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अफगानिस्तान में तालिबान ने इतनी आसानी से कैसे कर लिया कब्जा, अब बाइडन प्रशासन में इस पर माथापच्ची

Fri, 20 Aug 2021 06:09 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 20 Aug 2021 06:09 PM IST
सार

पिछले हफ्ते जब राष्ट्रपति जो बाइडन कैंप डेविड में थे, तब वहां का एक फोटो मीडिया में छपा था। उसमें राष्ट्रपति अकेले दिख रहे थे। उनके आलोचकों ने उस तस्वीर को इस बात का संकेत बताया कि अपने प्रशासन की टीम के बीच बाइडन अकेले पड़ गए हैं...

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How did the Taliban captured so easily in Afghanistan, now the Biden administration finding the reason
जो बाइडन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

अफगानिस्तान से अनियोजित ढंग से सेना वापस बुलाने के फैसले के हुए दुष्परिणामों के बाद अब जो बाइडन प्रशासन उसके राजनीतिक नुकसान को संभालने में जुट गया है। आशंका है कि अफगानिस्तान की घटनाओं का अमेरिका के भीतर डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर बुरा असर होगा। अब बाइडन प्रशासन के अधिकारी देश को आश्वस्त करने में जुटे हैं कि अफगानिस्तान में हाथ लगी नाकामी से सहयोगी देशों का अमेरिकी क्षमता में भरोसा कम नहीं होगा। ऐसे कई बयान दिए गए हैं, जिनमें बताया गया कि बाइडन प्रशासन अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने इस तरफ भी ध्यान खींचा है कि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के दोनों के सदस्यों का भारी बहुमत अफगानिस्तान से फौज वापसी के फैसले का समर्थक रहा है।

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पिछले हफ्ते जब राष्ट्रपति जो बाइडन कैंप डेविड में थे, तब वहां का एक फोटो मीडिया में छपा था। उसमें राष्ट्रपति अकेले दिख रहे थे। उनके आलोचकों ने उस तस्वीर को इस बात का संकेत बताया कि अपने प्रशासन की टीम के बीच बाइडन अकेले पड़ गए हैं। वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम के मुताबिक इस छवि को तोड़ने के लिए इस हफ्ते व्हाइट हाउस ने एक तस्वीर जारी की, जिसमें राष्ट्रपति के साथ उनकी पूरी सुरक्षा टीम बैठी हुई है।
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राष्ट्रपति जो बाइडन ने अब तक जो एक बात साफ की है, वह ये है कि अफगानिस्तान से सेना वापस बुलाने के फैसले को लेकर उनके मन में कोई दुविधा नहीं है। बल्कि अब उन्होंने कहा है कि अगर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी 2020 में तालिबान के साथ सैन्य वापसी के मसले पर समझौता नहीं किया होता, तब भी वे अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान से वापस बुला लेते। टीवी चैनल एनबीसी की वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण में कहा गया है कि बाइडन के इस आत्म-विश्वास का कारण अमेरिकी जनमत है। अमेरिका के ज्यादातर लोग लगातार युद्ध से थक चुके हैं। वे युद्ध क्षेत्रों से अमेरिकी फौज वापसी की मांग लगातार करते रहे हैं।

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याहू न्यूज के एक ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक 40 फीसदी लोगों ने सैन्य वापसी का समर्थन किया, जबकि सिर्फ 28 फीसदी ने विरोध किया। हालांकि इसी सर्वे में जुलाई में सैन्य वापसी के समर्थकों की संख्या 50 फीसदी रही थी। उधर एक मॉर्निंग कंसल्ट/पॉलिटिको सर्वे में देखा गया कि अभी 49 फीसदी लोग सैन्य वापसी के फैसले के साथ हैं, जबकि 37 प्रतिशत इसके खिलाफ हैं। लेकिन अप्रैल में समर्थकों की संख्या 69 फीसदी थी।

विश्लेषकों ने इस सर्वेक्षण के नतीजों के आधार पर कहा है कि अभी बने प्रतिकूल माहौल के कारण सैन्य वापसी के समर्थकों की संख्या गिरी है। लेकिन अभी भी ज्यादातर लोग राष्ट्रपति बाइडन के निर्णय का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी की ये उम्मीद सही है कि मौजूदा माहौल बदलते ही समर्थकों की संख्या और बढ़ जाएगी।   

फिलहाल, बाइडन प्रशासन से कठिन प्रश्न पूछे जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर तालिबान दो या तीन महीने बाद काबुल पर कब्जा करता, तो ये सवाल नहीं उठता। लेकिन राष्ट्रपति बाइडन के तमाम अनुमानों को गलत ठहराते हुए उसने जितनी तेजी से उसने पूरे देश पर कब्जा जमा लिया, उससे अफगानिस्तान में 20 साल तक अमेरिकी फौज की मौजूदगी कठघरे में खड़ी हो गई है।

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