{"_id":"5db003ae8ebc3e01557e8644","slug":"hong-kong-legislature-officially-withdraws-controversial-extradition-bill-after-months-of-protests","type":"story","status":"publish","title_hn":"महीनों प्रदर्शन के बाद हांगकांग ने वापस लिया विवादित प्रत्यर्पण विधेयक","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
महीनों प्रदर्शन के बाद हांगकांग ने वापस लिया विवादित प्रत्यर्पण विधेयक
Wed, 23 Oct 2019 01:09 PM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
Published by: Sneha Baluni
Updated Wed, 23 Oct 2019 01:09 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हांगकांग की विधायिका ने आधिकारिक तौर पर विवादित प्रत्यर्पण विधेयक को वापस ले लिया है। इस विधेयक के विरोध में वहां महीनों से प्रदर्शन हो रहे हैं। यह जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी।
विज्ञापन
Hong Kong legislature officially withdraws controversial extradition bill after months of protests: Local Media pic.twitter.com/JvEE83Cfph
— ANI (@ANI) October 23, 2019विज्ञापन
क्या था कानून?
इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हांगकांग आ जाता है को उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेजा जा सकता। हांगकांग की सरकार इस मौजूदा कानून में संशोधन के लिए फरवीर में प्रस्ताव लाई थी। कानून में संशोधन का प्रस्ताव एक घटना के बाद लाया गया। जिसमें एक व्यक्ति ने ताइवान में अपनी प्रमिका की कथित तौर पर हत्या कर दी और हांगकांग वापस आ गया था।
विज्ञापन
हांगकांग की अगर बात की जाए तो यह चीन का एक स्वायत्त द्वीप है। चीन इसे अपने संप्रभु राज्य का हिस्सा मानता है। वहीं हांगकांग की ताइवान के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जिसके कारण हत्या के मुकदमे के लिए उस व्यक्ति को ताइवान भेजना मुश्किल है।
अगर ये कानून पास हो जाता तो इससे चीन को उन क्षेत्रों में संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति मिल जाती, जिनके साथ हांगकांग के समझौते नहीं हैं। जैसे संबंधित अपराधी को ताइवान और मकाऊ भी प्रत्यर्पित किया जा सकता।
हांगकांग के लोग इस कानून का जमकर विरोध कर रहे थे। वो सरकार द्वारा कानून को निलंबित किए जाने के बाद भी नहीं थमे, उनका कहना था कि इसे पूरा तरह से खत्म कर दिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोगों का मानना है कि अगर ये कानून कभी भी पास होता है तो हांगकांग के लोगों पर चीन का कानून लागू हो जाएगा। जिसके बाद चीन मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में ले लेगा और उन्हें यात्नाएं देगा।
लोगों को अब हांगकांग सरकार पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा है। बीते कुछ सालों से सरकार के लिए लोगों में अविश्वास काफी बढ़ गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो बीजिंग के प्रभाव में आकर फैसले ले रही है। जिसके चलते लोग डरे हुए हैं कि बीजिंग गलत तरीके से इस कानून का लोगों के खिलाफ इस्तेमाल करेगा।