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Hindi News ›   World ›   India has said at the United Nations There cannot be double standards on religiophobia

India in UN: भारत ने काबुल में गुरुद्वारे पर हमले की निंदा की, धार्मिक भय पर दोहरे मापदंड पर कही यह बात

Sat, 18 Jun 2022 10:32 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, यूएन
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, यूएन Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 18 Jun 2022 10:32 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने देशों से एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया जो बहुलवाद और लोकतंत्र के सिद्धांतों को बढ़ावा देकर आतंकवाद का मुकाबला करने में सही मायने में योगदान दें।
 

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India has said at the United Nations There cannot be double standards on religiophobia
टीएस तिरुमूर्ति, यूएन में स्थायी प्रतिनिधि - फोटो : ANI

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने रिलिजियोफोबिया पर दोहरा मापदंड अपनाने से बचने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि धार्मिक भय पर 'दोहरे मानदंडट नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये मापदंड गैर अब्राहम धर्मों के खिलाफ समान रूप से लागू होने चाहिए। 

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने शुक्रवार को कहा कि भारत आतंकवाद, खासकर सीमा पार आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार रहा है। उन्होंने विभिन्न देशों से एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया जो बहुलवाद और लोकतंत्र के सिद्धांतों को बढ़ावा देकर आतंकवाद का मुकाबला करने में सही मायने में योगदान दें।
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भारत ने न केवल इब्राहीम धर्मों के खिलाफ बल्कि सिख धर्म, बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म सहित सभी धर्मों के खिलाफ नफरत और हिंसा का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा ठोस प्रयासों के लिए संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न प्लेटफार्मों का आह्वान किया है। इससे पहले ही संयुक्त राष्ट्र में कई मौकों पर त्रिमूर्ति ने कहा है कि धार्मिक भय के समकालीन रूपों को गुरुद्वारों, मठों और मंदिरों जैसे धार्मिक स्थलों पर हमलों में वृद्धि या गैर-अब्राहमिक धर्मों के खिलाफ घृणा और दुष्प्रचार के प्रसार में देखा जा सकता है। 
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस त्रिमूर्ति ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि धार्मिक भय के समकालीन रूपों का उदय, विशेष रूप से हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी और सिख विरोधी भय गंभीर चिंता का विषय है और इस खतरे को दूर करने के लिए संयुक्त राष्ट्र और सभी सदस्य राज्यों के ध्यान की आवश्यकता है। तभी हम इस तरह के विषयों पर अपनी चर्चा में अधिक संतुलन ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे देश की अंतर्निहित ताकत है जिसने समय के साथ कट्टरपंथ और आतंकवाद का सामना किया है।

शनिवार को काबुल के बाग-ए-बाला इलाके में गुरुद्वारा करता परवन में हुए विस्फोटों  में एक सिख सहित दो लोग मारे गए और सात अन्य घायल हो गए। काबुल के बाग-ए-बाला इलाके में गुरुद्वारा करता परवन में हुए विस्फोट की विदेश मंत्री एस जयशंकर ने निंदा की। उन्होंने  ट्वीट कर कहा कि गुरुद्वारा करता परवन पर हुए कायरतापूर्ण हमले की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए।

विशेष मुद्दों पर भारत को आक्रोश न दिखाएं दूसरे देश : टीएस तिरुमूर्ति
भारत के प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि हम सहनशीलता और समावेश को बढ़ावा देते हैं। किसी भी मतभिन्नता को कानूनी ढांचे के भीतर निपटाया जाना चाहिए। भाजपा के दो पूर्व पदाधिकारियों के बयान पर कई मुस्लिम देशों के आक्रोश दिखाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, दूसरे देशों को विशेष बात को मुद्दा बनाकर भारत को आक्रोश दिखाने की जरूरत नहीं। 


भड़काऊ बयान विरोधी अंतरराष्ट्रीय दिवस की पहली वर्षगांठ पर उच्चस्तरीय कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा, भारत में बहुसंस्कृतिवाद सदियों पुराना है। यहां यहूदी, पारसी या तिब्बती सभी को शरण मिली है। यह हमारे देश की आंतरिक शक्ति है कि यह कट्टरता और आतंकवाद के खिलाफ खड़ा रहा है। ऐतिहासिक रूप से भारत  सहनशीलता और समावेश को आगे बढ़ाता रहा है।

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