विपक्षी गठबंधन के आंदोलन के खिलाफ रणनीति बनाने में जुटे इमरान खान
- पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट की 11 को रैली, सरकार सख्ती से कुचलने को तैयार
- विपक्षी दलों के बागियों पर इमरान की नजर, जवाबी रणनीति के लिए बनाई कमेटी
- नवाज शरीफ को वापस लाने की कोशिशें तेज, कानूनी विकल्पों का सहारा लेने के निर्देश
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विपक्षी पार्टियों के नए गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के आंदोलनों से निपटने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी जवाबी रणनीति तैयार की है। इमरान खान ने अपनी तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेताओं के साथ विपक्षी एकता को तोड़ने और अवाम को भरोसे में रखने की अपनी नई रणनीति पर चर्चा की है और दावा किया है कि उनकी सरकार को दूर दूर तक कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा है कि भ्रष्ट लोग सरकार को ब्लैक मेल नहीं कर सकते और विपक्षी पार्टियों को जबरन सरकार के खिलाफ मनमानी करने का सर्टिफिकेट नहीं दिया जा सकता।
विपक्षी गठबंधन पीडीएम ने 11 अक्टूबर को क्वेटा में अपनी पहली रैली करने का एलान किया है, साथ ही उसी दिन से देश के तमाम हिस्सों में इमरान सरकार के खिलाफ धरना, प्रदर्शन और रैलियों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। विपक्षी एकता से घबराए इमरान खान ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि देश में अराजकता फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अगर विपक्ष शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करता है तो सरकार नहीं रोकेगी, लेकिन उन्होंने आगाह किया कि हिंसा और अराजकता की किसी भी आशंका नजर आने पर सरकार सख्त से सख्त कदम उठा सकती है।
विपक्षी एकता से मुकाबला करने के लिए इमरान सरकार और सत्ताधारी पार्टी ने हाल ही में एक कमेटी बनाई है जिसमें शाह महमूद कुरैशी, असद उमर, फवाद चौधरी, शफकत महमूद और परवेज खट्टक को शामिल किया गया है। इमरान ने कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक करके निर्देश दिए कि देश को अस्थिर करने और सेना की छवि धूमिल करने की विपक्षी साजिश को किसी भी कीमत पर नाकाम करना है, साथ ही पीएमएल-एल के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को लंदन से वापस भेजने के लिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने की हर कानूनी कोशिश करनी होगी।
इमरान खान की कोशिश ये भी है कि कैसे इस विपक्षी एकता को तोड़ा जाए और इसके लिए उन्होंने विपक्षी पार्टियों के भीतरी गुटबाजी को बढ़ावा देने और असंतुष्ट खेमे के नेताओं से संपर्क करने और उन्हें अपने साथ लाने की रणनीति भी बनाई है। इसकी शुरुआत नवाज शरीफ की पार्टी से ही की जा रही है। इसके लिए कमेटी के सदस्यों को कहा गया है कि वो पंजाब असेंबली के उन पांच बागी पीएमएल-एन नेताओं से मिलें, जिन्होंने बगैर अपने नेतृत्व को खबर किए पंजाब के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदर से मुलाकात की है। इमरान खान ने पंजाब और बलोचिस्तान के मुख्यमंत्रियों से अलग अलग मुलाकातें भी की हैं और उनके प्रांत के विकास के मुद्दों पर चर्चा की है।
जाहिर है इमरान खान अब तेजी से सबका भरोसा जीतने, देश के तमाम हिस्सों के अवाम से सीधा संवाद करने और विपक्ष की कोशिशों को नाम करने की मुहिम में लग गए हैं। खासकर नवाज शरीफ उनके लिए एक बड़े सिरदर्द बने हुए हैं और उन्हें वापस लाना उनकी प्राथमिकताओं में है। साथ ही अवाम को ये संदेश भी देना कि भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे तमाम मामलों में फंसे नवाज जैसे लोग और पार्टियां कैसे सेना और मुल्क के खिलाफ लोगों को भड़का रही हैं।