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गिलगित-बाल्टिस्तान पहली बार मौसम विभाग की पूर्वानुमान सूची में शामिल, वजह है बेहद अहम

Thu, 07 May 2020 06:41 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 07 May 2020 06:41 PM IST
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IMD in its forecast for northwest India list include Gilgit Baltistan Muzaffarabad for first time
भारत का नक्शा - फोटो : PIB

देश में मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली संस्था भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने जम्मू और कश्मीर के अपने मौसम संबंधी उप-मंडल का उल्लेख 'जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद' के रूप में करना शुरू कर दिया है। बता दें कि मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के अंतर्गत आते हैं। 

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सूची में परिवर्तन मंगलवार से आईएमडी द्वारा जारी उत्तर पश्चिमी भारत के दैनिक पूर्वानुमान में दिखाई देना शुरू हो गया है। दैनिक क्षेत्र-वार पूर्वानुमान पूरे उप-मंडल के लिए हैं न कि किसी विशिष्ट क्षेत्र के लिए। आईएमडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम में परिवर्तन की पुष्टि की है। देश में इस समय 36 मौसम संबंधी उप-मंडल हैं। इन्हें राज्य की सीमाओं के साथ परिभाषित किया गया है। 
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पाक सुप्रीम कोर्ट ने दी यहां चुनाव कराने की अनुमति 
आईएमडी का कदम न केवल एक अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में लद्दाख की बदली हुई स्थिति को दर्शाता है बल्कि एक महत्वपूर्ण अंतर्निहित संदेश भी देता है। ऐसा तब हुआ है जब कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने संघीय सरकार को गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की अनुमति दी है।
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30 अप्रैल को पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने सरकार के आवेदन पर सुनवाई करते हुए गिलगित-बाल्टिस्तान में कार्यवाहक सरकार बनाने और प्रांतीय विधानसभा चुनाव कराने की अनुमति दी थी। सोमवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने इस फैसले के खिलाफ अपना कड़ा विरोध जताते हुए कहा था  कि पाकिस्तानी संस्थान के पास अवैध रूप से या जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। 

मंत्रालय ने कहा था कि भारत इस तरह की कार्रवाईयों और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों में भौतिक परिवर्तन लाने के निरंतर प्रयास को पूरी तरह से खारिज करता है। इसी दिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने बयान जारी करते हुए भारत के आरोपों को खारिज किया था।

इस मायने में है अहम
इस घटनाक्रम का महत्व ऐसे समय में काफी बढ़ जाता है जब भारत ने हाल ही एक बार फिर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पीओके भारत का हिस्सा है। इसमें गिलगिट-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद शामिल है। इन शहरों के लिए मौसम पूर्वानुमान जारी करना तब शुरू किया गया है जब कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने गिलगिट बाल्टिस्तान में चुनाव की अनुमति दी थी। भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश
बता दें कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख 31 अक्टूबर को अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में आ गए थे। दो नवंबर 2019 को केंद्र सरकार ने केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का नया नक्शा जारी किया था।  

गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि लद्दाख में दो जिले लेह और करगिल होंगे जबकि बाकी जिले जम्मू-कश्मीर में ही रहेंगे। साल 1947 कौ दौरान जम्मू कश्मीर में कुल 14 जिले थे।  

  • कठुआ
  • जम्मू
  • उधमपुर
  • रिइसी
  • अनंतनाग
  • बारामूला
  • पुंछ 
  • मीरपुर
  • मुजफ्फराबाद
  • लेह व लद्दाख
  • गिलगित
  • गिलगित वजारत
  • चिल्हास और आदिवासी क्षेत्र  

साल 2019 तक भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर के 14 जिलों का पुनर्गठन कर 28 जिलों का गठन किया। ये नए जिले हैं- कुपवाड़ा, बांदीपुर, गंदरबल, श्रीनगर, बडगाम, शोपियां, कुलगाम, राजौरी, रामबन, डोडा, किश्तवाड़, सांबा और कारगिल।   

कारगिल जिले को लेह और लद्दाख जिले के क्षेत्र से बनाया गया था। राष्ट्रपति की ओर से जारी जम्मू कश्मीर पुनर्गठन 2019 से जुडे़ आदेश में गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और आदिवासी इलाकों को लेह व लद्धाख में शामिल किया गया। वहीं, अब से मौसम विभाग ने नई पहल कर भारत के दृष्टिकोण व संकल्प को और मजबूत किया है। 

 

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