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ग्लोबल वार्मिंग के असर से ध्रुवों पर 280 फीसदी बढ़ी बर्फ पिघलने की दर, अब वैज्ञानिक जमाने में जुटे

Fri, 14 Jun 2019 06:21 PM IST
Priyesh Mishra वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 14 Jun 2019 06:21 PM IST
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Global Warming Scientists of Cambridge University are trying to create artificial snow on poles
सांकेतिक तस्वीर
ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रही दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्लेशियर और ध्रुवों पर तेजी से पिघल रही बर्फ को जमाना है। जलवायु परिवर्तन पर लगातार सम्मेलन होते रहते हैं जहां रोकथाम के तौर-तरीकों पर गंभीर मंथन किया जाता है।
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हाल में ही कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा शोध केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है जिससे धरती को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने में मदद मिलेगी। इसमें वैज्ञानिक ऐसे तरीकों की तलाश करेंगे जिससे धरती के वातावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड को बाहर निकाला जा सके और पिघल चुकी बर्फ को फिर से जमाया जाए।
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10 साल की मेहनत अगली पीढ़ियों के काम आएगी

विशेषज्ञों के अनुसार पर्यावरण को बचाने के क्षेत्र में ईमानदारी के किया गया प्रयास ही अगली पीढ़ियों के काम आएगा। धरती पर लगातार बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम ने फसल चक्र को भी प्रभावित किया है। लगातार फसलों का उत्पादन घट रहा है। बारिश की मात्रा में कमी हो रही है। विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए प्राकृतिक तरीकों का प्रयोग कर रहे हैं।
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ध्रुवों पर पिघल रहे बर्फ को रोकने में जुटे वैज्ञानिक

Global Warming Scientists of Cambridge University are trying to create artificial snow on poles
सांकेतिक तस्वीर
दुनिया भर के वैज्ञानिकों का समूह ध्रुवों और ग्लेशियर पर तेजी से पिघल रही बर्फ को रोकने और उन्हें फिर से जमाने में लगा है। इससे समुद्र का जलस्तर भी नहीं बढ़ेगा जिससे समुद्र किनारे बसी आबादी सुरक्षित रहेगी। इसके लिए वैज्ञानिक तीन तरीकों से समाधान ढूंढ़ने में लगे हैं।

कार्बन डाइऑक्साइड से ईंधन बनाने की योजना बनाना

वैज्ञानिक  'कार्बन कैप्चर और यूटिलाइजेशन विधि द्वारा कार्बन डाईऑक्साइड को रिसाइकिल करने की योजना बना रहे हैं। इससे निकलने वाली उर्जा के द्वारा बिजली भी बनाई जा सकती है। इस योजना पर ब्रिटेन के वेल्स में टाटा समूह के साथ मिलकर वैज्ञानिक काम कर कर रहे हैं। 

बादलों को चमकदार बनाकर सूरज की गर्मी को रिफ्लेक्ट करना

वैज्ञानिक धरती पर आने वाली सूरज की बेतहाशा गर्मी की काट खोजने में जुटे हैं। इसके लिए वैज्ञानिकों की ध्रुवीय क्षेत्रों के बादलों को चमकदार बनाने की योजना है। इससे धूप से पैदा होने वाली गर्मी धरती से रिफ्लेक्ट होगी। 

समुद्री वनस्पति को बढ़ाना

इस प्रक्रिया के तहत वैज्ञानिक समुद्रों की वनस्पतियों को विकसित करेंगे। ताकि वह ज्यादा मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड को ले सकें। इससे समुद्री जीवों को भी पर्याप्त मात्रा में भोजन मिलेगा।

पिछले 16 साल में 280 फीसदी बढ़ी बर्फ पिघलने की दर

Global Warming Scientists of Cambridge University are trying to create artificial snow on poles
सांकेतिक तस्वीर
ध्रुवों पर बर्फ पिघलने की दर तेजी से बढ़ी है। पिछले 16 सालों में बर्फ पिघलने की दर 280 फीसदी ज्यादा हो गई है जिससे समुद्र के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार पिछले दस सालों में पूर्वी अंटार्कटिका में सबसे ज्यादा बर्फ पिघली है। 

लगातार टूट रहे हैं आइसबर्ग (हिमखंड)

धरती पर मीठे पानी के सबसे बड़े स्रोतों में से एक हिमचादरों से लगातार बर्फ के बड़े खंड टूट रहे हैं जिन्हें आइसबर्ग कहा जाता है। इनके टूटने की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल वार्मिंग के द्वारा तेजी से बढ़ रहा तापमान है। इससे समुद्री आवागमन को भी खतरा उत्पन्न हो रहा है। अगर यही हाल रहा तो समुद्र के बढ़ते जलस्तर से बड़ी संख्या में मानव आबादी प्रभावित होगी। इसके अलावा भी कई प्रजातियां धरती से विलुप्त हो जाएंगी।
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