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Food Crisis: 'वैश्विक खाद्य संकट को दूर करने के लिए सामूहिक समाधान की जरूरत', UN में रुचिरा कंबोज ने बताए उपाय

Wed, 24 May 2023 06:19 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 24 May 2023 06:19 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस को संबोधित करते हुए रुचिरा कंबोज ने कहा कि हम काला सागर अनाज पहल के विस्तार का स्वागत करते हैं। जी20 अध्यक्ष के रूप में भारत की कोशिशों का उद्देश्य खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा की मौजूदा चुनौतियों को दूर करना है।

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India advocates for collective solutions and quick humanitarian access to address global food crisis
रुचिरा कंबोज, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी राजदूत। - फोटो : ANI

विस्तार

दुनिया भर में गहराए खाद्य संकट के बीच, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इसे दूर करने के लिए सामूहिक समाधान और त्वरित मानवीय खाद्य सहायता की वकालत की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने जोर देकर सभी से वैश्विक शांति की दिशा में योगदान करते हुए खाद्य सुरक्षा जाल और लचीली आजीविका के माध्यम से मजबूत नीतिगत नवाचार बनाने में मदद की अपील भी की। 

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काला सागर अनाज पहल के विस्तार का स्वागत- कंबोज
मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने वैश्विक खाद्य असुरक्षा को दूर करने के लिए चार उपाय भी बताए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस को संबोधित करते हुए रुचिरा कंबोज ने कहा कि हम काला सागर अनाज पहल के विस्तार का स्वागत करते हैं। जी20 अध्यक्ष के रूप में भारत की कोशिशों का उद्देश्य खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा की मौजूदा चुनौतियों को दूर करना है। साथ ही हमारी कोशिश बिना देर किए कमजोर समुदायों की मानवीय जरूरतों की पूर्ति सुनिश्चित करना है। 
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खाद्य असुरक्षा पर जताई चिंता
इससे पहले, उन्होंने खाद्य असुरक्षा के स्तर पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह खतरनाक अनुपात में पहुंच गया है। यह अनुमान लगाया गया है कि इस वर्ष खाद्य असुरक्षित लोगों की संख्या 2020 से दोगुनी हो जाएगी। इस दौरान उन्होंने रूस और यूक्रेन सहित दुनिया के कई अन्य देशों जैसे अफगानिस्तान, सूडान में संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि इन संघर्षों ने  खाद्य संकट को और बढ़ा दिया है।
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रुचिरा कंबोज ने खाद्य असुरक्षा दूर करने के लिए बताए चार उपाय
वैश्विक खाद्य संकट को दूर करने के लिए चार उपायों को बताते हुए कम्बोज ने कहा कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से एक सामूहिक और आम समाधान इस समय की जरूरत है। हम वैश्विक खाद्य असुरक्षा की चुनौती का समाधान करने के तरीके खोजने के लिए यूएन महासचिव गुटेरस के प्रयासों का समर्थन करते हैं।

मानवीय सहायता को राजनीतिक मुद्दों को जोड़ने से बचने की जरूरत 
कंबोज ने आगे यह भी कहा कि सभी देशों को दी जाने वाली मानवीय सहायता को राजनीतिक मुद्दों से जोड़ने से बचने की जरूरत है। उन्होंने विभिन्न संघर्षरत देशों को भारत द्वारा दी जाने वाली मदद के बारे में भी बताया। रुचिरा कंबोज ने कहा कि भारत ने यूक्रेन, अफगानिस्तान, यमन और म्यांमार सहित संघर्ष का सामना कर रहे देशों को खाद्यान्न की विशेष आपूर्ति में महत्वपूर्ण मानवीय सहायता प्रदान की है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने अपने तीसरे उपाय के बारे में बताते हुए कहा कि सशस्त्र संघर्ष और आतंकवाद, चरम मौसम, फसल कीट, खाद्य कीमतों में अस्थिरता, बहिष्करण और आर्थिक संकट संयुक्त रूप से किसी भी नाजुक अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकते हैं। इससे खाद्य असुरक्षा और अकाल में बढ़ोतरी हुई है। इनमें कमी लाने और खत्म करने की जरूरत है। 

खाद्यान के लिए समानता- सामर्थ्य और पहुंच के महत्व को बताना जरूरी
उन्होंने चौथा उपाय बताते हुए कहा कि जब खाद्यान्न की बात आती है तो हम सभी के लिए समानता, सामर्थ्य और पहुंच के महत्व की पर्याप्त रूप से सराहना करना अनिवार्य है। खुले बाजारों में असमानता को बनाए रखने के लिए ऐसे तर्कों से बचना चाहिए जो केवल वैश्विक दक्षिण के खिलाफ भेदभाव करे। 

भारत संकट में मदद के लिए हमेशा तैयार  
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बढ़ती चुनौतियों का सामना करते हुए भारत कभी भी उन लोगों की मदद करने में पीछे नहीं रहेगा जो संकट में हैं। जब जरूरत पड़ने पर हमारे भागीदारों की सहायता करने की बात आती है तो हम बात करना जारी रखेंगे। 


भुखमरी मे जी रहे लाखों लोग
जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की दशाओं में बदलाव,कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, गरीबी और असमानता से प्रेरित वैश्विक भुखमरी बढ़ रही है। लाखों लोग भुखमरी में जी रहे हैं और कई लोगों को पर्याप्त भोजन तक नहीं मिल पा रहा है। 

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