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शांगरी-ला संवाद: 'रक्षा खर्च बढ़ाएं एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सहयोगी देश', अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ की अपील
Sun, 31 May 2026 07:25 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 31 May 2026 07:25 PM IST
सार
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों से रक्षा खर्च और सैन्य क्षमता बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए केवल बातचीत नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य ताकत और मजबूत साझेदारी जरूरी है। पढ़िए रिपोर्ट-
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पीट हेगसेथ, अमेरिकी रक्षा मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/पीट हेगसेथ
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विस्तार
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि इन देशों को चीन के बढ़ते प्रभाव और सैन्य विस्तार को देखते हुए उन्हें अपने रक्षा खर्च और सैन्य तैयारियों को बढ़ाना चाहिए। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
हेगसेथ ने सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला संवाद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए मजबूत प्रतिरोध क्षमता, गहरी सुरक्षा साझेदारी और सहयोगी देशों के अधिक योगदान की जरूरत है।
मॉडर्न डिप्लोमेसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि केवल सुरक्षा बैठकों और चर्चाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि देशों को जहाज, पनडुब्बी और रक्षा प्रणालियों जैसी वास्तविक सैन्य क्षमताओं पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसा मजबूत सहयोगी नेटवर्क बनाना जरूरी है, जो किसी भी आक्रामकता को रोक सके और शक्ति संतुलन बनाए रख सके।
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'जीडीपी का 3.5 फीसदी खर्च करें सहयोगी देश'
हेगसेथ ने कहा, अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 3.5 फीसदी रक्षा पर खर्च करें, जबकि खुद अमेरिका करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर सैन्य क्षमता पर निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सामूहिक रक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
'अपनी सुरक्षा जिम्मेदारी खुद उठाएं अमीर सहयोगी देश'
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विचार को भी दोहराया, जिसमें कहा गया है कि अमीर सहयोगी देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, अब वह समय खत्म हो रहा है, जब अमेरिका समृद्ध देशों की रक्षा का खर्च उठाता था। अब सहयोगी देशों को अधिक योगदान देना होगा।
'केवल बातचीत नहीं, संसाधनों की भी जरूरत'
उन्होंने यह भी कहा, एशिया-प्रशांत क्षेत्र को केवल बातचीत नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य क्षमता और संसाधनों की जरूरत है। उन्होंने कहा, क्षेत्र के देश स्थिरता चाहते हैं और अमेरिका को मजबूती और अनुशासित नेतृत्व दिखाना होगा, ताकि शांति बनी रहे। हेगसेथ ने चीन के सैन्य विस्तार पर चिंता जताई। हालांकि, उन्होंने कहा कि वाशिंगटन और बीजिंग के बीच सैन्य संवाद हाल के महीनों में बेहतर हुआ है। इससे तनाव का प्रबंधन करने में मदद मिली है।
वहीं, चीनी प्रतिनिधि झोउ बो ने कहा कि हेगसेथ के बयान पहले की तुलना में अधिक संतुलित हैं। इससे दोनों देशों के बीच संवाद के माध्यम खुले रखने में मदद मिली है।
ये भी पढ़ें: भारत दौरे पर आएंगी ब्रिटिश विदेश मंत्री, वैश्विक चुनौतियों के बीच रणनीतिक सहयोग पर होगी चर्चा
जापान जैसे सहयोगी देशों की सराहना की
हेगसेथ ने जापान जैसे सहयोगियों की भी सराहना की और कहा कि वे अमेरिका के साथ मिलकर रक्षा सहयोग और सैन्य तैयारी को मजबूत कर रहे हैं। पश्चिम एशिया के मुद्दे पर उन्होंने कहा, अगर कूटनीति विफल होती है तो अमेरिका ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। ताइवान के मुद्दे पर उन्होंने सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और हथियार बिक्री पर अंतिम निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का होता है।
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हेगसेथ ने सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला संवाद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए मजबूत प्रतिरोध क्षमता, गहरी सुरक्षा साझेदारी और सहयोगी देशों के अधिक योगदान की जरूरत है।
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मॉडर्न डिप्लोमेसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि केवल सुरक्षा बैठकों और चर्चाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि देशों को जहाज, पनडुब्बी और रक्षा प्रणालियों जैसी वास्तविक सैन्य क्षमताओं पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसा मजबूत सहयोगी नेटवर्क बनाना जरूरी है, जो किसी भी आक्रामकता को रोक सके और शक्ति संतुलन बनाए रख सके।
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'जीडीपी का 3.5 फीसदी खर्च करें सहयोगी देश'
हेगसेथ ने कहा, अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 3.5 फीसदी रक्षा पर खर्च करें, जबकि खुद अमेरिका करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर सैन्य क्षमता पर निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सामूहिक रक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
'अपनी सुरक्षा जिम्मेदारी खुद उठाएं अमीर सहयोगी देश'
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विचार को भी दोहराया, जिसमें कहा गया है कि अमीर सहयोगी देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, अब वह समय खत्म हो रहा है, जब अमेरिका समृद्ध देशों की रक्षा का खर्च उठाता था। अब सहयोगी देशों को अधिक योगदान देना होगा।
'केवल बातचीत नहीं, संसाधनों की भी जरूरत'
उन्होंने यह भी कहा, एशिया-प्रशांत क्षेत्र को केवल बातचीत नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य क्षमता और संसाधनों की जरूरत है। उन्होंने कहा, क्षेत्र के देश स्थिरता चाहते हैं और अमेरिका को मजबूती और अनुशासित नेतृत्व दिखाना होगा, ताकि शांति बनी रहे। हेगसेथ ने चीन के सैन्य विस्तार पर चिंता जताई। हालांकि, उन्होंने कहा कि वाशिंगटन और बीजिंग के बीच सैन्य संवाद हाल के महीनों में बेहतर हुआ है। इससे तनाव का प्रबंधन करने में मदद मिली है।
वहीं, चीनी प्रतिनिधि झोउ बो ने कहा कि हेगसेथ के बयान पहले की तुलना में अधिक संतुलित हैं। इससे दोनों देशों के बीच संवाद के माध्यम खुले रखने में मदद मिली है।
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जापान जैसे सहयोगी देशों की सराहना की
हेगसेथ ने जापान जैसे सहयोगियों की भी सराहना की और कहा कि वे अमेरिका के साथ मिलकर रक्षा सहयोग और सैन्य तैयारी को मजबूत कर रहे हैं। पश्चिम एशिया के मुद्दे पर उन्होंने कहा, अगर कूटनीति विफल होती है तो अमेरिका ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। ताइवान के मुद्दे पर उन्होंने सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और हथियार बिक्री पर अंतिम निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का होता है।