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संयुक्त राष्ट्र महासभा में मृत्युदंड के सामानों का व्यापार रोकने वाले प्रस्ताव का भारत ने किया विरोध
Sun, 30 Jun 2019 04:46 AM IST
Nilesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Nilesh Kumar
Updated Sun, 30 Jun 2019 04:46 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
भारत ने मृत्युदंड और यातना के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों के व्यापार को समाप्त करने को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में लाए गए एक प्रस्ताव का विरोध किया है। भारत ने इस प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि इस प्रस्ताव के तहत मौत की सजा देना भी अस्वीकार्य किया जाएगा।
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193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने द टॉर्चर-फ्री ट्रेड का संकल्प लिया। 81 सदस्यों ने इसका समर्थन किया, जबकि 44 ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और 20 सदस्यों ने विरोध किया। इस प्रस्ताव पर भारत थोड़ा बचता नजर आया।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव पॉलोमी त्रिपाठी ने वोट के स्पष्टीकरण में कहा कि भारत अत्याचार और अन्य क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक उपचार या सजा को रोकने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।
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उन्होंने आगे कहा, ‘यातना से मुक्ति एक मानवीय अधिकार है जिसे सभी परिस्थितियों में सम्मान और संरक्षित किया जाना चाहिए। भारत का मानना है कि अत्याचार एक अपराध है और यह गैरकानूनी है। प्रत्येक राज्य को अपनी कानूनी प्रणाली और उचित कानूनी दंड का निर्धारण करने का पूरा अधिकार है। क्योंकि भारत में मृत्युदंड एक वैधानिक प्रावधान है, लेकिन यह है दुर्लभ मामलों में इस्तेमाल किया जाता है।’
त्रिपाठी ने कहा कि इन ठोस और प्रक्रियागत विसंगतियों के मद्देनजर भारत इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने महासभा को बताया कि भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत यातना के कृत्य दंडनीय अपराध हैं। भारतीय न्यायपालिका भी मानवाधिकारों के ऐसे किसी भी उल्लंघन के खिलाफ काम करती है।