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इंसानियतः फ्रांसीसी कमांडोज़ ने इस्लाम अपनाकर बचाई थी हज यात्रियों की जान
amarujal.com, Presented By: आसिफ़ इक़बाल
Updated Thu, 24 Aug 2017 06:26 PM IST
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आईएस के खौफ से दुनिया वाकिफ है। अबु बकर अल बगदादी ने खुद को मुसलमानों का खलीफा बताकर आतंक का एक नया युग शुरू किया। ऐसा पहली बार नहीं हैं कि किसी ने खुद को मुसलमानों का खलीफा बताया हो।
इससे पहले जुहयमान अल-ओतोयबी ने खुद को मुसलमानों का खलीफा बताकर सउदी अरब की मस्जिद उल हरम पर कब्जा कर लिया था, जहां पवित्र काबा है। मस्जिद में फंसे हजयात्रियों को ओतोयबी से मुक्त कराने के लिए फ्रांस के तीन ईसाई कमांडोज़ ने इंसानियत दिखाते हुए इस्लाम कुबूल कर लिया था।
हज के आखिरी दिन 20 नवंबर 1979 की सुबह जब शाही मस्जिद के इमाम शेख मोहम्मद अल सुबाइल लगभग 50000 हजयात्रियों को संबोधित करने वाले थे, ठीक उसी वक्त कुछ लोग ताबूतों के साथ मस्जिद में दाखिल होते हैं और गोली चलाना शुरू कर देते हैं।
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इससे पहले जुहयमान अल-ओतोयबी ने खुद को मुसलमानों का खलीफा बताकर सउदी अरब की मस्जिद उल हरम पर कब्जा कर लिया था, जहां पवित्र काबा है। मस्जिद में फंसे हजयात्रियों को ओतोयबी से मुक्त कराने के लिए फ्रांस के तीन ईसाई कमांडोज़ ने इंसानियत दिखाते हुए इस्लाम कुबूल कर लिया था।
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हज के आखिरी दिन 20 नवंबर 1979 की सुबह जब शाही मस्जिद के इमाम शेख मोहम्मद अल सुबाइल लगभग 50000 हजयात्रियों को संबोधित करने वाले थे, ठीक उसी वक्त कुछ लोग ताबूतों के साथ मस्जिद में दाखिल होते हैं और गोली चलाना शुरू कर देते हैं।
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ताबूत में मुर्दा नहीं, बल्कि हथियार
जुहयमान अल ओतोयबी
दरअसल ताबूतों में कोई मुर्दा नहीं, बल्कि हथियार थे। इसके साथ ही आतंकी ऐलान करते हैं कि मस्जिद पर उनका कब्जा हो गया है और दुनिया को एक नया मसीहा मिल गया है। यह हमला कट्टरपंथी धर्मप्रचारक और सऊदी नेशनल गार्ड के पूर्व सदस्य जुहयमान अल-ओतोयबी और मोहम्मद अब्दुल्ला अल-कतानानी के नेतृत्व में किया गया था।
उन्होंने खुद को मुसलमानों का मसीहा घोषित कर दिया। उनका कहना था कि ये हमला सऊदी राजशाही के विरुद्ध किया है, जिन्होंने इस्लामी सिद्धांतों को धोखा देते हुए पश्चिमी देशों को मुल्क बेच दिया। करीब 500 आतंकी हथियारों से लैस थे।
बिना खून खराबा किए मस्जिद अल हरम को आतंकियों से मुक्त कराने के लिए तुर्की के सुल्तान फैसल के छोटे बेटे और मस्जिद के इंचार्ज ने फ्रांस के सीक्रेट सर्विस ऑफीसर एलेक्जेंडर डी मारेंचेज़ से मदद की गुहार लगाई, जिन्होंने मस्जिद में बेहोश करने वाली गैस छोड़ने की सलाह दी।
इसके बाद सउदी सुरक्षा बल, पाकिस्तान की स्पेशल सर्विस गार्ड और फ्रांस के कमांडोज़ की संयुक्त टीम बनाई गई। अपनी किताब The Looming Tower: Al-Qaeda and the Road to 9/11 में लॉरेंस राइट लिखते हैं कि फ्रांस कमांडो की तीन सदस्यीय जीआईजीएन की टीम मस्जिद अल हरम को आतंकियों से मुक्त कराने के लिए मक्का पहुंची।
