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Pakistan: जोरदार बारिश ने पाकिस्तान में ताजा कर दी हैं पिछले साल की डरावनी यादें

Thu, 13 Jul 2023 02:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 13 Jul 2023 02:54 PM IST
सार

जलवायु परिवर्तन मामलों की मंत्री शेरी रहमान ने कहा है- ‘शहरों और नगरपालिका इलाकों में पानी भरने संबंधी चेतावनी जारी कर दी गई है। जमीन धंसने का भी खतरा है। सावधानी और पूर्व कार्रवाई से जाने बचाई जा सकती हैं, इसलिए राहत टीमों को सतर्क रहना चाहिए।’

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Heavy rains have revived the horrors of last year in Pakistan
Pakistan flood - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से हो रही जोरदार बारिश ने लोगों के मन में पिछले साल की डरावनी यादें ताजा कर दी हैं। पिछले साल ऐसी बारिश के कारण आई बाढ़ से जो नुकसान हुआ, उसकी मरम्मत और भरपाई आज तक नहीं की जा सकी है।

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पिछले साल बाढ़ और जल जमाव से प्रभावित हुए कई इलाकों में इस बार भी हाल में तेज बारिश हुई है। कई जगहों पर बादल फटने की घटनाएं भी हुई हैं। पाकिस्तान के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक जून के आखिरी हफ्ते से लेकर अब तक मानसून के कहर से 80 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है, जबकि 140 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। कई इलाकों में लोग जल जमाव के कारण घिरे हुए हैं। अथॉरिटी के मुताबिक दस लाख से ज्यादा लोगों पर तेज बारिश का खराब असर पड़ चुका है।

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लाहौर स्थित पर्यावरणवादी वकील अहमद रफे आलम ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘मानसून सीजन अभी शुरू ही हुआ है। असली विनाश तो अभी बाकी है।’ पिछले दिनों लाहौर में तेज बारिश का रिकॉर्ड बना। पाकिस्तान सरकार ने भी स्वीकार किया है कि हालात गंभीर हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन मामलों की मंत्री शेरी रहमान ने कहा है- ‘शहरों और नगरपालिका इलाकों में पानी भरने संबंधी चेतावनी जारी कर दी गई है। जमीन धंसने का भी खतरा है। सावधानी और पूर्व कार्रवाई से जाने बचाई जा सकती हैं, इसलिए राहत टीमों को सतर्क रहना चाहिए।’

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पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट में फंसा हुआ है। इस बीच उस पर कुदरत की भी मार पड़ रही है। पिछले साल आई बाढ़ में 1,700 से अधिक लोगों की जान गई थी, जबकि लाखों मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। लाखों पशु मर गए थे। इस आपदा में 30 बिलियन डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था। बाद में जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन ने कहा था कि यह आपदा जलवायु परिवर्तन के कारण आई।     

अब उन दिनों को याद कर लोग डरे हुए हैं। गैर-सरकारी संस्था वॉटर एनवायरनमेंट फोरम के सदस्य अली तौकीर शेख ने ध्यान दिलाया है कि इस बार जून एतिहासिक रूप से पूरी दुनिया में सबसे गर्म महीना रहा। उन्होंने कहा- ‘पाकिस्तान के अलावा चीन और भारत में भी इस मौसम का खराब असर देखने को मिला है।’

पाकिस्तान के बाढ़ अनुमान विभाग ने भविष्यवाणी की है कि आने वाले दिनों में रावी नदी की बाढ़ का पानी लाहौर शहर में घुस सकता है। तौकीर शेख ने कहा- ‘रावी नदी में लंबे समय से बाढ़ नहीं आई है। इसका तट सूख गया है, जिस पर हाउजिंग सोसाटीज ने कब्जा कर लिया है। वहां गैर कानूनी निर्माण कर लिए गए हैं। अगर रावी नदी में बाढ़ आई, तो उन इलाकों में बड़ी तबाही हो सकती है।’


लोगों का अंदेशा यह है कि इस बार की बाढ़ अधिक भयावह हो सकती है, क्योंकि पिछले साल बाढ़ रोकने वाले निर्माण टूट गए थे, इसलिए इस बार पानी को निर्बाध रास्ता मिलेगा।

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