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एफएटीएफ पर फैसला आने के बाद रिहा हो सकता है आतंकी हाफिज सईद: सूत्र

वर्ल्ड डेस्क, लाहौर Updated Sat, 15 Feb 2020 10:51 AM IST
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hafiz saeed
hafiz saeed - फोटो : ANI
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मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज मोहम्मद सईद फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के फैसले के बाद रिहा हो सकता है। समाचार एजेंसी एएनआई ने जानकार सूत्रों के हवाले से बताया है कि हाफिज की गिरफ्तारी के लिए दिए आदेश में जानबूझकर खामियां छोड़ी गईं हैं, जिससे वह कभी भी रिहा हो सकता है। हाफीज के वकील ने कहा है कि वे इस फैसले को लाहौर हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

16 फरवरी से पेरिस में एफएटीएफ की होगी बैठक

16 फरवरी से पेरिस में होने वाली एफएटीएफ की बैठक यह तय होगा कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने पर पाकिस्तान को आखिरकार ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए या नहीं। मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड के वकील ने कहा कि वे लाहौर हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। डॉन अखबर के मुताबिक सईद के वकील का तर्क है कि सईद को एफएटीएफ की बैठक से पहले इसके दबाव में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा उसे गिरफ्तार करने की कोई और वजह नहीं है। 

सईद के खिलाफ कार्रवाई खड़े कर रही सवाल

डॉन के मुताबिक हाफिज के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात उद दावा विदेश के अलावा देश में भी अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की है। जमात-उद-दावा के नेतृत्व वाले लश्कर ने अफगान तालिबान और अलकायदा के साथ-साथ पंजाबी तालिबान में विकसित होने वाले तत्वों के साथ संबंध बनाए रखे हैं। इन मामलो को देखते हुए यह स्वागत योग्य कदम है कि सईद को जेल भेज दिया गया है। एक और प्रमुख बिंदु यह है कि पाकिस्तान में आतंकवादी समूहों पर मुकदमा चलाए जाने के बाद भी इनके नेता और कैडर नियमित रूप से काम करते हैं, जो सईद के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल खड़ा करती है।

पाकिस्तान सेना करती है आतंकियों का इस्तेमाल

जानकार सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान सेना इन आतंकवादी संगठनों को प्रशिक्षण और धन मुहैया कराना जारी रखती है और अपने पड़ोसियों, भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ इनका इस्तेमाल करती है। इन संगठनों में से कई अवैध ड्रग्स के कारोबार में लगे हुए हैं और अपने कैडरों के लिए भारी राजस्व कमाते हैं।

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पाकिस्तान सरकार ने जून 2018 में कमियों को दूर करने के लिए एफएटीएफ के साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई थी। लेकिन अक्टूबर 2019 में अंतर सरकारी संगठन की समीक्षा में पाकिस्तान सरकार द्वारा आतंकी वित्तपोषण जोखिमों को दूर करने के लिए प्रगति में कमी का पता चला। एफएटीएफ ने उल्लेख किया है कि पाकिस्तान ने 27 में से केवल पांच बिंदुओं पर कार्रवाई नियोजित किया था, बाकी पर प्रगति के स्तर में भिन्नता थी। एफएटीएफ ने फरवरी 2020 तक पाकिस्तान के लिए धन-शोधन और आतंकवादी संगठनों को धन मुहैया कराने को रोकने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करने की समय सीमा निर्धारित की थी।

साथ ही एफएटीएफ ने चेतावनी दी कि अगर इमरान खान सरकार तब तक खामियों को दूर करने में विफल रही, तो वह कार्रवाई करेगा। जिसमें अन्य देशों के वित्तीय संस्थानों को पाकिस्तान में समकक्षों से किसी तरह के लेनदेन के दौरान सतर्क रहने के लिए कॉल करना शामिल हो सकता है।
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