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अरब देशों से बातचीत के लिए कतर ने 'टेढ़ी की उंगली'

Tue, 01 Aug 2017 10:21 AM IST
amarujala.com- Presented by: ऋतुराज त्रिपाठी
amarujala.com- Presented by: ऋतुराज त्रिपाठी Updated Tue, 01 Aug 2017 10:21 AM IST
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Qatar hard action to negotiate with Arab countries
कतर

पड़ोसी अरब देशों की पाबंदियां झेल रहे कतर ने अब उन्हें बातचीत की मेज पर लाने के लिए उंगली टेढ़ी की है। खबर है कि कतर ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में आधिकारिक शिकायत करके इस व्यापारिक बहिष्कार को चुनौती दी है। अब इस विवाद का हल निकालने की कोशिश डब्ल्यूटीओ की प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

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इसका मतलब ये है कि सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को कतर के साथ बातचीत की मेज पर आना होगा। जबकि इससे पहले इन देशों ने किसी भी तरह की बातचीत के लिए 13 शर्तें रखी थीं। लेकिन डब्ल्यूटीओ की सामान्य प्रक्रिया से अगर 60 दिनों के भीतर कोई हल नहीं निकला तो यह विवाद डब्ल्यूटीओ की ओर से नियुक्त एक पैनल को दे दिया जाएगा। 
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5 जून को कतर से तोड़े थे संबंध
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कतर की ओर से डब्ल्यूटीओ में शिकायत किए जाने की ख़बर सबसे पहले दी। हालांकि बीबीसी से बातचीत में विश्व व्यापार संगठन ने कहा कि उसे अब तक इसकी जानकारी नहीं मिली है, इसलिए वह खबर की पुष्टि नहीं कर सकता। सऊदी अरब, बहरीन और यूएई ने 5 जून को कतर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए संबंध तोड़ लिए थे।
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उन्होंने अरब में रह रहे कतर के नागरिकों को 14 दिनों के भीतर देश छोड़ने को कह दिया था और अपने नागरिकों के भी कतर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी थी। रविवार को चारों देशों के विदेश मंत्री बहरीन की राजधानी मनामा में मिले थे और इसके बाद उन्होंने 13 शर्तों के बिना संवाद करने से मना कर दिया था। इन शर्तों में कतर के समाचार ब्रॉडकास्टर अल-जज़ीरा को बंद करना और ईरान से संबंधों को कम करना शामिल है। कतर ने इन आरोपों और पाबंदियां हटाने के लिए अरब देशों की शर्तों को खारिज कर दिया था। 

दो वजहों से बिगड़ी कतर से बात
मिस्र ने भी कतर से राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे, लेकिन वहां रह रहे अपने 1.80 लाख नागरिकों पर पाबंदियां नहीं लगाई थीं। यमन, मालदीव और लीबिया की सरकारों ने भी बाद में ऐसा ही किया था। लेकिन सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिस्र ने कतर के विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दी थी। तेल समृद्ध कतर लंबे समय से महत्वाकांक्षी विदेश नीति अपनाए हुए था। लेकिन दो प्रमुख मुद्दों पर उसके पड़ोसी अरब देश खासे नाराज हो गए। 


पहला, कतर पर कट्टरपंथी इस्लामी समूहों को समर्थन देने का आरोप कतर स्वीकार करता है कि उसने कुछ समूहों- मसलन मुस्लिम ब्रदरहुड की मदद की, लेकिन अलकायदा या कथित इस्लामिक स्टेट से जुड़े चरमपंथी संगठनों की मदद से वह इनकार करता है। दूसरा मुद्दा है, कतर के ईरान से बेहतर होते संबंध ईरान के साथ कतर दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड साझा करता है।  शिया मुस्लिम शक्ति ईरान और सुन्नी मुस्लिम ताक़त सऊदी अरब प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी हैं। 

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