम्मेदारों को पाकिस्तान की सरकार ने न केवल संरक्षण दिया, बल्कि उन्हें पांच सितारा होटल में रुकवाया गया। वहां उनका आतिथ्य किया गया। यह वही पाकिस्तान है, जिस पर आरोप है कि उसने डी-कंपनी के दाऊद इब्राहिम को छिपा कर रखा है। 

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वैश्विक आतंकवाद रोधी परिषद द्वारा ‘आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के बीच संबंधों को पूरी तरह से पहचाने जाने की आवश्यकता है और उनसे सख्ती से निपटना चाहिए। 
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पहली बार पाकिस्तान ने मानी थी दाऊद के छिपे होने की बात 
तिरुमूर्ति ने कहा कि अगस्त, 2020 में पहली बार पाकिस्तान ने स्वीकार किया था कि दाऊद इब्राहिम उनके यहां मौजूद है। ऐसा तब हुआ था जब सरकार ने 88 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों व उनके नेताओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए थे। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक, धार्मिक एवं अन्य मकसदों के चलते आतंकवाद का वर्गीकरण करने की संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्यों की प्रवृत्ति ‘खतरनाक’ है। यह प्रवृत्ति दुनिया को 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए हमलों से पहले की उस स्थिति में ले जाएगी, जब ‘आपके आतंकवादी’ और ‘मेरे आतंकवादी’ के रूप में आतंकवादियों का वर्गीकरण किया जाता था।
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होनी चाहिए हर प्रकार के आतंकवाद की निंदा
तिरुमूर्ति ने कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति हाल में अपनाई गई वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति के तहत संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों द्वारा स्वीकृत कुछ सिद्धांतों के खिलाफ है। यूएनएससी की आतंकवाद निरोधक कार्रवाई समिति के 2022 के लिए अध्यक्ष तिरुमूर्ति ने कहा, आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा होनी चाहिए क्योंकि इसे जायज नहीं ठहराया जा सकता है। 

दो सालों में बढ़ी आतंकवाद को वर्गीकृत करने की प्रवृत्ति
टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि "यह अनिवार्य रूप से इस तरह के कृत्यों के पीछे की मंशा के आधार पर आतंकवाद और आतंकवाद के लिए अनुकूल हिंसक उग्रवाद को वर्गीकृत करने के लिए एक कदम है। पिछले दो वर्षों में कई सदस्य देश, अपने राजनीतिक, धार्मिक और अन्य प्रेरणाओं से प्रेरित होकर, आतंकवाद को नस्लीय और जातीय रूप से प्रेरित हिंसक उग्रवाद, हिंसक राष्ट्रवाद, दक्षिणपंथी उग्रवाद जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत करने का प्रयास कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि "यह प्रवृत्ति कई कारणों से खतरनाक है।"


तिरुमूर्ति ने कहा कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र में, दक्षिणपंथी और वामपंथी राजनीति का हिस्सा हैं, क्योंकि वे मतदान के माध्यम से सत्ता में आते हैं, जो लोगों की बहुमत की इच्छा को दर्शाता है और चूंकि लोकतंत्र में परिभाषा के अनुसार विचारधाराओं और विश्वासों का व्यापक स्पेक्ट्रम होता है। इसलिए हमें विभिन्न प्रकार के वर्गीकरण करने से सावधान रहने की आवश्यकता है, जो स्वयं लोकतंत्र की अवधारणा के विरुद्ध हो सकते हैं। तथाकथित खतरों को भी ऐसे वर्गीकरण दिए जा रहे हैं जो कुछ राष्ट्रीय या क्षेत्रीय संदर्भों तक सीमित हैं। इस तरह के राष्ट्रीय या क्षेत्रीय आख्यानों को एक वैश्विक आख्यान में शामिल करना भ्रामक और गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के रुझान न तो वैश्विक हैं और न ही इसकी कोई सहमत वैश्विक परिभाषा है।

लश्कर, जैश आतंकी गुटों से संपर्क मजबूत कर रहा अलकायदा : भारत
तिरुमूर्ति ने इस बात पर भी जोर दिया कि हाल ही में, आतंकवादी गतिविधियों का पुनरुत्थान उनकी सीमा और विविधता के साथ-साथ भौगोलिक स्थान दोनों में देखा गया है। अगस्त 2021 में भारत की अध्यक्षता में अपनाए गए अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि अल-कायदा और तालिबान से हमदर्दी रखने वाले अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) को अपना समर्थन बंद कर दें।

तिरुमूर्ति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों के साथ अलकायदा के संपर्क लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम से आतंकी समूहों को दोबारा ऊर्जा मिली है।

तिरुमूर्ति ने आगे कहा कि इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने अपनी रणनीति को बदल दिया है, जिसका ध्यान अब सीरिया और इराक में पैर जमाने पर है और इसके क्षेत्रीय सहयोगी अपने विस्तार को मजबूत कर रहे हैं, खासकर अफ्रीका और एशिया में। तिरुमूर्ति ने कहा कि 2001 में 9/11 का आतंकवादी हमला 'आतंकवाद के प्रति हमारे दृष्टिकोण को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है।'



उन्होंने कहा, इसी तरह अलकायदा बड़ा खतरा बना हुआ है तथा अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम ने उन्हें फिर से मजबूत होने का मौका ही दिया है। लश्कर और जैश के साथ उसके संपर्क लगातार मजबूत हो रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र: भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति बोले- यूएन के सदस्यों की आतंकवाद को वर्गीकृत करने की प्रवृत्ति खतरनाक है
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