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ईरान पर आज से अमेरिकी प्रतिबंध, सता रहा मुसीबत बढ़ने का डर

Mon, 05 Nov 2018 12:57 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 05 Nov 2018 12:57 AM IST
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US sanctions on Iran starting today

अमेरिका द्वारा सोमवार से ईरान पर तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद वहां के नागरिकों को जीवन-यापन सहित अन्य मुश्किलें बढ़ने का डर सता रहा है। इसके अलावा कारोबार के लिए कच्चा माल और बूढ़े व बीमार लोगों के लिए जीवन रक्षक दवाएं खरीदना उनकी पहुंच से बाहर हो जाएगा। अमेरिका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर अंकुश लगाने को लेकर अपने पुराने शत्रु ईरान के महत्वपूर्ण पेट्रोलियम और बैंकिंग सेक्टर पर फिर से प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इस कार्रवाई से आम ईरानी नागरिक इससे काफी डरे हुए हैं। ईरान के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक 43 वर्षीय पेजमान सरफनेजाद ने कहा, ‘सभी वस्तुओं की कीमतें हर दिन बढ़ रही हैं। 

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यहां तक कि मैं अपने बच्चों के लिए चावल भी नहीं खरीद सकता और घर का किराया भी नहीं दे सकता। मैं सोच भी नहीं सकता कि 4 नवंबर के बाद क्या होगा। मैं काफी चिंतित और निराश हूं।’ अमेरिकी सजा के डर से विदेशी कारोबारियों ने ईरान से तेल कंपनियों से लेकर व्यापार और शिपिंग के सारे कारोबार बंद कर दिए हैं। तेहरान के ग्रैंड बाजार में किराने की दुकान चलाने वाले ने कहा, ‘मैं बहुत भ्रमित हूं, क्योंकि बाजार में बहुत सारी वस्तुओं की पहले ही कमी है। न जाने नए प्रतिबंध लगने के बाद क्या होगा।’ हालांकि ईरान के नेतृत्व ने कहा है कि वह अमेरिकी दबाव में अपने मिसाइल कार्यक्रमों को नहीं रोकेगा और न ही क्षेत्रीय नीतियों में बदलाव करेगा।
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वहीं, उत्तरी शहर सारी के 38 वर्षीय सरकारी कर्मचारी मोहम्मद रेजा सादोगी ने कहा, ‘प्रतिबंध का सबसे ज्यादा असर सामान्य लोगों और मरीजों पर पड़ा है। मेरे पिता कैंसर के मरीज हैं, और कालाबाजारी के कारण कैंसर की दवा काफी महंगी बिक रही है।’ दरअसल अमेरिका ने 2015 में ईरान से प्रतिबंध हटा लिए थे, जिसे ट्रंप ने दोबारा लगा दिया है। अमेरिका ने अगस्त में भी प्रतिबंध लगा दिया था।
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70 फीसदी छोटे कारखाने बंद

प्रतिबंध के कारण ईरान में 70 फीसदी तक छोटे कारखाने और वर्कशॉप कच्चे माल की कमी के कारण पिछले महीने से ही बंद होने शुरू हो गए हैं। ईरानी मुद्रा रियाल का काफी अवमूल्यन हो चुका है। एक कारोबारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, ‘मुझे अपने व्यवसाय बंद करना पड़ा। पिछले साल जो यूरोपीय कंपनियां मेरे साथ सौदा करने की होड़ लगाए थे, अब मुझे पलटकर फोन तक नहीं करते।’ 


अमेरिका के खिलाफ छात्रों ने निकाली रैली

तेहरान में रविवार को सरकार द्वारा आयोजित रैली में हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया। वर्ष 1979 में इस्लामिक क्रांति के दौरान अमेरिकी दूतावास को बंद करने की वर्षगांठ और तेल के कारोबार पर दोबारा प्रतिबंध लगाने के खिलाफ छात्रों ने अपनी सरकार का समर्थन करते हुए रैली में ‘अमेरिका की मौत’ के नारे लगाए। 

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