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Pakistan Crisis: कितना झेलेगा पाकिस्तान- आर्थिक मुसीबत, राजनीतिक टकराव के साथ अब संवैधानिक संकट
Fri, 24 Mar 2023 07:15 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 24 Mar 2023 07:15 PM IST
सार
बुधवार को अचानक निर्वाचन आयोग ने देश की खराब आर्थिक हालत और आईएमएफ की शर्त का बहाना बनाते हुए चुनाव अगले आठ अक्तूबर तक स्थगित करने का एलान कर दिया। अब आईएमएफ ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर इस बात का खंडन किया है कि उसने ऋण की नई किस्तें देने के बदले चुनाव स्थगित करने की शर्त लगाई थी।
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शहबाज शरीफ, आईएमएफ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तान में निर्वाचन आयोग ने दो प्रांतों की असेंबलियों का चुनाव टाल कर देश को एक बड़े संवैधानिक संकट में डाल दिया है। जिस समय देश गहरी आर्थिक मुसीबत और राजनीतिक टकराव के दौर में है, इस संवैधानिक संसट से पूरी शासन व्यवस्था के लिए कठिन चुनौती खड़ी हो गई है। इस बीच आयोग का यह झूठ भी बेनकाब हो गया है कि उसने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की शर्तों के कारण चुनाव टालने का फैसला लिया।
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पंजाब और खैबर पख्तूनवा प्रांतों में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) समर्थित सरकारें थीं। देश में जल्द आम चुनाव की मांग पर जोर डालने के लिए पीटीआई ने बीते जनवरी में प्रांतीय असेंबलियां भंग करा ली थीं। पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक किसी सदन के भंग होने पर 90 दिन के अंदर उसके लिए नया चुनाव कराना अनिवार्य है। लेकिन निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम के एलान में टाल-मटोल कर रहा था। तब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पहल पर (सुओ मुटो) मामले में दखल दिया और 30 अप्रैल तक चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया था। उसके बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई।
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अब बुधवार को अचानक निर्वाचन आयोग ने देश की खराब आर्थिक हालत और आईएमएफ की शर्त का बहाना बनाते हुए चुनाव अगले आठ अक्तूबर तक स्थगित करने का एलान कर दिया। अब आईएमएफ ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर इस बात का खंडन किया है कि उसने ऋण की नई किस्तें देने के बदले चुनाव स्थगित करने की शर्त लगाई थी। उसने कहा है कि अपने खर्चों की प्राथमिकता तय करने या नए टैक्स लगा कर संसाधन जुटाने का अधिकार पाकिस्तान सरकार के पास है। आईएमएफ की पाकिस्तान स्थित प्रतिनिधि एस्तर पेरेज रुइज ने एक बयान में कहा कि आईएमएफ के ऋण प्रोग्राम में ऐसी कोई शर्त नहीं है, जो पाकिस्तान के अपनी संवैधानिक गतिविधियां जारी रखने में हस्तक्षेप करती हो।
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इस बीच पीटीआई ने निर्वाचन आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का एलान किया है। यह संभावना भी जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट अपनी पहल पर इस मामले में फिर दखल दे सकता है। कुछ वकीलों ने सलाह दी है कि चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल को इस मामलें में सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों की बेंच बनानी चाहिए।
निर्वाचन आयोग के इस कदम को कई विधि विशेषज्ञों ने संविधान का खुला उल्लंघन बताया है। जाने-माने वकील हाफिज अहसान अहमद खोखर ने संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि इस तरह चुनाव टालना संविधान का उल्लंघन है। यह कदम उठा कर निर्वाचन आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र का भी उल्लंघन किया है।
पीटीआई ने कहा है कि इस कदम के बाद निर्वाचन आयोग की रही-सही साख भी खत्म हो गई है। पीटीआई पहले से यह आरोप लगाती रही है कि निर्वाचन आयोग सत्ताधारी गठबंधन के निर्देश पर काम कर रहा है। इमरान खान ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी की एक विशेष बैठक बुलाई। उसके बाद पार्टी के महसाचिव असद उमर ने पत्रकारों को बताया कि पीटीआई इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने कहा- चुनाव को स्थगित कर निर्वाचन आयोग ने संविधान का उल्लंघन किया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ है।