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शर्मनाक: पाकिस्तान में हिंदू बच्चों को जबरन धर्मांतरण का बना रहे शिकार, खुद के ही आयोग की रिपोर्ट में खुलासा

Mon, 11 Aug 2025 05:06 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 11 Aug 2025 05:06 AM IST
सार

एनसीआरसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदायों की बच्चियों का अपहरण करके उनका जबरन धर्म परिवर्तन कर दिया जाता है और उनकी बड़ी उम्र के मुस्लिम पुरुषों के साथ जबन शादी करा दी जाती है। ऐसी घटनाएं एक-दो नहीं होतीं, बल्कि यह एक निरंतर प्रथा बन गई है। 

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Hindu children in Pakistan being made victims of forced conversion, revealed in report of its own commission
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : फ्रीपिक।

विस्तार

पाकिस्तान में हिंदू समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को जबरन धर्मांतरण का शिकार बनाया जा रहा है। मासूमों का व्यवस्थित व संस्थागत तरीके से शोषण किया जा रहा है। धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया जाता है और ऐसा नहीं करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। इसका खुलासा पाकिस्तान के ही राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (एनसीआरसी) की हालिया रिपोर्ट में हुआ है।

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एनसीआरसी की एक नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बच्चों, खासकर ईसाइयों व हिंदुओं के साथ व्याप्त गहरे तथा व्यापक भेदभाव को उजागर किया है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक धर्मों के बच्चों की स्थिति का विश्लेषण शीर्षक यह रिपोर्ट व्यवस्थागत पूर्वाग्रह, संस्थागत उपेक्षा और लक्षित दुर्व्यवहार की एक गंभीर तस्वीर पेश करती है। क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल के अनुसार, रिपोर्ट हजारों हिंदू व ईसाई बच्चों, जबरन धर्मांतरण, बाल विवाह व बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, के लिए रोजमर्रा की सच्चाई पर आधारित है और गंभीर चुनौतियों को बयां करती है।
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बच्चियों का अपहरण कर मुस्लिम पुरुषों से करा दी जाती है शादी
एनसीआरसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदायों की बच्चियों का अपहरण करके उनका जबरन धर्म परिवर्तन कर दिया जाता है और उनकी बड़ी उम्र के मुस्लिम पुरुषों के साथ जबन शादी करा दी जाती है। ऐसी घटनाएं एक-दो नहीं होतीं, बल्कि यह एक निरंतर प्रथा बन गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संस्थागत पूर्वाग्रह, कानून प्रवर्तन की कमी और भारी जन दबाव के कारण पीड़ितों के पास कुछ ही कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
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देश के सबसे बड़े प्रांत पंजाब में हालात सबसे विकट
अप्रैल 2023 से दिसंबर 2024 तक, एनसीआरसी को हत्या, अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन व नाबालिगों की शादी से जुड़ी 27 आधिकारिक शिकायतें मिलीं।  देश के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत पंजाब में स्थिति सबसे विकट है। यहां जनवरी 2022 और सितंबर 2024 के बीच अल्पसंख्यक बच्चों के खिलाफ कुल रिपोर्ट की गई हिंसा की 40 प्रतिशत घटनाएं हुईं। रिपोर्ट में उल्लिखित पुलिस के ब्योरे से पता चलता है कि पीड़ितों में 547 ईसाई, 32 हिंदू, दो अहमदिया और दो सिख शामिल थे।

बच्चों को स्कूलों में भी करना पड़ता है भेदभाव का सामना
एनसीआरसी की रिपोर्ट एकल राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की आलोचना करते हुए कहती है कि इसमें धार्मिक समावेश का अभाव है। ईसाई और हिंदू छात्रों को अपनी आस्था के विपरीत इस्लामी विषय पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अल्पसंख्यक छात्रों को स्कूलों में सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे कक्षाओं में आगे बैठने, प्रश्न पूछने या यहां तक कि साझा गिलास से पानी पीने में भी हिचकिचाते हैं। उनकी मान्यताओं का मजाक उड़ाया जाता है और ईश्वरीय पुरस्कार पाने के लिए उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए कहा जाता है।


कराई जाती है बंधुआ मजदूरी
रिपोर्ट बंधुआ मजदूरी की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है, जहां हिंदू व ईसाई बच्चे अक्सर ईंट भट्टों या कृषि कार्यों में जबरन मजदूरी के दुष्चक्र में फंस जाते हैं। उनके परिवार पहले से ही पीढ़ी दर पीढ़ी गरीबी और भेदभाव के बोझ तले दबे हैं। राज्य से उन्हें सुरक्षा नहीं मिलती। एनसीआरसी की अध्यक्ष आयशा रजा फारूक ने स्वीकार किया कि विखंडित प्रयासों, समन्वय की कमी व सीमित राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण बच्चों की स्थिति में प्रगति निराशाजनक रही है।

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