IMF: आईएमएफ की शर्तों के असर से गरीबों को बचाओ, विश्व बैंक ने भी श्रीलंका को चेताया
आईएमएफ की कठिन शर्तों के गरीब और कमजोर तबकों पर पड़ रहे असर को लेकर इसके पहले मानव अधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशन और ह्यूमन राइट्स वॉच भी आगाह कर चुके हैं। दोनों संगठनों ने कहा था कि अब श्रीलंका में बन रही स्थिति से मानव अधिकारों की स्थिति बिगड़ेगी...
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विश्व बैंक ने श्रीलंका सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उसने कमजोर तबकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, तो देश में गरीबी की हालत बदतर हो सकती है। श्रीलंका इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की शर्तों पर अमल कर रहा है। इसके तहत सरकार को अपना खर्च घटाना पड़ा है। इस मकसद से सरकार ने जन कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती की है। कठिन शर्तों के आधार पर ही आईएमएफ ने श्रीलंका को तीन बिलियन डॉलर का ऋण जारी किया था।
अब विश्व बैंक ने श्रीलंका में गरीबी की हालत पर एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक असाधारण महंगाई और बढ़ती बेरोजगारी के कारण पिछले साल देश में गरीबों की संख्या बढ़ कर दोगुना हो चुकी थी। रिपोर्ट में कहा गया है- ‘साल 2023 और 2024 की आर्थिक संभावनाएं नकारात्मक हैं। इसके साथ ही राजस्व जुटाने के लिए जो सुधार लागू किए गए हैं, उनके परिणामस्वरूप गरीबी का अनुमान और बदतर हो सकता है। गरीब और कमजोर वर्गों पर इनके खराब प्रभावों को कम करने की चुनौती (आर्थिक) ढांचागत समायोजन के दौरान संकटपूर्ण अवस्था में रहेगी।’
आईएमएफ की कठिन शर्तों के गरीब और कमजोर तबकों पर पड़ रहे असर को लेकर इसके पहले मानव अधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशन और ह्यूमन राइट्स वॉच भी आगाह कर चुके हैं। दोनों संगठनों ने कहा था कि अब श्रीलंका में बन रही स्थिति से मानव अधिकारों की स्थिति बिगड़ेगी। अब विश्व बैंक ने भी उनसे मिलती-जुलती बातें कही हैं।
विश्व बैंक ने आंकड़ों के आधार पर कहा है कि देश में आर्थिक गैर-बराबरी बढ़ रही है, शहरी क्षेत्रों में गरीबों की संख्या आर्थिक संकट से पहले की तुलना तीन गुना हो चुकी है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह संख्या दो गुना हो चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है- ‘अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों तक कुल आबादी में गरीबों की संख्या 25 फीसदी से अधिक रहेगी। इसका कारण परिवारों की आजीविका के लिए पैदा हुए कई तरह खतरे हैं।’
आर्थिक संकट के कारण पिछले साल अप्रैल में श्रीलंका ने डिफॉल्ट (ऋण चुकाने में खुद को अक्षम घोषित) कर दिया था। डिफॉल्टर होने के बाद श्रीलंका के लिए अंतरराष्ट्रीय ऋण के दरवाजे बंद हो गए और इसका उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा। साल 2020 में देश की 13 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे थी। विश्व बैंक ने कहा है कि 2022 में गरीबी में भारी इजाफा हुआ और यह संख्या 25 फीसदी तक पहुंच गई।
विश्व बैंक के मुताबिक सिर्फ साल 2022 में 25 लाख और लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए। इसकी वजहों का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल महंगाई में 46 फीसदी इजाफा हुआ, सेवा और उद्योग क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों को नौकरियों से हटाया गया, और शहरों में नौकरी जाने की वजह से गांव लौटे श्रमिक कम वेतन पर काम करने को मजबूर हुए। साथ ही विदेशों में नौकरी करने वाले लोगों की तरफ से भेजी जाने वाली रकम भी घटी, जिसका असर उनके परिवारों पर पड़ा।