फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Gulf Countries ›   Women wearing that mysterious mask

वो रहस्यमयी नाकाबपोश औरतें

Thu, 20 Jul 2017 12:46 PM IST
BBC
BBC Updated Thu, 20 Jul 2017 12:46 PM IST
विज्ञापन
Women wearing that mysterious mask
ईरान - फोटो : BBC

मुस्लिम महिलाओं के बीच हिजाब या पर्दे या बुर्के का चलन बड़े पैमाने पर है। अलग अलग देशों में अलग तरह के हिजाब, चेहरा और सिर ढंकने में इस्तेमाल किए जाते हैं। मगर, ईरान के होर्मोज्गान सूबे की महिलाएं सिर्फ बुर्का नहीं बल्कि चेहरे पर अलग तरह के मुखौटे भी लगाती हैं। होर्मोज्गान सूबा, ईरान के दक्षिण में है। यहां समंदर किनारे बसने वाले लोगों को बंदारी यानी बंदरगाह के पास बसने वाले लोग कहा जाता है। बंदारी महिलाएं, चेहरे पर तरह-तरह के मुखौटे लगाती हैं। इस वजह से पूरी दुनिया में ईरान की बंदारी महिलाओं की अलग ही पहचान है।

विज्ञापन


कई सदियों से ईरान का ये इलाका मशहूर स्पाइस रूट का हिस्सा रहा था। यानी इस समुद्री रास्ते से होकर भारत और दूसरे देशों के बीच मसालों का कारोबार होता था। इस रास्ते को अरबों के अलावा अफ्रीकी, ईरानी और यूरोपीय कारोबारी भी इस्तेमाल करते थे।
विज्ञापन


ईरान के इस इलाके के लोगों का पहनावा देश के बाकी हिस्सों से अलग है। वो रंग-बिरंगे कपड़े पहनती हैं। जबकि बाकी ईरानी महिलाएं आम तौर पर सिर से पैर तक काले बुर्के में ढंकी नजर आती हैं। होर्मोज्गेन की महिलाओं के पहनावे की सबसे बड़ी खासियत है उनका बोरेगेह या मुखौटा। शिया हों या सुन्नी, सब इसे पहनती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

Women wearing that mysterious mask
Iran

बंदारी महिलाएं सदियों से ये मुखौटे पहनती आ रही हैं। पहले के जमाने में इसका सबसे बड़ा मकसद था आक्रमणकारियों से खुद को बचाना। कहा जाता है कि जब इस इलाके पर पुर्तगाल का कब्जा था, तब गुलामी से बचने के लिए वो ये मुखौटे पहनने लगीं। पुर्तगाली सरदार अक्सर खूबसूरत महिलाओं को अगवा कर ले जाते थे। इसीलिए मुखौटे का चलन यहां आम हो गया।

आज की तारीख में तरह-तरह के मुखौटे, होर्मोज्गेन सूबे के मजहब और संस्कृति का हिस्सा बन चुके हैं। ये मुखौटे बंदारी महिलाओं की आंखों और चेहरे को सूरज की तेज रौशनी से भी बचाते हैं। इस इलाके में सूरज अक्सर तल्ख तेवर दिखाता है। यूं तो अरब देशों से लेकर फारस तक सभी देशों में बुर्के का चलन है। लेकिन इन ईरानी महिलाओं के मुखौटे इन्हें अलग ही पहचान देते हैं।

पूरे होर्मोज्गेन सूबे में महिलाएं तरह-तरह के मुखौटे पहने हुए दिख जाएंगी। किसी में सिर्फ आंख खुली होगी, तो किसी में चेहरे को कोई अलग ही रूप देने की कोशिश होती है। कुछ चमड़े से बने होते हैं, तो कुछ कढ़ाई वाले कपड़े से। इन सबसे कम से कम महिलाओं का माथा तो ढंकता ही है। नाक भी अक्सर ढंकी होती है। कुछ महिलाओं के मुखौटों से उनका मुंह भी बंद हो जाता है।

Women wearing that mysterious mask
Iran

अलग समुदायों और इलाकों में अलग-अलग तरह के मुखौटे होते हैं। इन मुखौटों से ही ये पता लगाया जा सकता है कि महिला किस इलाके की रहने वाली है। एक खास मुखौटा जो मूंछों के आकार का होता है, वो यहां के केश्म जजीरे की महिलाएं पहनती हैं। कहते हैं कि जब हमला करने वाले आते थे, तो उन्हें मर्दों का धोखा देने के लिए महिलाएं ये मूंछों वाले मुखौटे पहना करती थीं।

आज होर्मोज्गेन सूबे की बहुत सी महिलाओं ने मुखौटे पहनना छोड़ दिया है। वो आम तौर पर हिजाब लेकर चलती हैं। बहुत सी महिलाएं हैं जो मुखौटे नहीं पहनतीं, मगर उन्हें किसी मर्द के साथ तस्वीरें खिंचवाने पर ऐतराज होता है। क्योंकि यहां पर महिलाओं का बेपर्दा होकर मर्दों के सामने आना समाज के नियमों के खिलाफ है।

इन परंपराओं और मुखौटों की वजह से बंदरी महिलाएं बाकी दुनिया से कटी हुई सी मालूम होती हैं। लेकिन, धीरे-धीरे बंदारी समुदाय में भी खुलापन आ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed