आतंकवाद को रोकने के लिए 'हदीस' की समीक्षा कराएगा सऊदी अरब
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सऊदी अरब ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए हदीस (पैगंबर साहब की शिक्षा और कार्य, जैसा कि उनके अनुयायियों ने बताया है) की व्याख्या की समीक्षा की बात कही है। इसके लिए विद्वानों की एक समिति गठित की है।
किंग सलमान की ओर से जारी आदेश के मुताबिक मदीना में रहने वाले आला विद्वानों के एक अंतरराष्ट्रीय निकाय का गठन किया गया है, जो हदीस को पेश करने वालों की राय की समीक्षा करेगा ताकि इसका इस्तेमाल हिंसा और आतंकवाद को जायज ठहराने में न किया जाए।
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सऊदी अरब के संस्कृति और सूचना मंत्रालय ने कहा है कि किंग सलमान कॉम्प्लेक्स (विद्वानों की परिषद) सही और प्रामाणिक हदीस का विश्वसनीय स्रोत बन जाएगा। मंत्रालय ने कहा है कि आला विद्वान हदीस के नाम पर पेश किए जाने वाले नकली पाठ या पाठों की समीक्षा करेंगे।
इस्लाम शांति का धर्म है। मक्का और मदीना की दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक सऊदी किंग सलमान ने वरिष्ठ विद्वानों की परिषद के एक सदस्य शेख मोहम्मद बिन हसन अल-शेख को इसकी वैज्ञानिक परिषद का चेयरमैन बनाया है। परिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राजकीय आदेश से होगी।
जानें हदीस के बारे में
दरअसल सऊदी अरब घरेलू और आसपास में फैले दहशतगर्द से बेहद चिंतित है। इस वजह से उसके पड़ोसी और पश्चिमी देशों से रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। सऊदी अरब का नया नेतृत्व दुनिया में अपनी छवि को लेकर काफी सतर्कता बरत रहा है।
ऐसा देश जो अतिवादियों की गिरफ्त से बाहर है। सऊदी अरब यमन के मामले में दबाव का सामना कर रहा है। पिछले महीने तीन साल के गृह युद्ध के दौरान यमन में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र ने स्वतंत्र जांच कराने का फैसला किया है।
क्या है हदीस
हदीस पैगंबर मोहम्मद के पूरक कथनों, कार्यों और ऐलान का संग्रह है। पूरी दुनिया में मुसलमान इसे मानते हैं। इस्लाम में हदीस धार्मिक कानून और नैतिक मार्गदर्शन के लिए पवित्र कुरान के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत हैं।