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Pakistan: आतंकी हमलों में इजाफे के लिए इमरान ने सुरक्षा बलों को घेरा, पूछा- लापरवाही के लिए हम जिम्मेदार कैसे?
Sun, 12 Feb 2023 10:49 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 12 Feb 2023 10:49 PM IST
सार
इमरान खान ने कहा कि इस बीच यह संभव है कि वे फिर से एकजुट हो गए हों, लेकिन फिर पाकिस्तानी सुरक्षा बल कहां थे? खुफिया एजेंसियां कहां थीं? समस्या यह है कि उनकी लापरवाही के लिए हमें कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
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इमरान खान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पीटीआई पार्टी के प्रमुख इमरान खान ने देश के सुरक्षा बलों की लापरवाही को प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के पनपने के पीछे की वजह बताया। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए अफगानिस्तान के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
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अप्रैल 2002 में सत्ता से बेदखल हुए 70 वर्षीय नेता खान ने शनिवार को एक अमेरिकी समाचार वेबसाइट के साथ इंटरव्यू के दौरान यह टिप्पणी की। इंटरव्यू में उन्होंने टीटीपी के साथ बातचीत को हरी झंडी देने के अपनी सरकार के कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा, सबसे पहले तालिबान के सत्ता में आने और टीटीपी पर फैसला करने के बाद पाकिस्तान सरकार के सामने क्या विकल्प थे और हम तीस से चालीस हजार लोगों के बारे में बात कर रहे हैं, क्या हमें उन्हें लाइन में खड़ा करना चाहिए था और उन्हें गोली मार देनी चाहिए थी, या हमें उन्हें फिर से बसाने के लिए उनके साथ काम करने की कोशिश करनी चाहिए थी?
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खान ने कहा, हमने एक बैठक की थी और विचार यह था कि सीमा क्षेत्र के सभी राजनेताओं, फाटा आदिवासी क्षेत्र और सुरक्षा बलों के साथ-साथ टीटीपी की सहमति से सीमा का सेटलमेंट किया जाए। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ, क्योंकि हमारी सरकार चली गई और एक बार जब हमारी सरकार को हटा दिया गया, तो नई सरकार ने गेंद से अपनी नजर हटा ली। उन्होंने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया, जिसने प्रतिबंधित संगठन को क्षेत्र में मजबूत होने दिया।
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ने आगे कहा, इस बीच यह खतरा बढ़ता गया और यह संभव है कि वे फिर से एकजुट हो गए हों, लेकिन फिर पाकिस्तानी सुरक्षा बल कहां थे? खुफिया एजेंसियां कहां थीं? समस्या यह है कि उनकी लापरवाही के लिए हमें कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा आतंकवाद की ताजा लहर से बुरी तरह प्रभावित है। इसके अलावा इससे सटे बलूचिस्तान और पंजाब प्रांतों में भी इस लहर का असर दिख रहा है। खान ने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों के बीच मतभेदों के बावजूद इस्लामाबाद को क्षेत्र में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए काबुल को संयुक्त के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने आगे पूछा, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह आसाम काम है, लेकिन क्या हम 2005 से 2015 तक पाकिस्तान के साथ जो हुआ, उसे दोहराना चाहते हैं, जहां पाकिस्तान जा रहा था, जो अफगान सीमा पर आतंकवाद से पीड़ित था? मुझे लगता है कि हम आतंकवाद के खिलाफ एक और युद्ध करने की स्थिति में नहीं हैं। एक तरीका य.ह है कि किसी भी तरह काबुल को हमारे साथ काम मिलकर काम करने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि हम इस मुद्दे से मिलकर निपट सकें।
2018 में सत्ता में आए खान एकमात्र पाकिस्तानी प्रधानमंत्री हैं जिन्हें अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास मत से अपदस्थ किया गया था। सत्ता से हटने के बाद से वह मध्यावधि चुनाव की घोषणा कराने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वह सत्तारूढ़ गठबंधन पर हमले कर रहे हैं। इस माह की शुरुआत में शीर्ष समिति की बैठक में पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य नेतृत्व टीटीपी को नियंत्रित करने के लिए लिए अफगान तालिबान प्रमुख हेबतुल्लाह अखुंदजादा से हस्तक्षेप करने की मांग करने का फैसला किया था।
टीटीपी ने पिछले साल नवंबर में सरकार के साथ अनिश्चितकालीन संघर्ष विराम को रद्द किया और अपने आतंकवादियों को सुरक्षा बलों पर हमले तेज करने का आदेश दिया था। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सत्ता में आने का बाद अफगान तालिबान टीटीपी के आतंकियों को निष्कासित करके पाकिस्तान के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल बंद कर देगा, लेकिन उन्होंने इस्लामाबाद के साथ संबंधों में तनाव की कीमत पर ऐसा करने से इनकार कर दिया।
इसी साल तीस जनवरी को तालिबान के आत्मघाती हमलावर ने पेशावर की उच्च सुरक्षा वाली एक मस्जिद में खुद को उड़ा दिया था, जिसमें सौ से ज्यादा नमाजियों की मौत हो गई थी, जबकि दो सौ से ज्यादा घायल हो गए थे। वर्ष 2007 में कई आतंकवादी संगठनों के समूह के रूप में गठित टीटीपी ने संघीय सरकार के साथ संघर्ष विराम तोड़ लिया था और अपने आतंकवादियों को देश भर में आतंकवादी हमले करने का आदेश दिया था।
अल-कायदा के करीबी माने जाने वाले इस समूह को 2009 में सेना मुख्यालय पर हमला, सैन्य ठिकानों पर हमला और 2008 में इस्लामाबाद के मैरियट होटल पर बमबारी सहित पाकिस्तान में कई घातक हमलों के लिए दोषी ठहराया जा चुका है। 2014 में, पाकिस्तानी तालिबान ने पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला किया, जिसमें 131 छात्रों सहित कम से कम 1150 लोग मारे गए थे।