फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Gulf Countries ›   IS killed 741 civilians in the battle of Mosul

मोसुल की जंग में ISIS ने 741 नागरिकों को उतारा था मौत के घाट

Fri, 03 Nov 2017 11:28 AM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Fri, 03 Nov 2017 11:28 AM IST
विज्ञापन
IS killed 741 civilians in the battle of Mosul
मोसुल - फोटो : File Photo
इराक के मोसुल शहर में हुए संघर्ष के दौरान आईएस ने कम से कम 741 आम लोगों को मारा था। यह आंकड़ा संयुक्त राष्ट्र ने जारी किया है। जिहादियों पर आरोप हैं कि उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों का अपहरण किया, मानव ढाल का उपयोग किया, जबरदस्ती घरों को खाली करवाया और जो लोग जान बचाकर भागने का प्रयास कर रहे थे उन पर हमला किया।
विज्ञापन


संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख जीद राद अल हुसैन ने कहा, ''इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले दोषियों को जवाब देना होगा।'' इसके साथ ही उन्होंने इराकी सेना द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच करने की बात भी कही।
विज्ञापन


हवाई हमलों में गई 461 जानें
संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि युद्ध जब चरम पर था उस समय इराकी सेना और अमेरिकी नेतृत्व में हुए हवाई हमलों में 461 नागरिकों की जान गई थी। यह हमले नवंबर 2016 से जुलाई 2017 के बीच हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इराक के लिए बनाए गए संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग की तरफ से गुरुवार को यह रिपोर्ट जारी की गई। 

इस रिपोर्ट में बताया गया कि इस सैन्य कार्रवाई में लगभग 2,521 नागरिकों की मौत हुई जबकि 1,673 अन्य नागरिक घायल हुए। इस संघर्ष में अधिकतर लोग आईएस की तरफ से किए गए हमलों में मारे गए।
 

लाउडस्पीकर से घोषणा

IS killed 741 civilians in the battle of Mosul
ISIS - फोटो : File Photo
रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2016 की शुरुआत में आईएस के नियंत्रण वाले मोसुल इलाके में आईएस के सदस्य लाउडस्पीकर के जरिए यह घोषणा करते थे कि इराकी सैन्यबलों द्वारा जिन घरों को दोबारा नियंत्रण में लिया गया है वे उनके लक्ष्य में है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह एक तरह का फतवा था जिसके जरिए पूर्वी मोसुल के नागरिकों को लगातार निशाना बनाए जाने का अभियान चलाया जा रहा था। इस अभियान में मानव ढाल का इस्तेमाल, विस्फोटकों का निर्माण और जान बचाकर भागने वाले नागरिकों को मारना शामिल था।

जीद ने कहा, ''मोसुल शहर पर दोबारा कब्जा करने के दौरान हजारों नागरिकों के मानवाधिकारों का दुरुपयोग हुआ और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया।''

उन्होंने कहा, ''किसी भी सशस्त्र संघर्ष के दौरान आम लोगों की हत्या, परिवारों को पीड़ा पहुंचाना और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे कृत्यों को कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और जो भी लोग इसके जिम्मेदार है उन्हे अपने घृणित अपराधों का जवाब देना होगा।''

इस रिपोर्ट के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की गई कि इराक में हुए नरसंहार, मानवता पर किए गए हमले और युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही इराक से यह भी यह अपील की गई है कि वह अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) के फैसले का सम्मान करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed