हांगकांग : चेतावनी के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने संसद का किया घेराव
- हांगकांग में प्रशासन की चेतावनी के बावजूद संसद के बाहर प्रदर्शन।
- पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें डाली और आंसू गैस के गोले छोड़े।
- तीन महीने से जारी राजनीतिक गतिरोध के चलते यहां हिंसक झड़पें हो रही हैं।
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हांगकांग में प्रशासन की चेतावनी के बावजूद लोकतंत्र समर्थक शनिवार को संसद के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें डाली और आंसू गैस के गोले छोड़े।
तीन महीने से जारी राजनीतिक गतिरोध के चलते यहां हिंसक झड़पें हो रही हैं। इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा कारणों से प्रदर्शनों पर रोक लगाते हुए लोगों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग काले रंग की टी-शर्ट पहनकर सड़कों पर उतरे और ट्रैफिक रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों ने ‘रिक्लेम हांगकांग। रिवोल्यूशन ऑफ आवर टाइम्स’ के नारे लगाए। दोपहर में तनाव की स्थिति तब पैदा हुई जब प्रदर्शनकारियों ने संसद ‘लेजिस्लेटिव काउंसिल’ पर लगे बैरिकैड पर पथराव किया, आग लगा दी और लेजर पेन को चमकाया। पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें डालीं।
प्रदर्शनों के बीच चीन ने सैनिकों की 22वीं टुकड़ी को भेजा
हांगकांग में आजादी की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन लंबे अर्से से जारी है। इससे निपटने के लिए चीन पहले ही अपनी सेना को अभ्यास के लिए भेज चुका है। गुरुवार को चीनी सेना ने कहा कि उसने सैनिकों की एक नई टुकड़ी हांगकांग रवाना कर दी है। चीनी सेना ने इसे एक नियमित प्रक्रिया बताया है, लेकिन चीन ने यह कदम हांगकांग में नई रैलियों की योजना के बीच उठाया है।
चीन के सरकारी मीडिया ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें बख्तरबंद गाड़ियां और कई वाहन हांगकांग सीमा में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं। हांगकांग में चल रहा प्रदर्शन अब इतना तेज हो गया है कि उससे चीन बेहद परेशान है और इसे देखते हुए ही चीन ने एक बार फिर प्रदर्शनकारियों में खौफ पैदा करने के लिए अपनी सेना को वहां उतारा है।
संवाद समिति शिन्हुआ ने कहा कि 1997 से हांगकांग की रक्षा करने वाली चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने गुरुवार सुबह तक 22वां ‘रोटेशन’ (सैनिकों की बारी) पूरा कर लिया। बताया जा रहा है कि चीन इन दिनों हांगकांग में कोई भी बड़ी कार्रवाई की योजना बना रहा है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों मेें सेना की बड़ी टुकड़ियां यहां भेजी गई हैं।