फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Hezbollah, a terrorist organisation with one lakh fighters loyal to Shia Muslims affect on israel hamas war

Hezbollah: एक लाख लड़ाकों वाला आतंकी संगठन हिजबुल्ला शिया मुसलमानों का वफादार, लेबनान की राजनीति में भी दबाव

Mon, 09 Oct 2023 06:17 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला रिसर्च डेस्क
अमर उजाला रिसर्च डेस्क Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 09 Oct 2023 06:17 AM IST
सार

साल 2012 में हिजबुल्ला को सीरिया में तैनात कर सुन्नी मुसलमानों से लड़ रहे वहां के राष्ट्रपति बशर अल असद को मदद दी गई थी। 2021 में इसके मुखिया सैयद हसन नसरुल्ला ने संगठन में 1 लाख सदस्य होने का दावा किया।
 

विज्ञापन
Hezbollah, a terrorist organisation with one lakh fighters loyal to Shia Muslims affect on israel hamas war
इस्त्रायली विमान, सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Social media

विस्तार

लेबनान में सक्रिय आतंकी संगठन हिजबुल्ला अचानक इस्राइल-हमास युद्ध में कूद पड़ा है। उसने भी रविवार को इस्राइली सैन्य ठिकानों पर हमले किए, खुद को फिलिस्तीनियों के साथ बताया। आशंका बढ़ गई है कि हिजबुल्ला इस्राइल के खिलाफ युद्ध का नया मोर्चा खड़ा कर सकता है। हिजबुल्ला एक शिया आतंकी संगठन है, जिसे ईरान समर्थन और सहयोग देता है। इसे 1975 से 90 तक चले लेबनान गृहयुद्ध की उपज माना जाता है।
विज्ञापन


1982 में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इसकी स्थापना की। इसका लक्ष्य ईरान में हुई इस्लामी क्रांति दूसरे देशों में फैलाना और लेबनान में लड़ रही इस्राइली सेना के खिलाफ एक संगठन खड़ा करना था। आज दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों पर इसका नियंत्रण है। अमेरिका, सऊदी अरब सहित कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है।
विज्ञापन


2021 में 1 लाख क्षमता बताई
साल 2012 में हिजबुल्ला को सीरिया में तैनात कर सुन्नी मुसलमानों से लड़ रहे वहां के राष्ट्रपति बशर अल असद को मदद दी गई थी। 2021 में इसके मुखिया सैयद हसन नसरुल्ला ने संगठन में 1 लाख सदस्य होने का दावा किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


युद्ध और हमले
2006 में हिजबुल्ला आतंकियों ने इस्राइल की सीमा में घुसपैठ कर 5 सप्ताह का युद्ध लड़ा। इस दौरान उसने लेबनान में 1200 और इस्राइल में 158 हत्याएं की। इस्राइल पर हजारों रॉकेट भी दागे। वहीं सऊदी अरब का दावा है कि यमन में भी यह आतंकी संगठन उसके खिलाफ काम कर रहा है। 2005 में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफीक अल हरीरी की हत्या के बाद हिजबुल्ला के सहयोगी ने सीरिया में वापसी की। इसके बाद राजनीति में उतरा, लेबनान की सरकार को अमेरिका और सऊदी अरब समर्थक बताकर 2008 में राजधानी बेरुत के कुछ हिस्सों पर कब्जा किया। 2018 में हिजबुल्ला गठबंधन ने संसद में बहुमत हासिल किया। हालांकि 2022 में उसे हार मिली।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed