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पाकिस्तान में लगे नारे 'कहकर लेंगे आजादी', पानी मांगने पर छात्रों को कहा जा रहा आतंकी

Thu, 28 Nov 2019 01:29 PM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: योगेश साहू Updated Thu, 28 Nov 2019 01:29 PM IST
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In Pakistan too slogans like JNU sedition or treason are being imposed on students
पाकिस्तान में प्रदर्शन करते विद्यार्थी - फोटो : Social Media

पाकिस्तान में भी भारत के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के जैसे नारे लग रहे हैं। 'कहकर लेंगे आजादी, लड़कर लेंगे आजादी, हम क्या मांगें आजादी, पढ़ने की आजादी' जैसे नारे छात्र लगा रहे हैं। इतना ही नहीं पिछले कई दिनों से नारे लगाने वाले इन छात्रों के खिलाफ देशद्रोह की धारा में मुकदमा भी दर्ज किया जा रहा है।

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दरअसल, पाकिस्तान में प्रगतिशील और वामपंथी छात्र संगठनों ने बेहतर शिक्षा और बेहतर शैक्षिक माहौल की मांग के साथ 29 नवंबर को विद्यार्थी एकजुटता मार्च निकालने का ऐलान किया हुआ है। इसके पीछे देश में पाठ्यक्रमों के लिए बढ़ता शुल्क, शिक्षण संस्थानों के परिसरों में पुलिस की छात्रों पर कार्रवाई और गिरफ्तारियों को लेकर विद्यार्थियों में पनपा असंतोष एक बड़ी वजह है।
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छात्रों का आरोप है कि हक और जायज सुविधाएं मांगने पर देशद्रोह की धाराएं लगाई जा रही हैं। लाहौर के छात्रनेता और प्रगतिशील छात्र संगठन के प्रमुख हैदर कलीम ने इस संबंध में कहा कि हम सड़कों पर उतरने के लिए इसलिए मजबूर हुए क्योंकि हर छात्र को दाखिला लेने से पहले एक शपथपत्र भरने को कहा जा रहा है।
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वैसे तो छात्र संघों पर प्रतिबंध नहीं है लेकिन कई आदेशों के मार्फत ऐसी पाबंदियां थोपी जा रही हैं, जिससे कि छात्र राजनीति में हिस्सा ही न ले सकें।

पीने का पानी मांगा तो आतंकी कहा जा रहा

उधर, बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के छात्र दानिश बलोच ने कहा कि यहां छात्रों के लिए पीने के साफ पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। इसके लिए मांग करने वाले या आवाज उठाने वाले छात्रों को आतंकवादी तक कहा जा रहा है। एक अन्य छात्रा ने कहा कि बलूचिस्तान में यूनिवर्सिटी सेना की छावनियां लगने लगी हैं। हाॅस्टल में रहने वाली छात्राओं के लिए समय की पाबंदी लगा दी गई है।

मशाल खान की याद में मांगी सार्वजनिक छुट्टी

छात्र संगठनों का यह भी कहना है कि अपने विचार के लिए भीड़ द्वारा मार दिए गए छात्र मशाल खान की याद में 13 अप्रैल को सार्वजनिक छुट्टी घोषित की जानी चाहिए। मशाल की हत्या 13 अप्रैल 2017 को कर दी गई थी।

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