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Hormuz Crisis: होर्मुज संकट के बीच भारत की कूटनीतिक जीत, जोखिम के बीच अब तक तेल और गैस से भरे 9 जहाज निकाले

Sun, 05 Apr 2026 04:24 AM IST
Shubham Kumar अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: Shubham Kumar Updated Sun, 05 Apr 2026 04:24 AM IST
सार

होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव और नाकेबंदी के बीच, जहां दुनिया की 20% तेल सप्लाई दांव पर है, भारत ने कूटनीति और रणनीति का दम दिखाया। ईरान से रिश्तों के सहारे भारत अब तक तेल और गैस से भरे नौ जहाज सुरक्षित निकाल चुका है। इनमें से आठ भारत पहुंच चुके हैं। सबसे पहले एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित पार कराकर भारत ने संकट में अपनी मजबूत वैश्विक स्थिति भी साबित की।

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Hormuz Crisis India Diplomatic Triumph Amidst the Crisis 9 Oil and Gas Tankers Safely Evacuated So Far Amidst
होर्मुज का रास्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है। इससे खाड़ी देशों से गैस और तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आग लगी है। लेकिन, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने इस जोखिम भरे रास्ते से तेल और गैस से भरे सबसे अधिक जहाज सुरक्षित निकाले हैं। होर्मुज फारस और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है। ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज जलमार्ग एक जगह मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को शेष दुनिया से जोड़ता है।

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इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल का नौवहन होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल की ओर से हमला किए जाने के बाद ईरान ने इस मार्ग की नाकेबंदी कर दी है। कुछ तेल टैंकरों को ईरान ने निशाना भी बनाया है। लेकिन ईरान से अपने ऐतिहासिक संबंधों और मजबूत कूटनीति के जरिये भारत होर्मुज के रास्ते अब तक तेल और गैस से भरे 9 जहाज सुरक्षित निकाल लाने में सफल रहा है। इनमें से 8 जहाज भारतीय तट पर पहुंच गए हैं, जबकि एक पहुंचने वाला है।
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सबसे पहले जहाज पार कराया था
पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत ने सबसे पहले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलिमय गैस (एलपीजी) से भरे दो जहाजों को होर्मुज पार कराया था। शिवालिक और नंदा देवी नामक इन दोनों टैंकरों को ईरान की नौसेना ने ही अपनी सुरक्षा में होर्मुज को पार कराा था। हालांकि, भारत ने भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पोत तैनात कर रखे हैं। शिवालिक और एमटी नंदा देवी 92,712 टन एलपीजी लेकर आए थे। शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और नंदा देवी उसके अगले दिन 17 मार्च को गुजरात के ही कांडला बंदरगाह पहुंचा था।

जग लाडकी से जगत वसंत तक, भारत पहुंचे कई जहाज
जग लाडकी संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चा तेल लेकर 18 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। इसके बाद पाइन गैस और जग वसंत 92,612 टन एलपीजी लेकर 26 और 28 मार्च को भारत पहुंचे थे। 94,000 टन एलपीजी लेकर बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम भी आए हैं। बीडब्ल्यू टीवाई 31 मार्च को मुंबई और बीडब्ल्यू ईएलएम 1 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि लगभग 44,000 टन एलपीजी लेकर सी बर्ड 2 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। यह ईरान से एलपीजी लेकर आया है। सात साल में पहली बार भारत ने ईरान से गैस खरीदा है। 

ईरान के साथ भुगतान की समस्या नहीं कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित 
केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान संबंधी कोई समस्या नहीं है और रिफाइनरियां तेहरान के साथ दुनियाभर के विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से तेल हासिल कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन खबरों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर अपने पहले से संकेतित गंतव्य भारत के बजाय चीन की ओर मुड़ गया है।


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मंत्रालय ने साफ किया सरकार का रुख
मंत्रालय ने कहा कि ये दावे उद्योग के उस सामान्य अभ्यास की अनदेखी करते हैं, जहां परिचालन लचीलेपन के आधार पर यात्रा के दौरान कार्गो अपना गंतव्य बदल सकते हैं। यदि यह खेप भारत आती, तो लगभग सात वर्षों में ऐसी पहली खेप होती।  मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया कि भुगतान बाधाओं के कारण कार्गो को गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन की ओर मोड़ा गया था। मंत्रालय ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया, भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने का पूर्ण लचीलापन है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान सहित अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सुरक्षित कर लिया है। जहाजों पर नजर रखने वाली फर्म केपलर ने शुक्रवार को कहा था कि 2002 में निर्मित और 2025 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर पिंग शुन अब गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन के डोंगयिंग को अपना गंतव्य बता रहा है।

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