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GPDRR 2025: 'आपदा प्रबंधन के लिए मजबूत वैश्विक वित्तीय सहयोग जरूरी', डॉ. पीके मिश्रा ने रखा भारत का पक्ष

Thu, 05 Jun 2025 12:51 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 05 Jun 2025 12:51 AM IST
सार

जिनेवा में जीपीडीआरआर 2025 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव  डॉ. पीके मिश्रा ने भारत का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में नियम आधारित फंडिंग मॉडल जरूरी है और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र समर्थित वैश्विक फंडिंग सुविधा बनाई जानी चाहिए।

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GPDRR 2025 Dr. PK Mishra In Geneva Emphasis on strong global financial cooperation for disaster management
डॉ. पीके मिश्रा - फोटो : एक्स@ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने बुधवार को जिनेवा में आयोजित ग्लोबल प्लेटफॉर्म फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (जीपीडीआरआर) 2025 सम्मेलन में भारत का बयान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत मानता है कि आपदा जोखिम को कम करने (डीआरआर) के लिए एक मजबूत और उत्तरदायी वित्तीय ढांचा बेहद जरूरी है, जो किसी भी देश की मजबूती और तैयारियों की नींव होता है।

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डॉ. मिश्रा ने बताया कि भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की मदद से राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर तक पूर्व निर्धारित और नियम आधारित धन आवंटन की व्यवस्था है। इससे आपदा फंडिंग केवल एक प्रतिक्रियात्मक उपाय नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और पूर्वानुमान योग्य प्रणाली बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के दृष्टिकोण की नींव चार अहम सिद्धांतों पर टिकी है। हालांकि उन्होंने भाषण में उनके नाम स्पष्ट रूप से नहीं गिनाए।
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डॉ मिश्रा ने वैश्विक सहयोग पर दिया जोर
इसके साथ ही डॉ. मिश्रा ने वैश्विक सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं के समर्थन से एक वैश्विक सुविधा बनाई जानी चाहिए, जो कि शुरुआती फंडिंग देने सके, तकनीकी सहायता प्रदान करे और ज्ञान साझा करने के लिए एक मंच भी उपलब्ध कराए। 

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उन्होंने कहा कि इस तरह की वैश्विक साझेदारी से दुनिया भर में आपदा प्रबंधन की क्षमता को मजबूती मिलेगी। बता दें जीपीडीआरआर 2025 आपदा जोखिम को कम करने से जुड़े वैश्विक प्रयासों को साझा करने और सहयोग बढ़ाने का एक बड़ा मंच है, जिसमें दुनिया के कई देश हिस्सा ले रहे हैं।

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