{"_id":"69593147a50add8bbe0a8c45","slug":"how-us-planned-capture-of-venezuela-president-nicolas-maduro-cia-operation-special-delta-forces-explained-2026-01-03","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"वेनेजुएला पर अमेरिका ने कैसे हमला किया?: युद्धपोत, CIA...डेल्टा फोर्स, ऐसे हुई मादुरो को बंधक बनाने की तैयारी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
वेनेजुएला पर अमेरिका ने कैसे हमला किया?: युद्धपोत, CIA...डेल्टा फोर्स, ऐसे हुई मादुरो को बंधक बनाने की तैयारी
Sat, 03 Jan 2026 09:10 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 03 Jan 2026 09:10 PM IST
सार
अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद से कई सवाल खड़े हुए। मसलन- ट्रंप की तरफ से वेनेजुएला पर हमले की तैयारी कब से शुरू कर दी गई थी? इसमें विशेष बल के जुड़ने के संकेत कब मिले? आखिर कब ट्रंप ने यह साफ संकेत दिए कि अमेरिकी सेना वेनेजुएला में घुसकर हमला करने वाली है? सीआईए की इसमें क्या भूमिका रही? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
कैरिबियाई सागर में अमेरिका ने दो महीने पहले कर ली थी वेनेजुएला पर हमले की तैयारी।
- फोटो : अमर उजाला/AI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका ने शनिवार को वेनेजुएला में अलग-अलग ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की और देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को बंधक बनाकर किसी अन्य ठिकाने पर पहुंचा दिया। इस घटना के बाद दुनियाभर में कई देशों ने ट्रंप प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। इनमें रूस से लेकर अमेरिका के पड़ोसी देश तक शामिल हैं।
अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद से कई सवाल खड़े हुए। मसलन- ट्रंप की तरफ से वेनेजुएला पर हमले की तैयारी कब से शुरू कर दी गई थी? इसमें विशेष बल के जुड़ने के संकेत कब मिले? आखिर कब ट्रंप ने यह साफ संकेत दिए कि अमेरिकी सेना वेनेजुएला में घुसकर हमला करने वाली है? सीआईए की इसमें क्या भूमिका रही? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद से कई सवाल खड़े हुए। मसलन- ट्रंप की तरफ से वेनेजुएला पर हमले की तैयारी कब से शुरू कर दी गई थी? इसमें विशेष बल के जुड़ने के संकेत कब मिले? आखिर कब ट्रंप ने यह साफ संकेत दिए कि अमेरिकी सेना वेनेजुएला में घुसकर हमला करने वाली है? सीआईए की इसमें क्या भूमिका रही? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
ट्रंप ने कब शुरू की वेनेजुएला पर कार्रवाई की तैयारी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 की शुरुआत में सत्ता संभालने के बाद से ही दक्षिण अमेरिका में अपना वर्चस्व स्थापित करने और क्षेत्र में चीन-रूस के प्रभाव को खत्म करने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। हालांकि, शुरुआत में ट्रंप ने क्षेत्र में अमेरिकी हितों को ध्यान में रखते हुए वार्ता के जरिए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश शुरू की। ट्रंप ने सबसे पहले नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा उठाया और चीन, कनाडा जैसे देशों पर टैरिफ के जरिए दबाव बनाया। इसी कड़ी में उन्होंने वेनेजुएला पर भी आरोप लगाए और उससे नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने को कहा।
यह भी पढ़ें: कौन हैं निकोलस मादुरो: अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति को क्यों कैद किया, ट्रंप किस बात पर नाराज?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 की शुरुआत में सत्ता संभालने के बाद से ही दक्षिण अमेरिका में अपना वर्चस्व स्थापित करने और क्षेत्र में चीन-रूस के प्रभाव को खत्म करने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। हालांकि, शुरुआत में ट्रंप ने क्षेत्र में अमेरिकी हितों को ध्यान में रखते हुए वार्ता के जरिए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश शुरू की। ट्रंप ने सबसे पहले नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा उठाया और चीन, कनाडा जैसे देशों पर टैरिफ के जरिए दबाव बनाया। इसी कड़ी में उन्होंने वेनेजुएला पर भी आरोप लगाए और उससे नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने को कहा।
यह भी पढ़ें: कौन हैं निकोलस मादुरो: अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति को क्यों कैद किया, ट्रंप किस बात पर नाराज?
