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इमरान ने बीआरआई के सदस्य देशों को बताया- कैसे जलवायु परिवर्तन, भ्रष्टाचार और गरीबी से लड़ा जा सकता
Fri, 26 Apr 2019 07:33 PM IST
अमर शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 26 Apr 2019 07:33 PM IST
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इमरान खान
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को चीन समर्थित बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के सदस्य देशों के बीच संयुक्त परियोजनाओं को शुरू करने का विचार दिया ताकि पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके और जलवायु परिवर्तन, भ्रष्टाचार एवं गरीबी से लड़ा जा सके।
दूसरे बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ) में हिस्सा लेने पहुंचे खान ने कहा कि कई अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में आवश्यक प्रगति होने के बाद यह अगले चरण में प्रवेश करने जा रहा है।
चीन बीआरआई में हिस्सा लेने वाले देशों के लिए 25 से 27 अप्रैल तक यहां बीआरएफ का आयोजन कर रहा है। इस बैठक में 37 देशों के प्रमुख के अलावा 150 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2013 में जब सत्ता में आए तो उन्होंने कई अरब डॉलर की परियोजना बीआरआई की शुरुआत की। यह परियोजना दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को सड़क एवं समुद्र मार्ग से जोड़ेगी।
भारत ने बीआरआई की सीपीईसी परियोजना को लेकर फोरम की बैठक का बहिष्कार किया है। दरअसल, 60 अरब डॉलर से तैयार होने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरेगा। भारत इसका विरोध कर रहा है। यह बीआरआई की प्रमुख परियोजना है।
इस बार भारत की तरह अमेरिका ने भी खुद को बैठक से दूर रखा है। अमेरिकी सरकार बीआरआई को लेकर काफी गंभीर है और उसका मानना है कि चीन बेल्ट एंड रोड मुहिम के जरिये छोट देशों को ‘ऋण के जाल’ में फंसा रहा है।
जिनपिंग ने "ऋण जाल" और महाशक्ति का दर्जा हासिल करने के लिए बीआरआई का इस्तेमाल संबंधी आलोचनाओं का जवाब देते हुए कि यह पहल "कोई विशेष क्लब नहीं है।" उन्होंने कहा, "इसमें सब कुछ पारदर्शी तरह से होना चाहिए और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
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दूसरे बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ) में हिस्सा लेने पहुंचे खान ने कहा कि कई अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में आवश्यक प्रगति होने के बाद यह अगले चरण में प्रवेश करने जा रहा है।
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चीन बीआरआई में हिस्सा लेने वाले देशों के लिए 25 से 27 अप्रैल तक यहां बीआरएफ का आयोजन कर रहा है। इस बैठक में 37 देशों के प्रमुख के अलावा 150 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2013 में जब सत्ता में आए तो उन्होंने कई अरब डॉलर की परियोजना बीआरआई की शुरुआत की। यह परियोजना दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को सड़क एवं समुद्र मार्ग से जोड़ेगी।
भारत ने बीआरआई की सीपीईसी परियोजना को लेकर फोरम की बैठक का बहिष्कार किया है। दरअसल, 60 अरब डॉलर से तैयार होने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरेगा। भारत इसका विरोध कर रहा है। यह बीआरआई की प्रमुख परियोजना है।
इस बार भारत की तरह अमेरिका ने भी खुद को बैठक से दूर रखा है। अमेरिकी सरकार बीआरआई को लेकर काफी गंभीर है और उसका मानना है कि चीन बेल्ट एंड रोड मुहिम के जरिये छोट देशों को ‘ऋण के जाल’ में फंसा रहा है।
जिनपिंग ने "ऋण जाल" और महाशक्ति का दर्जा हासिल करने के लिए बीआरआई का इस्तेमाल संबंधी आलोचनाओं का जवाब देते हुए कि यह पहल "कोई विशेष क्लब नहीं है।" उन्होंने कहा, "इसमें सब कुछ पारदर्शी तरह से होना चाहिए और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"