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Imran Khan: पूर्व पाकिस्तानी PM बोले- 9 मई की हिंसा साजिश, सैन्य अदालत में केस-सजा नामंजूर; वैश्विक मदद मांगी

Mon, 23 Dec 2024 01:53 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 23 Dec 2024 01:53 AM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान सैन्य अदालतों द्वारा 9 मई की घटनाओं के लिए पीटीआई समर्थकों को सुनाई गई सजा के खिलाफ हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से 'सैन्य परीक्षणों के जरिए न्याय के दुरुपयोग' पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने इसे एक संगठित सैन्य साजिश बताया और कहा कि निर्दोष नागरिकों को दंडित करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
 

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Imran Khan PTI Pakistan 9 May Violence Military Trial conviction Not accepted seeks global help
इमरान खान - फोटो : ANI

विस्तार

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने अपने समर्थकों के लिए सैन्य अदालतों की सजा को चुनौती देने की योजना बनाई है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पीटीआई ने 9 मई की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ किए गए मुकदमे को मौलिक मानवाधिकारों और न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है। इस बीच, सरकार ने न्याय के प्रदर्शन के रूप में दोषसिद्धि का बचाव किया। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि पीटीआई संस्थापक इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद 9 मई की अशांति में शामिल सभी लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। 

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शनिवार को पीटीआई संस्थापक इमरान खान ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में अंतरराष्ट्रीय संगठनों से 'सैन्य परीक्षणों के जरिए न्याय के दुरुपयोग' पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने इसे एक संगठित सैन्य साजिश बताया और कहा कि निर्दोष नागरिकों को दंडित करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। 
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सैन्य अदालतों के फैसले मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन: असद कैसर
इस बीच, पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर असद कैसर ने कहा कि सैन्य अदालतों द्वारा किए गए मुकदमे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं करते। उन्होंने कहा, 'सैन्य अदालतों के फैसले मौलिक मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। इन परीक्षणों में न्याय नहीं मिला है, और हम उपलब्ध हर मंच पर इन फैसलों को चुनौती देंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हमें निराश किया है। उन्होंने कहा कि यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि नागरिकों के बुनियादी संवैधानिक अधिकारों को छीन लिया जा रहा है।'

सैन्य अदालतों द्वारा दी गई सजाएं न्याय का उल्लंघन: उमर अयूब
नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता उमर अयूब खान ने कहा कि सैन्य अदालतों में पीटीआई के कैदियों के खिलाफ जो सजाएं दी गई हैं, वे न्याय का उल्लंघन हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। उन्होंने ऐसी कार्यवाही को नाजायज और कंगारू कोर्ट के समान करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य अदालतें नागरिकों पर मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं रखतीं, क्योंकि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का उल्लंघन है और संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है।



सैन्य अदालतों ने 10 साल तक सुनाई है सजा
बता दें कि पाकिस्तान की सैन्य अदालतों ने पिछले साल मई में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़के दंगों के दौरान सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने के लिए 25 नागरिकों को दो से 10 साल तक की जेल की सजा सुनाई है। 9 मई 2023 को, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थकों ने भ्रष्टाचार के एक मामले में पार्टी के संस्थापक इमरान खान की गिरफ्तारी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए रावलपिंडी में सेना मुख्यालय और फैसलाबाद में आईएसआई के भवन समेत कई सैन्य प्रतिष्ठानों पर कथित तौर पर हमला किया था।

इन 25 लोगों को दी गई सजा
मई में हुए दंगों के मामले में जिन 25 लोगों को सैन्य अदालतों ने सजा सुनाई है, उनमें निम्न लोग शामिल हैं। इसमें जान मोहम्मद खान, मोहम्मद इमरान महबूब, राजा मोहम्मद अहसान, रहमतुल्लाह, अनवर खान को 10 साल की कैद की सजा सुनाई गई। जबकि अब्दुल हादी, अली शान, दाउद खान, उमर फारुक, बाबर जमाल, जिया उर रहमान, अदनान अहमद, शाकिर उल्लाह, अली इफ्तिखार को 10 वर्ष के कारावास की  सजा सुनाई गई। इसके अलावा मोहम्मद अफाक खान को नौ साल, दाउद खान को सात साल, फहीम हैदर को छह साल, जाहिद खान को चार साल, यासिर नवाज को दो साल, मोहम्मद हशीर खान को छह साल, मोहम्मद आशिक खान को चार साल, लईक अहमद को दो साल के कारावास की सजा सुनाई गई। 

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