ट्रंप ने वेनेजुएला के लिए विशेष दूत रिचर्ड ग्रेनेल की तैनाती की और अमेरिकी प्रतिनिधियों के जरिए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को संदेश भिजवाया। इन संदेशों में मादुरो को धमकी दी कि वह नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाएं, वेनेजुएला की सत्ता छोड़ दें और किसी दूसरे देश निर्वासित हो जाएं। अमेरिकी मीडिया ग्रुप न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) के मुताबिक, अमेरिका ने सबसे पहले मादुरो को धमकाने की कड़ी में ही कैरिबियाई सागर में अपने युद्धपोत और पांच हजार सैनिक तैनात कर दिए। इसके बाद धीरे-धीरे दक्षिण अमेरिका में 15 हजार सैनिकों की तैनाती की। इसके जरिए अमेरिका ने वेनेजुएला पर आवाजाही की पाबंदी लगा दी। इस दौरान अमेरिका ने मादुरो पर दबाव बनाने के लिए कैरिबियाई सागर में कई नावों को भी निशाना बनाया, जिन पर कथित तौर पर नशीले पदार्थों को बाहर ले जाने का आरोप लगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने कभी भी इन नावों में मादक पदार्थ होने के सबूत नहीं दिए। बताया जाता है कि इन हमलों में वेनेजुएला के कई नागरिकों की मौत हो गई।
अक्तूबर आते-आते जब मादुरो की ओर से ट्रंप की धमकियों को अनसुना करने के संकेत मिलने लगे तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने कूटनीतिक वार्ताओं को पूरी तरह समाप्त करने के निर्देश दे दिए। एक अमेरिकी अधिकारी ने उस दौरान दावा किया था कि ट्रंप वेनेजुएला पर हमले की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन वह इसे लेकर सोच में हैं कि सैन्य अभियान के दूसरे या तीसरे फेज को कैसे आगे बढ़ाया जाए। यानी यही वह समय था, जब ट्रंप ने वेनेजुएला पर हमले की तैयारी के आदेश दे दिए थे।
यह भी पढ़ें: अमेरिका-वेनेजुएला विवाद क्या है?: ट्रंप ने 300 अरब बैरल तेल भंडार वाले देश पर क्यों किया हमला, 'नशा' बना बहाना
1. नौसैनिक स्तर पर क्या तैयारी?
ऐसे में अमेरिका ने दबाव बनाने के लिए अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को क्षेत्र में तैनात कर दिया। इसमें सबसे आधुनिक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल है, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है। इसके अलावा वेनेजुएला के करीब प्यूअर्टो रिको में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हलचल भी बढ़ा दी गई। यहां दो बड़े जहाज तैनात किए गए। इनमें एक गाइडेड मिसाइल क्रूजर- यूएसएस लेकर एरी शामिल रहा। विश्लेषकों के मुताबिक, दूसरा जहाज- एमवी ओशियन ट्रेडर था, जो कि विशेष बलों (जैसे डेल्टा फोर्स) को अभियानों के दौरान हथियारों, ड्रोन्स, हेलीकॉप्टर की मदद पहुंचाने वाला कार्गो शिप है।
इस कार्गो शिप की तैनाती से यह काफी हद तक संकेत मिल गया था कि अमेरिकी प्रशासन अपनी स्पेशल फोर्सेज के जरिए वेनेजुएला को निशाना बना सकता है। बताया जाता है कि अमेरिका ने यह पूरी तैयारी 27 सितंबर से 16 अक्तूबर के बीच कर ली थी।
यह भी पढ़ें: अमेरिका-वेनेजुएला विवाद क्या है?: ट्रंप ने 300 अरब बैरल तेल भंडार वाले देश पर क्यों किया हमला, 'नशा' बना बहाना
कब मिले वेनेजुएला के खिलाफ विशेष बलों के इस्तेमाल के संकेत?
सीएनएन के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति को अगस्त-सितंबर के मध्य में ही कूटनीतिक प्रयासों में मुश्किल दिखने लगी थी।1. नौसैनिक स्तर पर क्या तैयारी?