उन्होंने खुद को मुसलमानों का मसीहा घोषित कर दिया। उनका कहना था कि ये हमला सऊदी राजशाही के विरुद्ध किया है, जिन्होंने इस्लामी सिद्धांतों को धोखा देते हुए पश्चिमी देशों को मुल्क बेच दिया। करीब 500 आतंकी हथियारों से लैस थे।
बिना खून खराबा किए मस्जिद अल हरम को आतंकियों से मुक्त कराने के लिए तुर्की के सुल्तान फैसल के छोटे बेटे और मस्जिद के इंचार्ज ने फ्रांस के सीक्रेट सर्विस ऑफीसर एलेक्जेंडर डी मारेंचेज़ से मदद की गुहार लगाई, जिन्होंने मस्जिद में बेहोश करने वाली गैस छोड़ने की सलाह दी।
इसके बाद सउदी सुरक्षा बल, पाकिस्तान की स्पेशल सर्विस गार्ड और फ्रांस के कमांडोज़ की संयुक्त टीम बनाई गई। अपनी किताब The Looming Tower: Al-Qaeda and the Road to 9/11 में लॉरेंस राइट लिखते हैं कि फ्रांस कमांडो की तीन सदस्यीय जीआईजीएन की टीम मस्जिद अल हरम को आतंकियों से मुक्त कराने के लिए मक्का पहुंची।
फ्रैंच कमांडोज़ ने हज यात्रियों की हिफाजत के लिए छोड़ा धर्म
जीआईजीएन
चूंकि मस्जिद अल हरम में गैर मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, इसलिए कमांडोज़ ने कहा कि वो इस ऑपरेशन को किसी भी कीमत पर करना चाहते हैं और मस्जिद में फंसे हज यात्रियों को सकुशल आजाद कराना चाहते हैं।
इसके बाद तीनों फ्रैंच कमांडोज़ ने इंसानियत के नाते एक छोटे से समारोह में इस्लाम धर्म कुबूल किया और संयुक्त टीम के साथ मस्जिद अल हरम में प्रवेश किया। उन्होंने बेसमेंट में छिपे आतंकियों पर बेहोशी की गैस छोड़ी, लेकिन कई कमरों के एक-दूसरे से जुड़े होने और रौशनदान होने की वजह से गैस ने काम नहीं किया।
इसके बाद संयुक्त सेना ने दीवारों में सुराक करके अंदर ग्रेनेड फेंकने शुरू कर दिए। इसके बाद आतंकियों का कमरों से बाहर निकला शुरू हो गया और वो शार्पशूटर्स के निशाने पर आने लगे। दो हफ्तों की मुठभेड़ के बाद आतंकियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
इस पूरे ऑपरेशन में 117 आतंकी मारे गए, जबकि सेना के 127 जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 451 लोग घायल हुए। 9 जनवरी 1980 की सुबह मक्का समेत 8 सउदी के शहरों में पकड़े गए 63 आतंकियों के सार्वजनिक तौर पर सिर कलम कर दिए गए, जिनमें सउदी के 41, मिस्र के 10, यमन के 7, कुवैत के 3, सूडान और इराक से एक-एक आतंकी था।
इसके बाद तीनों फ्रैंच कमांडोज़ ने इंसानियत के नाते एक छोटे से समारोह में इस्लाम धर्म कुबूल किया और संयुक्त टीम के साथ मस्जिद अल हरम में प्रवेश किया। उन्होंने बेसमेंट में छिपे आतंकियों पर बेहोशी की गैस छोड़ी, लेकिन कई कमरों के एक-दूसरे से जुड़े होने और रौशनदान होने की वजह से गैस ने काम नहीं किया।
इसके बाद संयुक्त सेना ने दीवारों में सुराक करके अंदर ग्रेनेड फेंकने शुरू कर दिए। इसके बाद आतंकियों का कमरों से बाहर निकला शुरू हो गया और वो शार्पशूटर्स के निशाने पर आने लगे। दो हफ्तों की मुठभेड़ के बाद आतंकियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
इस पूरे ऑपरेशन में 117 आतंकी मारे गए, जबकि सेना के 127 जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 451 लोग घायल हुए। 9 जनवरी 1980 की सुबह मक्का समेत 8 सउदी के शहरों में पकड़े गए 63 आतंकियों के सार्वजनिक तौर पर सिर कलम कर दिए गए, जिनमें सउदी के 41, मिस्र के 10, यमन के 7, कुवैत के 3, सूडान और इराक से एक-एक आतंकी था।