Gold Vs Dollar: आखिर कब तक मद्धिम रहेगी सोने की चमक? डॉलर में पैसा लगा रहे निवेशक
Gold Vs Dollar: विश्लेषकों ने कहा है कि इस वर्ष के आरंभ में सोने की कीमत निवेशकों में मौजूद इस धारणा के कारण बढ़ी थी कि असुरक्षा के काल में निवेश के लिए सोने से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। लेकिन उसके बाद डॉलर में निवेश पर मिलने वाले ब्याज दर में इजाफा होने लगी...
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विश्व बाजार में फिलहाल सोने का आकर्षण घट रहा है। इस वर्ष यूक्रेन युद्ध शुरू होने के समय सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन अब उसमें काफी गिरावट आ चुकी है। जानकारों के मुताबिक इसका कारण अमेरिका में ब्याज दरों का बढ़ना है, जिसकी वजह से डॉलर महंगा हुआ है। इसीलिए निवेशक सोना बेच कर डॉलर में पैसा लगाना अभी ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं।
इस महीने के पहले हफ्ते में न्यूयॉर्क के वायदा बाजार में सोने की कीमत औसतन 1,729 डॉलर प्रति औंस रही। बीते मार्च की तुलना में यह 15 फीसदी कम है। सितंबर में तो एक मौके पर ये कीमत 1,626 डॉलर प्रति औंस तक गिर गई थी। अप्रैल 2020 के बाद सोने की इतनी कम कीमत कभी नहीं रही।
विश्लेषकों ने कहा है कि इस वर्ष के आरंभ में सोने की कीमत निवेशकों में मौजूद इस धारणा के कारण बढ़ी थी कि असुरक्षा के काल में निवेश के लिए सोने से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। लेकिन उसके बाद डॉलर में निवेश पर मिलने वाले ब्याज दर में इजाफा होने लगी। जानकारों के मुताबिक सोना और डॉलर दोनों की कीमत में अकसर विपरीत संबंध रहता है। यानी एक कीमत बढ़ने पर दूसरे की कीमत गिरती है।
सितंबर के अंत तक डॉलर इंडेक्स बढ़ते हुए 114 अंकों पर पहुंच चुका था। डॉलर इंडेक्स दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर की शक्ति बताने वाला सूचकांक है। वित्तीय बाजारों में सोने को ‘देशों की सीमा से परे मुद्रा’ समझा जाता है। जब डॉलर समेत विभिन्न देशों की मुद्राओं में उनका भरोसा डिगने लगता है, तब वे स्वर्ण में निवेश करते हैं। लेकिन सोने में निवेश पर कोई ब्याज नहीं मिलता। उस निवेश में लाभ होगा या नुकसान यह बाजार में सोने की कीमत से तय होता है। जबकि ब्याज दर बढ़ने के कारण फिलहाल डॉलर में निवेश से अब निश्चित ठोस मुनाफे की स्थिति बनी ही है।
लेकिन कई बाजार विशेषज्ञों की राय है कि मौजूदा स्थिति टिकाऊ नहीं है। उनका अनुमान है कि अगले साल की शुरुआत तक सोने के भाव में फिर चढ़ाव देखने को मिलेगा। जापान स्थित फर्म तोशिमा एंड एसोसिएट्स में वित्तीय बाजार के विश्लेषक इत्सुओ तोशिमा को उम्मीद है कि अगले साल सोने का भाव 1,800 से 2,200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचेगा। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में उन्होंमने कहा- ‘अमेरिका में स्टैगफ्लेशन (आर्थिक वृद्धि से अधिक मुद्रास्फीति दर) की स्थिति है। निवेशक जल्द ही इससे चिंतित होंगे।’
तोशिमा के मुताबिक अमेरिका के लिए महंगाई पर काबू पाना अभी काफी समय तक मुश्किल बना रहेगा। इसलिए कि ब्याज दर बढ़ा कर मकान किराये पर नियंत्रण पाना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि वैसे भी डॉलर की कीमत अपने चरमसीमा पर पहुंच रही है। इसके आगे उसकी कीमत जाए, ऐसे कोई अतिरिक्त पहलू अगले साल सामने आएंगे, इसकी संभावना नहीं है।
नोमुरा सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अर्थशास्त्री तात्सुफूमी ओकोशी ने उम्मीद जताई है कि अगले साल सितंबर से अमेरिकी सेंट्रल बैंक- फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती शुरू करेगा। तब उसका लाभ सोने को मिलेगा। उन्होंने कहा- ‘अमेरिका में मंदी का भय छाया हुआ है। ऐसे में फिर से निवेशकों को सोने में पैसा लगाना ही ज्यादा सुरक्षित महसूस हो सकता है।’