ऐसे में अमेरिका ने दबाव बनाने के लिए अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को क्षेत्र में तैनात कर दिया। इसमें सबसे आधुनिक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल है, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है। इसके अलावा वेनेजुएला के करीब प्यूअर्टो रिको में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हलचल भी बढ़ा दी गई। यहां दो बड़े जहाज तैनात किए गए। इनमें एक गाइडेड मिसाइल क्रूजर- यूएसएस लेकर एरी शामिल रहा। विश्लेषकों के मुताबिक, दूसरा जहाज- एमवी ओशियन ट्रेडर था, जो कि विशेष बलों (जैसे डेल्टा फोर्स) को अभियानों के दौरान हथियारों, ड्रोन्स, हेलीकॉप्टर की मदद पहुंचाने वाला कार्गो शिप है।
इस कार्गो शिप की तैनाती से यह काफी हद तक संकेत मिल गया था कि अमेरिकी प्रशासन अपनी स्पेशल फोर्सेज के जरिए वेनेजुएला को निशाना बना सकता है। बताया जाता है कि अमेरिका ने यह पूरी तैयारी 27 सितंबर से 16 अक्तूबर के बीच कर ली थी।
2. वायुसेना के स्तर पर?
इसके अलावा अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने एफ-35 फाइटर जेट्स और एफ-35बी जेट तैनात कर लिए थे। सोशल मीडिया पर कई प्राइवेट जेट पायलटों ने एमक्यू-9बी रीपर ड्रोन्स की तस्वीरें भी डाली थीं, जो कि प्यूअर्टो रिको के राफेल हर्नांडेज एयरपोर्ट पर तैनात था। इन ड्रोन्स के जरिए अमेरिका ने अफगानिस्तान, सीरिया, लीबिया और माली पर निगरानी की है और कई बार हमले बोले हैं।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्तूबर की शुरुआत में अमेरिका के बी-52 बॉम्बर एयरक्राफ्ट्स को भी वेनेजुएला के तटीय इलाकों के करीब से गुजरते देखा गया था और यह कैरिबियाई सागर पर लंबे समय तक चक्कर काटता रहा। अमेरिकी वायुसेना ने बाद में पुष्टि की थी कि यह बी-52 हमले की संभावनाओं को देख रहे थे।
इसके अलावा अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने एफ-35 फाइटर जेट्स और एफ-35बी जेट तैनात कर लिए थे। सोशल मीडिया पर कई प्राइवेट जेट पायलटों ने एमक्यू-9बी रीपर ड्रोन्स की तस्वीरें भी डाली थीं, जो कि प्यूअर्टो रिको के राफेल हर्नांडेज एयरपोर्ट पर तैनात था। इन ड्रोन्स के जरिए अमेरिका ने अफगानिस्तान, सीरिया, लीबिया और माली पर निगरानी की है और कई बार हमले बोले हैं।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्तूबर की शुरुआत में अमेरिका के बी-52 बॉम्बर एयरक्राफ्ट्स को भी वेनेजुएला के तटीय इलाकों के करीब से गुजरते देखा गया था और यह कैरिबियाई सागर पर लंबे समय तक चक्कर काटता रहा। अमेरिकी वायुसेना ने बाद में पुष्टि की थी कि यह बी-52 हमले की संभावनाओं को देख रहे थे।
इनके अलावा बी1 बॉम्बर और पी-8 पोसाइडन जासूसी एयरक्राफ्ट को भी कैरिबियाई सागर और दक्षिण अमेरिका के तटीय इलाकों में देखा गया। इनकी जानकारी प्लेन ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराई गई। बताया गया कि कई सैन्य हेलीकॉप्टरों ने इस दौरान त्रिनिदाद और टोबैगो से उड़ान भरी थी। इनमें से कुछ हेलीकॉप्टर बोइंग के एमएच-6एम लिटिल बर्ड्स थे, जिन्हें सिर्फ अमेरिका के विशेष बल इस्तेमाल करते हैं।
सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका ने जिस तरह का सैन्य बल वेनेजुएला के आसपास यह बोलकर तैनात किया था कि वह नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए है, उतने बड़े बल की जरूरत सिर्फ संघर्ष के दौरान होती है।
सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका ने जिस तरह का सैन्य बल वेनेजुएला के आसपास यह बोलकर तैनात किया था कि वह नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए है, उतने बड़े बल की जरूरत सिर्फ संघर्ष के दौरान होती है।
वेनेजुएला में अभियान के कब मिले साफ संकेत, सीआईए की क्या रही भूमिका?
अमेरिका की विदेश मामलों की खुफिया एजेंसी होने की वजह से सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी यानी सीआईए की भूमिका वेनेजुएला में तय थी। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर-दिसंबर में एलान किया था कि वेनेजुएला में सैन्य अभियान के लिए उन्होंने सीआईए को अधिकृत कर दिया है। हालांकि, तब इसकी वजह नशीले पदार्थों के ठिकानों को खत्म करना बताया गया था। ट्रंप ने एक मौके पर यहां तक कह दिया था कि अमेरिका अब वेनेजुएला की धरती की तरफ देख रहा है। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि अमेरिका किसी भी समय वेनेजुएला की धरती पर सैन्यबल उतार सकता है। हालांकि, इसके लिए सीआईए की खुफिया जानकारी काफी अहम होने वाली थी।
अमेरिका की विदेश मामलों की खुफिया एजेंसी होने की वजह से सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी यानी सीआईए की भूमिका वेनेजुएला में तय थी। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर-दिसंबर में एलान किया था कि वेनेजुएला में सैन्य अभियान के लिए उन्होंने सीआईए को अधिकृत कर दिया है। हालांकि, तब इसकी वजह नशीले पदार्थों के ठिकानों को खत्म करना बताया गया था। ट्रंप ने एक मौके पर यहां तक कह दिया था कि अमेरिका अब वेनेजुएला की धरती की तरफ देख रहा है। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि अमेरिका किसी भी समय वेनेजुएला की धरती पर सैन्यबल उतार सकता है। हालांकि, इसके लिए सीआईए की खुफिया जानकारी काफी अहम होने वाली थी।
लातिन अमेरिकी देशों में सीआईए को काफी शक की निगाह से देखा जाता है, क्योंकि इस एजेंसी ने क्यूबा से लेकर चिली और ब्राजील तक सत्ता-परिवर्तन की कई कोशिशें करवाई हैं। इनमें दक्षिणपंथी सैन्य तानाशाही के समर्थन जैसी घटनाएं शामिल हैं। पूर्व सीआईए विश्लेषक नेड प्राइस ने कुछ समय पहले बीबीसी को बताया था कि सीआईए वेनेजुएला में अभियान के तहत विपक्षी दलों को फंडिंग मुहैया करा सकता है, ताकि वे मादुरो शासन को उखाड़ फेंकने के लिए सरकार और बाहर जरूरी समर्थन जुटा पाएं। इसके अलावा सीआईए के जासूस वेनेजुएला में उन जगहों को चिह्नित कर सकते हैं, जहां नशीले पदार्थों के ठिकाने हों, वायुसेना के लिए एयरस्ट्रिप हों, सैन्य ठिकाने हों या खुद मादुरो छिपे हों, ताकि अमेरिकी सेना उन्हें निशाना बना सके।
नेड प्राइस ने अनुमान लगाया था कि सीआईए की मदद से अमेरिकी सैन्य बल वेनेजुएला में घुसकर मादुरो के ठिकाने से उन्हें और उनके कुछ खास वफादार सैनिकों को बंधक बना सकते हैं और उन्हें अमेरिका ला सकते हैं, जहां मादुरो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।
नेड प्राइस ने अनुमान लगाया था कि सीआईए की मदद से अमेरिकी सैन्य बल वेनेजुएला में घुसकर मादुरो के ठिकाने से उन्हें और उनके कुछ खास वफादार सैनिकों को बंधक बना सकते हैं और उन्हें अमेरिका ला सकते हैं, जहां मादुरो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।
और अनुमान के मुताबिक ही बंधक बनाए गए मादुरो
गौरतलब है कि मादुरो को कुछ इसी तरह 3 जनवरी को अमेरिका के विशेष बल- डेल्टा फोर्स ने बंधक बनाया। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि मादुरो के साथ उनकी पत्नी को भी बंधक बनाया गया है। ट्रंप ने अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज को बताया कि सुरक्षाबलों ने मादुरो को एक युद्धपोत पर बंधक बनाकर रखा है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने बताया था कि मादुरो को अमेरिका लाया जाएगा, जहां उन पर कानून के तहत मुकदमा चलेगा।
अन्य वीडियो
गौरतलब है कि मादुरो को कुछ इसी तरह 3 जनवरी को अमेरिका के विशेष बल- डेल्टा फोर्स ने बंधक बनाया। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि मादुरो के साथ उनकी पत्नी को भी बंधक बनाया गया है। ट्रंप ने अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज को बताया कि सुरक्षाबलों ने मादुरो को एक युद्धपोत पर बंधक बनाकर रखा है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने बताया था कि मादुरो को अमेरिका लाया जाएगा, जहां उन पर कानून के तहत मुकदमा चलेगा।
अन्य वीडियो